हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: पार्षद को शपथ न दिलाने पर लखनऊ मेयर की प्रशासनिक और वित्तीय शक्तियां निलंबित

लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की शुचिता और अदालती आदेशों के सम्मान को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने एक बेहद सख्त और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। हाई कोर्ट ने लखनऊ की मेयर की सभी प्रशासनिक और वित्तीय शक्तियों को तत्काल प्रभाव से फ्रीज (निलंबित) कर दिया है। अदालत ने साफ किया है कि मेयर की ये शक्तियां तब तक बहाल नहीं होंगी, जब तक कि वह नवनिर्वाचित पार्षद ललित किशोर तिवारी को उनके पद और गोपनीयता की शपथ नहीं दिला देतीं।

यह कड़ा आदेश गुरुवार को जस्टिस आलोक माथुर और जस्टिस एस. क्यू. एच. रिजवी की खंडपीठ ने प्रशासनिक स्तर पर लगातार हो रही देरी और पिछली न्यायिक चेतावनियों की अनदेखी के बाद जारी किया।

क्या है पूरा विवाद?

यह पूरा मामला लखनऊ के फैजुल्लागंज इलाके के वार्ड नंबर 73 से जुड़ा है। इस वार्ड के चुनाव में ललित किशोर तिवारी को चुनाव न्यायाधिकरण (इलेक्शन ट्रिब्यूनल) ने कानूनी तौर पर विजयी घोषित करते हुए निर्वाचित पार्षद माना था।

अदालती आदेश और ट्रिब्यूनल की स्पष्ट घोषणा के बावजूद, ललित किशोर तिवारी पिछले पांच महीनों से अपने शपथ ग्रहण का इंतजार कर रहे हैं। इस लंबे प्रशासनिक विलंब के खिलाफ उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया, जिसके बाद यह मामला इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ के समक्ष पहुंचा।

अदालत की चेतावनियां और प्रशासन की टालमटोल

इस मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट का रुख पहले से ही काफी तल्ख रहा है। इससे पहले हुई 13 मई की सुनवाई के दौरान भी कोर्ट ने पार्षद को शपथ न दिलाए जाने पर गहरी नाराजगी व्यक्त की थी।

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उस सुनवाई के दौरान, लखनऊ की मेयर और जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) ने व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने से छूट की मांग की थी। खंडपीठ ने इस शर्त पर उन्हें राहत दी थी कि एक सप्ताह के भीतर हर हाल में ललित किशोर तिवारी को शपथ दिला दी जाए।

कोर्ट ने तब स्पष्ट रूप से चेतावनी दी थी कि यदि प्रशासन इस समय सीमा के भीतर आदेश का पालन करने में विफल रहता है, तो लखनऊ मेयर, जिला मजिस्ट्रेट और नगर आयुक्त (म्युनिसिपल कमिश्नर) तीनों को 21 मई को अगली सुनवाई के दौरान व्यक्तिगत रूप से अदालत में हाजिर होना पड़ेगा।

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अंतिम निर्णय: मेयर की शक्तियों पर रोक

एक सप्ताह की दी गई मोहलत के बाद भी जब प्रशासन ने पार्षद को शपथ दिलाने की कानूनी औपचारिकता पूरी नहीं की, तो गुरुवार को अदालत ने इस पर बेहद गंभीर रुख अपनाया।

चुनाव न्यायाधिकरण के फैसले के बाद भी पांच महीने तक शपथ न दिलाए जाने को प्रशासनिक विफलता मानते हुए, जस्टिस आलोक माथुर और जस्टिस एस. क्यू. एच. रिजवी की पीठ ने मेयर के अधिकारों को तुरंत सील करने का निर्देश दे दिया।

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अदालत के आदेशानुसार, लखनऊ मेयर की सभी प्रशासनिक और वित्तीय शक्तियां पूरी तरह से निलंबित रहेंगी। यह निलंबन तभी समाप्त होगा जब वह पार्षद ललित किशोर तिवारी को आधिकारिक रूप से उनके पद की शपथ दिला देंगी।

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