ध्रुव राठी के विवादित वीडियो पर केंद्र 15 दिनों में फैसला करे: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ध्रुव राठी के एक कथित तौर पर आपत्तिजनक वीडियो को हटाने की मांग वाली अपील पर 15 दिनों के भीतर फैसला लेने का निर्देश दिया है।

जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने शुक्रवार को यह आदेश जारी करते हुए सरकार की शिकायत अपीलीय समिति को इस लंबित मामले को जल्द से जल्द सुलझाने को कहा। अदालत का यह रुख याचिकाकर्ता की उस दलील के बाद आया, जिसमें बताया गया था कि समिति एक महीने की तय समयसीमा के भीतर निर्णय लेने में विफल रही और यह मामला पिछले लगभग तीन महीनों से अधर में लटका हुआ है।

विवाद की मुख्य वजह

यह पूरा कानूनी मामला अधिवक्ता अमिता सचदेवा की ओर से दायर याचिका के बाद शुरू हुआ। सचदेवा ने ध्रुव राठी के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर 21 मार्च को अपलोड किए गए एक वीडियो पर आपत्ति जताई थी। याचिकाकर्ता का आरोप है कि इस वीडियो में हिंदू देवी-देवताओं और पूजनीय प्रतीकों को लेकर झूठे, दुर्भावनापूर्ण और बेहद अपमानजनक दावे किए गए हैं, जिसमें दावा किया गया है कि वे शराब और मांसाहारी भोजन का सेवन करते थे।

शिकायत अपीलीय समिति के समक्ष अपील करने के अलावा, सचदेवा ने इस मामले में नई दिल्ली के साइबर क्राइम सेल में एक शिकायत भी दर्ज कराई थी और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) नियम, 2021 के तहत वैधानिक प्रावधानों का सहारा लिया था।

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सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही पर सरकारी रुख

अदालती कार्यवाही के दौरान सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) चेतन शर्मा ने दलील दी कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को किसी भी कंटेंट पर कार्रवाई करने के लिए सरकार के औपचारिक आदेशों का इंतजार नहीं करना चाहिए। उन्होंने साफ किया कि पूजनीय धार्मिक हस्तियों का अपमान किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। गूगल (जो यूट्यूब की पैरेंट कंपनी है) जैसे प्लेटफॉर्म्स के पास अपने नियम-कायदों के तहत ऐसे आपत्तिजनक कंटेंट को ब्लॉक करने और हटाने का पूरा अधिकार और जिम्मेदारी पहले से मौजूद है।

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सरकारी वकील ने इस बात पर जोर दिया कि मध्यस्थ (इंटरमीडिएरीज) प्लेटफॉर्म्स को भविष्य में अधिक सतर्क रहने की जरूरत है ताकि ऐसे विभाजनकारी कंटेंट को फैलने से रोका जा सके जो बहुसंख्यक समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाते हैं।

कंटेंट ब्लॉक करने के अधिकारों पर सरकार के रुख को सही ठहराने के लिए, एएसजी ने दिल्ली हाईकोर्ट के ही एक हालिया फैसले का संदर्भ दिया, जिसमें टेलीग्राम ऐप पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध को बरकरार रखा गया था। उन्होंने बताया कि कोर्ट ने उस मामले में माना था कि सार्वजनिक हित और राष्ट्रीय सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने वाली सूचनाओं को सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69ए के तहत ब्लॉक किया जा सकता है।

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इन सभी दलीलों को सुनने के बाद, जस्टिस शर्मा ने अपीलीय समिति को अदालती आदेश की प्रति मिलने के 15 दिनों के भीतर लंबित याचिका पर अंतिम निर्णय लेने का निर्देश दिया और याचिका का निपटारा कर दिया।

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