छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि किसी भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने मात्र से उम्मीदवार को नियुक्ति का अधिकार नहीं मिल जाता, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि सरकार बिना उचित और कानूनी रूप से स्वीकार्य कारण के चल रही भर्ती प्रक्रिया समाप्त कर सकती है।
जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की एकल पीठ ने अंबिकापुर स्थित शासकीय मेडिकल कॉलेज की वर्ष 2022 की भर्ती रद्द करने और उसे छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापम) के माध्यम से कराने का निर्णय निरस्त कर दिया।
हाईकोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि भर्ती प्रक्रिया जहां रोकी गई थी, वहीं से दोबारा शुरू की जाए और तीन महीने के भीतर पूरी की जाए।
क्या था भर्ती से जुड़ा विवाद?
राजमाता श्रीमती देवेंद्र कुमारी सिंहदेव शासकीय मेडिकल कॉलेज, अंबिकापुर ने 20 जुलाई 2022 को विभिन्न पदों के लिए विज्ञापन जारी किए थे। वर्ष 2023 में संशोधित विज्ञापन भी प्रकाशित हुए।
याचिकाकर्ताओं के अनुसार, भर्ती की मेरिट सूची तैयार हो चुकी थी और उम्मीदवारों को 23 अगस्त 2023 को दस्तावेज सत्यापन के लिए बुलाया गया था।
हालांकि, राज्य सरकार का कहना था कि अपरिहार्य कारणों से 21 अगस्त 2023 को दस्तावेज सत्यापन का कार्यक्रम रद्द कर दिया गया।
इसके बाद 23 अप्रैल 2025 को मेडिकल कॉलेज की जनरल बॉडी की बैठक हुई। बैठक में डीन ने बताया कि भर्ती के लिए एक लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं और प्रक्रिया पूरी करने में काफी समय लगेगा।
इसी आधार पर पुराने विज्ञापन रद्द करके व्यापम के माध्यम से नई भर्ती कराने का निर्णय लिया गया।
इस फैसले को दस उम्मीदवारों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।
आवेदनों की संख्या को लेकर उठे सवाल
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता पवन श्रीवास्तव ने कहा कि उम्मीदवार नियुक्ति के पूर्ण अधिकार का दावा नहीं कर रहे हैं। उनका विरोध इस बात से है कि भर्ती प्रक्रिया को मनमाने ढंग से और आधिकारिक रिकॉर्ड से पुष्ट नहीं होने वाले तथ्यों के आधार पर समाप्त किया गया।
उन्होंने 19 जून 2025 को मेडिकल कॉलेज के डीन द्वारा चिकित्सा शिक्षा आयुक्त को भेजे गए पत्र का उल्लेख किया।
पत्र के अनुसार, तृतीय श्रेणी के 63 पदों के लिए 10,374 और चतुर्थ श्रेणी के 385 पदों के लिए 44,961 आवेदन मिले थे।
इस प्रकार कुल 448 पदों के लिए 55,335 आवेदन प्राप्त हुए थे, जबकि जनरल बॉडी की बैठक में इनकी संख्या एक लाख से अधिक बताई गई थी।
याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा कि नई भर्ती शुरू होने से कुछ उम्मीदवार आयु सीमा के कारण प्रभावित हो सकते हैं।
राज्य सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता सुयशधर बड़गैया ने दलील दी कि चयन प्रक्रिया में भाग लेने से नियुक्ति का अपरिहार्य अधिकार नहीं मिलता। संबंधित प्राधिकारी भर्ती का तरीका बदल सकता है।
सरकार ने कहा कि यह निर्णय संस्थान के व्यापक हित में लिया गया था और इसके पीछे कोई दुर्भावना या पक्षपात नहीं था।
भर्ती रद्द करने के लिए उचित आधार जरूरी: हाईकोर्ट
