₹155 की बीयर ₹230 में बेचने पर शराब दुकान को झटका, ग्राहक को ₹12,500 मुआवजा देने का आदेश

हिमाचल प्रदेश के एक उपभोक्ता आयोग ने ₹155 एमआरपी वाली बीयर की बोतल ₹230 में बेचने के मामले में शराब की दुकान और उसके सेल्समैन को ग्राहक से वसूले गए अतिरिक्त ₹75 लौटाने के साथ ₹12,500 मुआवजा और मुकदमे का खर्च देने का आदेश दिया है।

आयोग के अध्यक्ष हेमांशु मिश्रा और सदस्य आरती सूद तथा नारायण ठाकुर ने कहा कि किसी पैक्ड वस्तु या आबकारी उत्पाद को उसकी छपी हुई एमआरपी से अधिक कीमत पर बेचना अनुचित व्यापार व्यवहार और सेवा में कमी के दायरे में आता है।

आयोग ने शराब की दुकान और सेल्समैन को संयुक्त रूप से ₹75 वापस करने का निर्देश दिया। इसके साथ ही ग्राहक को ₹5,000 मुआवजा और ₹7,500 मुकदमे के खर्च के रूप में देने का आदेश दिया गया।

₹155 की बोतल के लिए लिए गए ₹230

शिकायत के अनुसार, ग्राहक 27 अप्रैल 2026 को कांगड़ा स्थित एक शराब की दुकान पर गया था और उसने बीयर की एक बोतल खरीदी थी।

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बोतल पर एमआरपी ₹155 दर्ज थी, लेकिन सेल्समैन ने उससे ₹230 वसूले। इस तरह ग्राहक से ₹75 अधिक लिए गए।

जब ग्राहक ने इस पर आपत्ति जताई तो सेल्समैन ने कथित तौर पर कहा कि वह दुकान मालिक के निर्देश पर यह रकम ले रहा है। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि सेल्समैन ने खरीद की रसीद देने से इनकार कर दिया।

इसके बाद ग्राहक ने उपभोक्ता आयोग का रुख किया और अतिरिक्त रकम वापस दिलाने के साथ मुआवजे की मांग की।

दुकान और सेल्समैन ने नहीं रखा पक्ष

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नोटिस मिलने के बावजूद शराब की दुकान और उसका सेल्समैन आयोग के सामने पेश नहीं हुए। इसके बाद उनके खिलाफ एकतरफा कार्यवाही की गई।

आयोग ने कहा कि शिकायतकर्ता की ओर से पेश किए गए सबूतों का विरोध नहीं किया गया और वे बिना चुनौती के रिकॉर्ड पर बने रहे।

आयोग ने पाया कि शिकायतकर्ता यह साबित करने में सफल रहा कि ₹155 एमआरपी वाले उत्पाद के लिए उससे ₹230 लिए गए थे।

आयोग ने यह भी कहा कि एमआरपी से अधिक कीमत वसूलना लीगल मेट्रोलॉजी कानून, उपभोक्ता संरक्षण कानून और राज्य के आबकारी नियमों का उल्लंघन है। रसीद नहीं देना भी आयोग के अनुसार कथित अवैध व्यापार व्यवहार को छिपाने की मंशा की ओर संकेत करता है।

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आबकारी विभाग को कार्रवाई के निर्देश

मामले की गंभीरता को देखते हुए आयोग ने अपने आदेश की एक प्रति धर्मशाला स्थित अतिरिक्त आयुक्त, आबकारी एवं कराधान विभाग को भेजने का भी निर्देश दिया।

आयोग ने विभाग से नियमों के अनुसार विभागीय और दंडात्मक कार्रवाई करने को कहा।

आयोग ने स्पष्ट किया कि किसी भी विक्रेता को ग्राहक से छपी हुई एमआरपी से अधिक रकम वसूलने की अनुमति नहीं है। ऐसा करना अनुचित व्यापार व्यवहार और सेवा में कमी माना जा सकता है, जिसके लिए रिफंड, मुआवजा और मुकदमे का खर्च देना पड़ सकता है।

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