फर्जी भारतीय पासपोर्ट-आधार और वीज़ा रखने के आरोप में चीनी नागरिक की जमानत अर्जी इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज की

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक चीनी नागरिक की जमानत अर्जी खारिज कर दी है, जिस पर फर्जी भारतीय पासपोर्ट, आधार कार्ड और छेड़छाड़ किए गए वीज़ा के आधार पर भारत में रहने का आरोप है। अदालत ने कहा कि उसे रिहा करने से गंभीर “फ्लाइट-रिस्क” पैदा होगा और देश के आर्थिक हितों पर भी खतरा पड़ेगा।

न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल ने आरोपी शू फेई कोइ की अर्जी ठुकराते हुए कहा कि अदालत भारत-चीन संबंधों और दोनों देशों के बीच प्रत्यर्पण संधि न होने जैसे अहम पहलुओं को अनदेखा नहीं कर सकती।

अदालत ने पाया कि केस डायरी में उपलब्ध सामग्री से पता चलता है कि आरोपी कथित रूप से फर्जी पहचान दस्तावेजों पर भारत में रह रहा था और मोबाइल चिप्स व प्रोसेसर निकालकर उन्हें चीन भेजने जैसी अवैध गतिविधियों में शामिल था, जो आर्थिक अपराध की श्रेणी में आता है।

अदालत ने अपने आदेश में कहा,
“स्पष्ट है कि केस डायरी में ऐसा सामग्री मौजूद है जिससे सिद्ध होता है कि आवेदक फर्जी पासपोर्ट और आधार कार्ड के आधार पर भारत में रह रहा था तथा मोबाइल चिप्स और प्रोसेसर निकालकर उन्हें चीन भेजने की गैरकानूनी गतिविधि में शामिल था। वह आर्थिक अपराधों में परोक्ष रूप से संलिप्त है और भारत के आर्थिक हितों के लिए खतरा उत्पन्न करता है।”

न्यायालय ने यह भी कहा कि यदि आरोपी को रिहा किया गया तो उसके फरार होने की पूरी आशंका है, क्योंकि एक अन्य सह-आरोपी तांसोंग दोर्जी पहले ही देश छोड़कर भाग चुका है और अब तक लापता है।

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“यह अदालत भारत और चीन के संबंधों को नजरअंदाज नहीं कर सकती। यदि आवेदक को जमानत पर छोड़ा गया तो उसके अवैध रूप से देश छोड़ने की संभावना है… एक और महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि भारत और चीन के बीच कोई प्रत्यर्पण संधि नहीं है। अतः यदि आवेदक अवैध रूप से देश छोड़ देता है, तो उसे वापस कानून के दायरे में लाना असंभव होगा।” अदालत ने कहा।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, दो चीनी नागरिक—युयान हेनयांग और लू लॉन्ग—नेपाल सीमा से भारत में प्रवेश करते समय गिरफ्तार किए गए थे। उनकी सूचना के आधार पर शू फेई कोइ को हिरासत में लिया गया और उसके पास से “लाक्पा शेर्पा” नाम से जारी फर्जी भारतीय पासपोर्ट और फर्जी आधार कार्ड बरामद हुआ।

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जांच में यह भी पाया गया कि आरोपी ने अपने वीज़ा में जालसाज़ी कर उसकी वैधता 2020 में समाप्त होने के बावजूद 2022 तक बढ़ा दी थी। इसके अलावा एक फ्लैट भी फर्जी दस्तावेजों के आधार पर किराए पर लिया गया था।

जमानत अर्जी खारिज होने के बाद आरोपी को न्यायिक हिरासत में ही रहना होगा।

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