दिल्ली हाईकोर्ट ने एक ब्रिटिश नागरिक की बिजनेस वीजा आवेदन पर दोबारा विचार करने की मांग वाली याचिका खारिज करते हुए कहा है कि विदेशी नागरिक भारत में प्रवेश करने या वीजा प्राप्त करने का कानूनी अधिकार नहीं जता सकते। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वीजा जारी करना या प्रवेश की अनुमति देना सरकार का संप्रभु कार्य है।
जस्टिस अमित महाजन ने 3 नवंबर के आदेश में कहा कि वीजा और आव्रजन संबंधी फैसले राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेश नीति और प्रशासनिक विवेक जैसे पहलुओं से जुड़े होते हैं। ऐसे मामलों में निर्णय लेना सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है।
हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि विदेशी नागरिकों को भारत में जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े मौलिक अधिकार प्राप्त हैं, लेकिन उन्हें देश में निवास करने या स्थायी रूप से बसने का मौलिक अधिकार नहीं है।
दो बार बिजनेस वीजा आवेदन खारिज होने पर पहुंचा हाईकोर्ट
याचिकाकर्ता ब्रिटिश नागरिक ने दावा किया कि भारतीय अधिकारियों ने उसके दो बिजनेस वीजा आवेदन बिना कोई कारण बताए खारिज कर दिए।
उसके अनुसार, 7 सितंबर को उसका ई-बिजनेस वीजा आवेदन अस्वीकार कर दिया गया। इसके बाद 10 सितंबर को उसने लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग में एक वर्ष की अवधि वाले मल्टीपल-एंट्री बिजनेस वीजा के लिए आवेदन किया।
हालांकि, आवेदन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जब वह अपना पासपोर्ट लेने पहुंचा, तो उसे कोई वीजा जारी नहीं किया गया था। अधिकारियों ने आवेदन अस्वीकार करने का कारण भी नहीं बताया।
याचिकाकर्ता ने बताया कि वह स्थिति स्पष्ट करने के लिए व्यक्तिगत रूप से लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग गया था। वहां कथित तौर पर उसे मौखिक रूप से भारत वापस नहीं आने के लिए कहा गया, लेकिन इस संबंध में कोई अतिरिक्त जानकारी नहीं दी गई।
इन घटनाओं के बाद उसे आशंका हुई कि भारतीय अधिकारियों ने उसका नाम ब्लैकलिस्ट में डाल दिया है या उसके भारत प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया है। हालांकि, उसने स्वीकार किया कि इस संबंध में उसे कोई औपचारिक आदेश नहीं मिला था।
वैध टूरिस्ट वीजा होने के बावजूद भारत आने से डर रहा था याचिकाकर्ता
ब्रिटिश नागरिक ने हाईकोर्ट को बताया कि उसके पास पांच वर्ष के लिए वैध ई-टूरिस्ट वीजा है। इसके बावजूद वह भारत आने से डर रहा था, क्योंकि उसे आशंका थी कि भारतीय आव्रजन अधिकारी उसे देश में प्रवेश करने से रोक सकते हैं।
उसने हाईकोर्ट से भारतीय अधिकारियों को यह बताने का निर्देश देने की मांग की कि क्या उसका नाम किसी ब्लैकलिस्ट में शामिल है या उसके प्रवेश पर कोई प्रतिबंध लगाया गया है।
इसके अलावा उसने अपने बिजनेस वीजा आवेदन पर दोबारा विचार करने का निर्देश देने की भी मांग की।
केवल आशंका के आधार पर याचिका स्वीकार नहीं की जा सकती: हाईकोर्ट
मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस अमित महाजन ने कहा कि याचिकाकर्ता ने केवल इस आशंका के आधार पर हाईकोर्ट का रुख किया है कि उसे ब्लैकलिस्ट किया गया हो सकता है और ई-टूरिस्ट वीजा पर भारत आने की स्थिति में उसे प्रवेश से रोका जा सकता है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वीजा जारी करना, प्रवेश की अनुमति देना या आव्रजन मंजूरी प्रदान करना सरकार के संप्रभु अधिकार क्षेत्र में आता है।
हाईकोर्ट ने कहा,
“वीजा जारी करना, प्रवेश से इनकार करना या आव्रजन मंजूरी देना सरकार का एक संप्रभु कार्य है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेश नीति और प्रशासनिक विवेक से जुड़ा हुआ है। याचिकाकर्ता एक विदेशी नागरिक होने के कारण इस देश में वीजा जारी किए जाने या प्रवेश प्राप्त करने का कोई अधिकार नहीं जता सकता।”
कोर्ट ने आगे कहा कि विदेशी नागरिकों को भारत में प्रवेश करने का कोई अंतर्निहित या कानूनी रूप से लागू कराया जा सकने वाला अधिकार नहीं है।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि अदालत में राहत मांगने के लिए किसी कानूनी अधिकार का उल्लंघन होना आवश्यक है। केवल इस आशंका के आधार पर कि किसी व्यक्ति को देश में प्रवेश से रोका जा सकता है, याचिका स्वीकार नहीं की जा सकती।
इन टिप्पणियों के साथ दिल्ली हाईकोर्ट ने ब्रिटिश नागरिक की याचिका खारिज कर दी।
