देवरिया में अवैध हिरासत मामला: हाईकोर्ट सख्त, एसएचओ के वेतन से वसूला जाएगा 65 हजार का मुआवजा

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने देवरिया जिले के गौरी बाजार थाने में चार लोगों को लगभग 10 दिनों तक गैरकानूनी तरीके से हिरासत में रखने के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने राज्य सरकार को पीड़ितों को कुल 65,000 रुपये का मुआवजा भुगतान करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह पूरी राशि दोषी थानाध्यक्ष (एसएचओ) के वेतन से काटी जाएगी।

मुआवजे का निर्देश और फुटेज गायब होने पर सवाल

जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस दिवेश चंद्र सामंत की दो सदस्यीय खंडपीठ ने यह आदेश एक हेबियस कॉर्पस (बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिका की सुनवाई के दौरान दिया। अदालत के निर्देशानुसार, याचिकाकर्ता संख्या 2, 3 और 4 को 20-20 हजार रुपये तथा याचिकाकर्ता संख्या 1 को 5,000 रुपये दिए जाएंगे।

याचिका में आरोप लगाया गया था कि चारों नागरिकों को 13 अप्रैल से 23 अप्रैल 2026 के बीच गौरी बाजार थाने में अवैध रूप से निरुद्ध रखा गया था। आरोपों की सच्चाई परखने के लिए हाईकोर्ट ने थाने के भीतर की सीसीटीवी फुटेज मांगी थी, जिसे पुलिस प्रशासन उपलब्ध नहीं करा सका।

जीडी में मरम्मत का कोई विवरण दर्ज नहीं

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सीसीटीवी रिकॉर्डिंग उपलब्ध न होने पर अदालत ने देवरिया के पुलिस अधीक्षक (एसपी) और संबंधित एसएचओ को व्यक्तिगत रूप से तलब किया था। इससे पहले 2 सितंबर को राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई थी कि कथित घटना से कुछ दिन पहले ही सीसीटीवी रिकॉर्डिंग सिस्टम में तकनीकी खराबी आ गई थी।

बुधवार को सुनवाई के दौरान जब कोर्ट ने पूछताछ की, तो एसएचओ ने कहा कि 12 अप्रैल 2026 को सिस्टम खराब हुआ था। इस पर अदालत ने पूछा कि क्या कैमरों की मरम्मत के संबंध में जनरल डायरी (जीडी) में कोई प्रविष्टि दर्ज की गई थी, तो एसएचओ ने स्वीकार किया कि जीडी में ऐसा कोई विवरण दर्ज नहीं था। वहीं, जिले के एसपी ने बेंच को बताया कि उन्हें सीसीटीवी खराब होने की कोई सूचना नहीं दी गई थी।

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एसएचओ के तबादले पर अदालत ने जताई नाखुशी

पीठ ने पुलिस अधीक्षक से सवाल किया कि कथित तौर पर दोषी पाए जाने के बावजूद एसएचओ को कोई वास्तविक सजा क्यों नहीं दी गई और उनके खिलाफ क्या ठोस कदम उठाए गए।

एसपी ने जवाब दिया कि एसएचओ का तबादला क्राइम ब्रांच में कर दिया गया है। हाईकोर्ट ने इस पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि वह पुलिस अधिकारी पर की गई इस कार्रवाई से संतुष्ट नहीं है।

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