वॉइस सैंपल आदेश के खिलाफ अभिषेक बनर्जी की याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई करेगा कलकत्ता हाईकोर्ट

कलकत्ता हाईकोर्ट तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद अभिषेक बनर्जी की उस याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई करने के लिए सहमत हो गया है, जिसमें उन्होंने पुलिस जांच के लिए अपना वॉइस सैंपल (आवाज का नमूना) देने के निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी है।

यह पूरा मामला डायमंड हार्बर निर्वाचन क्षेत्र से सांसद अभिषेक बनर्जी द्वारा पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान दिए गए एक कथित भाषण से जुड़ा है। बिधाननगर की एक सब-डिवीजनल ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) कोर्ट ने पुलिस जांच के सिलसिले में बनर्जी को 8 जुलाई को पेश होकर अपना वॉइस सैंपल रिकॉर्ड कराने का निर्देश दिया था, जिसे उन्होंने हाईकोर्ट में चुनौती दी है।

हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने संज्ञान लिया कि बनर्जी को पहले से ही इस मामले में आगामी 31 जुलाई तक किसी भी तरह की दंडात्मक पुलिस कार्रवाई से अंतरिम सुरक्षा मिली हुई है। सांसद की कानूनी टीम द्वारा इस मामले की तात्कालिकता को देखते हुए जल्द सुनवाई की मांग की गई, जिसके बाद अदालत ने अगली सुनवाई के लिए शुक्रवार का दिन तय किया।

राज्य सरकार ने याचिका का किया विरोध

मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे एडिशनल एडवोकेट जनरल राजदीप मजूमदार ने बनर्जी की अपील का विरोध किया। उन्होंने दलील दी कि सांसद को हाईकोर्ट से मिली अंतरिम राहत इस शर्त पर आधारित थी कि वह जांच में पूरा सहयोग करेंगे। मजूमदार ने कहा कि मामले की तह तक जाने के लिए जांच अधिकारी को बनर्जी के वॉइस सैंपल की जरूरत है, इसलिए उन्हें निचली अदालत के आदेश का पालन करना चाहिए।

चुनावी रैली के दौरान कथित धमकी का मामला

यह विवाद अप्रैल महीने में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण (29 अप्रैल) के ठीक पहले आयोजित एक रैली से शुरू हुआ था। बनर्जी पर एक विरोधी राजनीतिक दल के नेताओं और कार्यकर्ताओं को कथित तौर पर डराने-धमकाने वाले बयान देने का आरोप है, जिसके बाद पुलिस ने उनके खिलाफ एक प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज की थी। टीएमसी नेता ने इस एफआईआर को पूरी तरह से रद्द करने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर कर रखी है।

READ ALSO  अनुकंपा नियुक्ति मामलों में सास का बहू से भरण-पोषण पाने का अधिकार: हाईकोर्ट

इससे पहले, कलकत्ता हाईकोर्ट ने 21 मई को बनर्जी को बड़ी राहत देते हुए 31 जुलाई तक उनके खिलाफ किसी भी दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी थी। हालांकि, उस समय अदालत ने उन्हें जांच में पूरी तरह सहयोग करने का निर्देश दिया था और बिना अदालती अनुमति के देश से बाहर जाने पर भी प्रतिबंध लगा दिया था।

READ ALSO  धारा 306 IPC के अपराध हेतु बयान उकसाने वाला था या नहीं ये केवल ट्रायल कोर्ट द्वारा देखा जा सकता है: मद्रास हाई कोर्ट
Ad 20- WhatsApp Banner

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles