राजस्थान हाई कोर्ट पहुंचा ईंधन आपूर्ति सीमा का विवाद; ओएमसी के फैसलों को डीलर्स एसोसिएशन ने दी चुनौती

राजस्थान में पेट्रोल पंप डीलरों और सरकारी तेल विपणन कंपनियों (OMCs) के बीच पेट्रोल-डीजल की बिक्री व आपूर्ति पर लगी कथित पाबंदियों को लेकर कानूनी जंग छिड़ गई है। यह मामला अब राजस्थान हाई कोर्ट के समक्ष पहुंच चुका है, जहां अदालत इन प्रतिबंधों की वैधता की समीक्षा करेगी।

‘पेट्रोलियम डीलर्स डिस्ट्रीब्यूटर्स ट्रांसपोर्टर्स वेलफेयर एसोसिएशन’ द्वारा दायर एक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट की जोधपुर पीठ के न्यायमूर्ति मुकेश राजपुरोहित ने इस मामले की अगली महत्वपूर्ण सुनवाई के लिए 25 मई की तारीख तय की है।

क्या है पूरा विवाद?

इस कानूनी विवाद की मुख्य वजह तेल कंपनियों द्वारा पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति को कथित तौर पर सीमित करना है। याचिकाकर्ता एसोसिएशन का आरोप है कि देश की प्रमुख तेल विपणन कंपनियां—विशेष रूप से ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL), और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL)—औपचारिक नियमों को ताक पर रखकर ईंधन की आपूर्ति में कटौती कर रही हैं।

बुधवार को दायर की गई याचिका के अनुसार, इन तेल कंपनियों द्वारा डीलरों को केवल मौखिक निर्देशों और व्हाट्सएप संदेशों के जरिए पेट्रोल और डीजल की सीमित मात्रा ही बेचने के निर्देश दिए जा रहे हैं।

डीलरों का यह भी दावा है कि इन अनौपचारिक निर्देशों को मनवाने के लिए उन पर दबाव बनाया जा रहा है। कंपनियों ने कथित तौर पर चेतावनी दी है कि यदि किसी भी डीलर ने तय सीमा से अधिक ईंधन बेचा, तो उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी, जिसके तहत उनकी ईंधन आपूर्ति रोकी जा सकती है और बिक्री पर पूरी तरह रोक लगाई जा सकती है।

READ ALSO  अभियुक्त सरकारी गवाह बन गया, जबकि सह-आरोपी विधायक ने बेईमानी की; हाई कोर्ट का कहना है कि इसकी अनुमति है

कानूनी तर्क: आवश्यक वस्तु अधिनियम का उल्लंघन

एसोसिएशन ने तेल कंपनियों के इस कदम को पूरी तरह से गैर-कानूनी और उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर बताया है। आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 (Essential Commodities Act, 1955) के प्रावधानों का हवाला देते हुए याचिका में तर्क दिया गया है कि तेल विपणन कंपनियों के पास ईंधन जैसी आवश्यक वस्तुओं के उत्पादन, वितरण या बिक्री को नियंत्रित करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।

इस अधिनियम के तहत ऐसे नियम बनाने या पाबंदियां लागू करने का अधिकार केवल केंद्र सरकार या संबंधित राज्य सरकारों के पास सुरक्षित है। डीलर्स एसोसिएशन के मुख्य तर्क इस प्रकार हैं:

  • ईंधन जैसी आवश्यक वस्तु की बिक्री या आपूर्ति पर किसी भी प्रकार का प्रतिबंध केवल सरकार द्वारा जारी एक औपचारिक और आधिकारिक अधिसूचना के माध्यम से ही लागू किया जा सकता है।
  • चूंकि वर्तमान में सरकार की ओर से ऐसा कोई वैधानिक आदेश या अधिसूचना लागू नहीं है, इसलिए तेल कंपनियों द्वारा थोपे जा रहे यह प्रतिबंध पूरी तरह से अवैध और उनके क्षेत्राधिकार से बाहर हैं।
READ ALSO  मानहानि मामले में फैसले के खिलाफ राहुल गांधी की अपील पर गुजरात बीजेपी विधायक पूर्णेश मोदी मंगलवार को सत्र अदालत में जवाब दाखिल करेंगे

अदालती कार्यवाही और वर्तमान स्थिति

शुरुआती सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट को अवगत कराया गया कि रिट याचिका की एक प्रति पहले ही भारत सरकार को सौंप दी गई है।

तथ्यों को संज्ञान में लेते हुए, जस्टिस मुकेश राजपुरोहित ने इस मामले में केंद्र सरकार (भारत संघ) का पक्ष रखने के लिए एक अधिवक्ता को नियुक्त किया है। इसके साथ ही, अदालत ने प्रतिवादी तेल कंपनियों के वकीलों को भी तुरंत याचिका की प्रतियां उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं ताकि वे अपना जवाब दाखिल कर सकें।

READ ALSO  पश्चिम बंगाल: चुनाव बाद हिंसा रोकने के लिए केंद्रीय बलों की तैनाती वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का तत्काल सुनवाई से इनकार

राजस्थान हाई कोर्ट अब इस संवेदनशील मामले पर 25 मई को विस्तार से सुनवाई करेगा।

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles