सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को केंद्र सरकार से पूछा कि लगभग 100 प्रतिशत एथेनॉल से चलने वाले वाहनों को अनुमति दिए जाने के बाद उनके लिए ईंधन की पर्याप्त सप्लाई कैसे सुनिश्चित की जाएगी। कोर्ट ने यह सवाल एथेनॉल आपूर्ति वर्ष (ESY) 2025-26 के लिए एथेनॉल आवंटन से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान उठाया।
जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने हाल में प्रकाशित खबरों का उल्लेख करते हुए केंद्र से जानना चाहा कि E100 ईंधन से चलने वाले वाहनों के लिए एथेनॉल की उपलब्धता कैसे सुनिश्चित होगी।
इस पर अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने बताया कि इसके लिए बड़े पैमाने पर विनिर्माण व्यवस्था में बदलाव करने होंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने किसानों के हितों को बताया महत्वपूर्ण
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एथेनॉल नीति में किसानों के हितों को प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर जोर दिया। पीठ ने कहा कि इस विषय पर विचार करते समय व्यापक जनहित और पर्यावरण से जुड़े पहलुओं के साथ किसानों की स्थिति को भी ध्यान में रखना होगा।
जस्टिस सुंदरेश ने कहा कि देश की बड़ी आबादी, विशेष रूप से किसानों को सशक्त बनाने का सवाल बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन इस पहलू पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
पीठ ने गांवों में रहने वाले आम लोगों को सशक्त बनाने की आवश्यकता भी जताई।
अटॉर्नी जनरल ने कोर्ट को बताया कि वह अपनी दलीलों के दौरान किसानों से जुड़े मुद्दों पर भी पक्ष रखेंगे।
एक वकील ने कहा कि एथेनॉल को बढ़ावा देने से किसानों को किसी न किसी रूप में लाभ होगा। वहीं, दूसरे वकील ने दलील दी कि केंद्र सरकार की मौजूदा नीति में किसानों के हितों का पहले से ध्यान रखा गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई अगले महीने निर्धारित की है।
E100 वाहनों को लेकर सरकार ने बदले नियम
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने 26 अक्टूबर को केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधन की अधिसूचना जारी की थी। इसके तहत फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के उत्सर्जन प्रमाणन संबंधी प्रावधानों में E85 के साथ E100 को भी शामिल किया गया है।
फ्लेक्स-फ्यूल वाहन अधिक एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन से चल सकते हैं। E85 में 85 प्रतिशत एथेनॉल और 15 प्रतिशत पेट्रोल होता है, जबकि E100 में लगभग शुद्ध एथेनॉल होता है।
इसके विपरीत, सामान्य पेट्रोल वाहन एथेनॉल की कम मात्रा वाले ईंधन के लिए अनुमोदित होते हैं।
हालांकि, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 27 अक्टूबर को स्पष्ट किया था कि केंद्र सरकार की फिलहाल पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण को मौजूदा 20 प्रतिशत से अधिक बढ़ाने की कोई योजना नहीं है।
एथेनॉल आवंटन को लेकर क्या है विवाद?
सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामला एथेनॉल आपूर्ति वर्ष 2025-26 के लिए आवंटन से संबंधित है। एक तेल विपणन कंपनी ने कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए दावा किया था कि इससे पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण की राष्ट्रीय नीति प्रभावित हो सकती है।
सुप्रीम कोर्ट ने 30 जून को एथेनॉल आवंटन बढ़ाने संबंधी हाईकोर्ट के निर्देश पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था।
कर्नाटक हाईकोर्ट ने भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड को एक समर्पित एथेनॉल निर्माता के आवेदन पर विचार कर निर्णय लेने का निर्देश दिया था। निर्माता ने ESY 2025-26 के लिए एथेनॉल आवंटन बढ़ाने की मांग की थी।
हाईकोर्ट ने कहा था कि सरकारी नीति के तहत स्थापित ऐसे एथेनॉल संयंत्र, जो अनुबंध के अनुसार अपना पूरा उत्पादन केवल तेल विपणन कंपनियों को देने के लिए बाध्य हैं, उन्हें दीर्घकालिक खरीद समझौते में निर्धारित प्राथमिकता वाले आवंटन के लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता।
अब सुप्रीम कोर्ट इस मामले में अगले महीने आगे सुनवाई करेगा।
