कर्नाटक हाईकोर्ट ने राज्य में वकीलों पर बढ़ते हमलों, धमकियों और हत्या की घटनाओं को लेकर स्वतः संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका (PIL) की कार्यवाही शुरू की है। कोर्ट ने राज्य सरकार से वकीलों की सुरक्षा के लिए मौजूदा कानूनी प्रावधानों को मजबूत करने और आवश्यक प्रशासनिक कदम उठाने पर विचार करने को कहा है।
न्यायमूर्ति डी. के. सिंह और न्यायमूर्ति एच. शांति भूषण की खंडपीठ ने रजिस्ट्री को जनहित याचिका दर्ज करने का निर्देश दिया। साथ ही राज्य सरकार से संबंधित मामलों में लागू मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOP) और पुलिस को जारी निर्देशों का विवरण कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करने को कहा।
यह कार्यवाही एडवोकेट्स एसोसिएशन, बेंगलुरु और कर्नाटक स्टेट बार काउंसिल द्वारा वकीलों की हत्या की दो हालिया घटनाओं को कोर्ट के संज्ञान में लाने के बाद शुरू हुई। दोनों संगठनों ने पेशेवर जिम्मेदारियों का निर्वहन करते समय वकीलों की पर्याप्त सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की थी।
खंडपीठ ने कहा कि वकीलों को शारीरिक नुकसान, धमकी या डर के बिना अपने मुवक्किलों का पक्ष रखने की स्वतंत्रता होनी चाहिए। कोर्ट के अनुसार, किसी वकील पर हमला, विशेष रूप से उसकी हत्या, केवल एक व्यक्तिगत घटना नहीं मानी जा सकती क्योंकि इसका प्रभाव बार की स्वतंत्रता और न्याय प्रशासन पर भी पड़ता है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वकीलों को सुरक्षा प्रदान करने का उद्देश्य किसी पेशेवर वर्ग को विशेष दर्जा या सुविधा देना नहीं है। यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि न्याय प्रशासन में अदालतों की सहायता करने वाले अधिवक्ता बिना किसी भय या असुरक्षा के अपना काम कर सकें।
पुलिस स्टेशन सिविल विवादों का निपटारा नहीं कर सकते
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पुलिस स्टेशनों में निजी पक्षों के बीच सिविल विवादों का निपटारा किए जाने पर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की।
एडवोकेट्स एसोसिएशन ने आरोप लगाया था कि कई मामलों में पुलिस स्टेशन समानांतर अदालतों की तरह काम कर रहे हैं और निजी पक्षों के सिविल विवादों को अपने स्तर पर सुलझाने का प्रयास करते हैं।
खंडपीठ ने कहा कि संपत्ति के अधिकार, कब्जे, संविदात्मक दायित्वों और अन्य सिविल दावों से संबंधित विवादों का निर्णय करना पुलिस स्टेशनों का काम नहीं है।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और पुलिस विभाग को निर्देश दिया कि सभी पुलिस स्टेशनों को स्पष्ट निर्देश जारी किए जाएं कि वे पक्षकारों के बीच सिविल विवादों का निपटारा न करें। हालांकि, यदि किसी मामले में आपराधिक अपराध सामने आता है, तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।
कोर्ट ने राज्य सरकार को वकीलों की सुरक्षा और कल्याण से संबंधित मौजूदा कानूनी ढांचे को मजबूत करने के लिए आवश्यक विधायी और प्रशासनिक उपायों पर विचार करने का सुझाव भी दिया। साथ ही इन उपायों को प्रभावी ढंग से लागू करने की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
सुरक्षा की मांग को लेकर कर्नाटक में वकीलों ने कामकाज से दूरी बनाई
एडवोकेट्स एसोसिएशन ने हाईकोर्ट को बताया कि 29 अक्टूबर को आयोजित उसकी आम सभा की बैठक में वकीलों की अपर्याप्त सुरक्षा के विरोध में प्रस्ताव पारित किया गया था।
प्रस्ताव में पेशेवर जिम्मेदारियां निभाने वाले अधिवक्ताओं की सुरक्षा के लिए मजबूत कानून बनाने की मांग की गई थी।
इसी प्रस्ताव के बाद मंगलवार को कर्नाटक भर के वकीलों ने न्यायिक कामकाज से दूरी बनाई।
18 अक्टूबर को बेंगलुरु में वकील की गोली मारकर हत्या
कोर्ट के संज्ञान में लाई गई घटनाओं में 18 अक्टूबर को बेंगलुरु के व्हाइटफील्ड इलाके में अधिवक्ता मंजूनाथ की हत्या भी शामिल है।
मंजूनाथ को पट्टंदूर अग्रहार स्थित उनके आवास पर रात करीब 11:45 बजे कथित तौर पर गोली मार दी गई थी।
पुलिस को संदेह है कि हत्या का संबंध किराए के विवाद से था। बिहार के दो किरायेदार लगभग डेढ़ साल से उनकी संपत्ति के एक कमरे में रह रहे थे और उन्होंने तीन महीने से किराया नहीं दिया था।
पुलिस के अनुसार, बकाया किराया मांगने पर मंजूनाथ और किरायेदारों के बीच विवाद हुआ था। बाद में दोनों आरोपी किराया देने की बात कहकर लौटे।
जब मंजूनाथ पैसे गिन रहे थे, तभी कथित तौर पर एक आरोपी ने उन्हें नजदीक से गोली मार दी। इसके बाद दोनों मौके से फरार हो गए।
ऑटो किराए के विवाद में वकील की हत्या, वरिष्ठ अधिवक्ता पर भी हमला
एक अन्य घटना में 9 अक्टूबर को बेंगलुरु में अधिवक्ता श्री राम की कथित तौर पर ऑटो-रिक्शा किराए को लेकर हुए विवाद में हत्या कर दी गई थी।
नागरभावी के पास केंगुंटे निवासी श्री राम आउटर रिंग रोड पर बेहोशी की हालत में मिले थे। गश्त कर रही पुलिस उन्हें अस्पताल ले गई, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
अन्नपूर्णेश्वरीनगर पुलिस के अनुसार, पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला कि उनकी मौत हमले के कारण हुई थी।
पुलिस ने इस मामले में गोल्लारहट्टी निवासी 31 वर्षीय ऑटो चालक पृथ्वीराज को गिरफ्तार किया था।
इसके अलावा 28 अक्टूबर को चिक्कबल्लापुर जिले में वरिष्ठ अधिवक्ता वेंकटरमण सन्नक्की पर चाकू से हमला किया गया था।
पुलिस ने इस घटना में हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया है। संदिग्ध की तलाश के लिए जांच जारी है।
इन घटनाओं के मद्देनजर कर्नाटक हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेकर वकीलों की सुरक्षा से जुड़े मौजूदा प्रावधानों और राज्य सरकार तथा पुलिस विभाग द्वारा उठाए जाने वाले आवश्यक कदमों पर विचार करने के लिए जनहित याचिका की कार्यवाही शुरू की है।
