लखनऊ अग्निकांड: 15 मौतों के मामले में किराएदार को मिली जमानत, हाईकोर्ट ने कहा- सुरक्षा नियमों की अनदेखी के लिए भवन मालिक प्रथम दृष्टया जिम्मेदार

लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में 22 जून 2024 को हुए भीषण अग्निकांड में 15 लोगों की जान जाने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक आरोपी किराएदार को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है। अदालत ने पाया कि आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने और अग्नि-सुरक्षा नियमों का पालन सुनिश्चित करने की प्राथमिक जिम्मेदारी किराएदार की नहीं, बल्कि भवन स्वामी की थी, जिसमें वह प्रथम दृष्टया विफल रहा।

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के न्यायमूर्ति मनीष कुमार ने यह आदेश तीसरी मंजिल के किराएदार सुरेश कुमार साहू की जमानत याचिका स्वीकार करते हुए पारित किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि आरोपी केवल एक किराएदार था, न कि इमारत का मालिक। घटना के समय वह मौके पर भी मौजूद नहीं था।

ताला लगाने के आरोप और छत तक पहुंच पर अदालत की टिप्पणी

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जांच के दौरान अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया था कि साहू ने अपने किराए के हिस्से के बाहर लगे चैनल गेट पर ताला लगा रखा था। आरोप में यह दावा किया गया कि यदि वह रास्ता खुला रहता तो शायद कुछ और लोगों की जान बचाई जा सकती थी।

इस तर्क को खारिज करते हुए अदालत ने कहा कि साहू इस बात का पहले से अंदाजा नहीं लगा सकता था कि इमारत में अचानक आग भड़क उठेगी और अपने परिसर पर ताला लगाने से किसी की जान जा सकती है।

रिकॉर्ड पर पेश की गई तस्वीरों का संज्ञान लेते हुए पीठ ने रेखांकित किया कि तीसरी मंजिल से छत की तरफ जाने के लिए बाहर से कोई अलग सीढ़ी उपलब्ध नहीं थी। साहू ने अपने किराए के कमरे के भीतर से छत तक जाने के लिए लकड़ी की एक सीढ़ी लगा रखी थी। अदालत ने यह भी नोट किया कि भवन मालिक द्वारा तीसरी मंजिल पर दीवार खड़ी कर देने से वह रास्ता पूरी तरह बंद (डेड एंड) हो गया था और सभी निवासियों के लिए छत तक जाने का कोई साझा मार्ग नहीं छोड़ा गया था।

आपराधिक इतिहास का अभाव और एकल निकास मार्ग

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अदालत ने इस पहलू को भी गंभीरता से लिया कि इस बहुमंजिला ढांचे में आवाजाही और बचाव के लिए प्रथम दृष्टया केवल एक ही निकास द्वार मौजूद था। इसके अलावा, अदालत ने इस तथ्य पर भी गौर किया कि सुरेश कुमार साहू का कोई पिछला आपराधिक इतिहास नहीं रहा है और वह हादसे के अगले ही दिन यानी 23 जून से लगातार जेल में बंद था। इन सभी परिस्थितियों के मद्देनजर अदालत ने उसे जमानत पर रिहा करने का फैसला सुनाया।

राजधानी के अलीगंज इलाके में स्थित इस इमारत में 22 जून 2024 को भयंकर आग लगी थी, जिसमें 15 लोगों की मौत हो गई थी और कई लोग इमारत के भीतर फंस गए थे। घटना के बाद हुई जांच में पर्याप्त निकास द्वारों की कमी और अग्नि-शमन सुरक्षा इंतजामों की अनुपस्थिति मुख्य वजह बनकर सामने आई थी।

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