हाईकोर्ट ने East Coast Railway v. Mahadev Appa Rao, Shankarsan Dash v. Union of India और Tej Prakash Pathak v. Rajasthan High Court के फैसलों पर विचार किया।
कोर्ट ने कहा कि चयन प्रक्रिया में भागीदारी से नियुक्ति का अधिकार नहीं बनता, लेकिन सरकारी अधिकारियों को भर्ती मनमाने ढंग से रद्द करने की छूट भी नहीं मिलती।
बेंच ने कहा:
“हालांकि, ऐसे अधिकार का न होना इस अर्थ में नहीं समझा जा सकता कि राज्य को किसी तर्कसंगत और कानूनी रूप से टिकाऊ औचित्य के बिना भर्ती प्रक्रिया छोड़ देने का असीमित विवेकाधिकार मिल जाता है।”
हाईकोर्ट ने आवेदन संख्या में अंतर पर भी विचार किया।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि डीन का 19 जून 2025 का पत्र जनरल बॉडी की बैठक के बाद जारी हुआ था। इसलिए उससे निर्णायक रूप से यह स्थापित नहीं होता कि बैठक के समय अधिकारियों के सामने आवेदन की वास्तविक संख्या क्या थी।
साथ ही, यह भी नहीं माना जा सकता कि बैठक में जानबूझकर गलत संख्या बताई गई थी।
लेकिन राज्य सरकार एक लाख से अधिक और 55,335 आवेदनों के बीच अंतर स्पष्ट नहीं कर सकी। इससे भर्ती रद्द करने के लिए बताए गए आधार पर महत्वपूर्ण सवाल बने रहे।
जनरल बॉडी का प्रस्ताव न्यायिक समीक्षा से बाहर नहीं
हाईकोर्ट ने कहा कि केवल जनरल बॉडी द्वारा प्रस्ताव पारित कर देने से प्रशासनिक निर्णय की वैधता स्थापित नहीं हो जाती।
कोर्ट ने टिप्पणी की:
“जहां किसी निर्णय के तथ्यात्मक आधार पर महत्वपूर्ण सवाल उठाए गए हों, वहां कोई प्रस्ताव प्रशासनिक कार्रवाई को न्यायिक समीक्षा से संरक्षण नहीं दे सकता।”
बेंच ने माना कि किसी उपयुक्त मामले में एकरूपता, पारदर्शिता या दक्षता के आधार पर व्यापम के माध्यम से भर्ती कराना उचित हो सकता है।
लेकिन कोर्ट ने स्पष्ट किया:
“केवल व्यापम के माध्यम से भर्ती कराने की वांछनीयता अपने आप में चल रही चयन प्रक्रिया को समाप्त करने का औचित्य नहीं बन सकती।”
हाईकोर्ट ने पाया कि राज्य सरकार ने पुरानी भर्ती प्रक्रिया में किसी अवैधता या प्रक्रियागत खामी की पहचान नहीं की थी।
इसके अलावा, भर्ती प्रारंभिक चरण से आगे बढ़ चुकी थी, फिर भी सरकार यह नहीं बता सकी कि उसे पूरा करना संभव क्यों नहीं था।
तीन महीने में भर्ती पूरी करने का निर्देश
हाईकोर्ट ने 23 अप्रैल 2025 के जनरल बॉडी के निर्णय को उस सीमा तक रद्द कर दिया, जहां उसने भर्ती विज्ञापनों को निरस्त कर प्रक्रिया समाप्त की थी।
इसके आधार पर जारी 19 जून 2025 का पत्र भी रद्द कर दिया गया।
कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे रुकी हुई भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ाएं, उम्मीदवारों की पात्रता और दस्तावेजों का सत्यापन करें तथा तुलनात्मक मेरिट निर्धारित करें।
इसके बाद लागू नियमों के अनुसार पात्र उम्मीदवारों को नियुक्ति आदेश जारी किए जाएं।
यह पूरी प्रक्रिया तीन महीने के भीतर पूरी करनी होगी। हाईकोर्ट ने बिना किसी खर्च संबंधी आदेश के याचिका स्वीकार कर ली।
केस डिटेल्स
केस टाइटल: Aditya Saini and Others v. State of Chhattisgarh and Others
केस नंबर: WPS No. 8553 of 2025
पीठ: जस्टिस बिभु दत्ता गुरु
फैसले की तारीख: 28 अक्टूबर 2026
