उत्तराखंड हाईकोर्ट ने उधम सिंह नगर जिले के एक विवादित फार्महाउस में रह रहे महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े अदालती आदेशों की अनदेखी पर कड़ा रुख अपनाया है। जस्टिस आलोक माहरा की एकल पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जिले के जिलाधिकारी (डीएम) और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) को आगामी 6 जुलाई को व्यक्तिगत रूप से अदालत के समक्ष पेश होने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही अदालत ने दोनों प्रशासनिक अधिकारियों को 11 जून को पारित किए गए सुरक्षा निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराने को कहा है।
जायदाद के मालिकाना हक को लेकर छिड़ा विवाद
यह पूरा मामला सिकंदर आलम खान द्वारा दायर एक याचिका से जुड़ा है, जिसमें किच्छा क्षेत्र में स्थित “खान फार्म” नामक फार्महाउस को लेकर गहरा विवाद चल रहा है। इस संपत्ति के मालिकाना हक को लेकर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा की सिस्टर-इन-लॉ सायरा वाड्रा और नसरीन सांगा के बीच कानूनी लड़ाई चल रही है। याचिकाकर्ता के वकील पूरन सिंह रावत के अनुसार, दोनों ही महिलाएं इस संपत्ति पर अपना-अपना दावा पेश कर रही हैं, जबकि यह फार्महाउस वास्तव में याचिकाकर्ता की दिवंगत मौसी कुलसुम खान का है।
जबरन कब्जे और अदालती आदेशों के उल्लंघन के आरोप
याचिका के अनुसार, कुलसुम खान ने साल 2024 में एक पंजीकृत वसीयत तैयार कराई थी। इस वसीयत के जरिए उन्होंने संपत्ति का मालिकाना हक अपनी बहन सायरा वाड्रा और अपने भतीजे सिकंदर आलम खान के नाम किया था। हालांकि, 18 दिसंबर 2025 को कुलसुम खान के निधन के बाद, दूसरे पक्ष की नसरीन सांगा ने कथित तौर पर स्थानीय भू-माफियाओं के साथ साठगांठ करके इस संपत्ति पर जबरन कब्जा जमा लिया। आरोप है कि सांगा ने इस दौरान पंजीकृत वसीयत और अदालत द्वारा पहले से जारी स्थगन आदेश (स्टे ऑर्डर) दोनों की अनदेखी की।
सुरक्षा सुनिश्चित करने की गुहार
हाईकोर्ट में दायर याचिका में सिकंदर आलम खान ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने इस मामले में जारी पिछले अदालती निर्देशों पर उचित कार्रवाई नहीं की। उन्होंने अदालत से गुहार लगाई है कि वह मामले में तुरंत हस्तक्षेप करे, ताकि फार्महाउस में मौजूद महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और पूर्व में जारी किए गए न्यायिक आदेशों को पूरी तरह से लागू किया जा सके।

