केरल हाईकोर्ट ने मंगलवार को तिरुवनंतपुरम नगर निगम के भाजपा पार्षद आर. सुगथन की प्रिवेंटिव डिटेंशन (निवारक हिरासत) को रद्द करते हुए उन्हें विय्यूर सेंट्रल जेल से तुरंत रिहा करने का आदेश दिया। जस्टिस अनिल के. नरेंद्रन और जस्टिस मुरली कृष्णा एस. की खंडपीठ ने पार्षद की पत्नी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया।
कलेक्टर के आदेश पर हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान अदालत ने तिरुवनंतपुरम के जिला कलेक्टर द्वारा 8 जून को जारी हिरासत आदेश को त्रुटिपूर्ण पाया। हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि जिला कलेक्टर ने यह आदेश बेहद सतही और लापरवाह रवैये के साथ पारित किया था, जिसमें न तो विवेक का सही इस्तेमाल किया गया और न ही नियमों के अनुरूप कोई ठोस संतुष्टि दर्ज की गई।
इसके साथ ही खंडपीठ ने राज्य सरकार द्वारा जिला कलेक्टर के फैसले को मंजूरी देने और उसकी पुष्टि करने वाले क्रमशः 21 जून और 6 जुलाई के आदेशों को भी पूरी तरह निरस्त कर दिया।
कापा कानून के तहत छह महीने के लिए हुई थी कार्रवाई
भाजपा पार्षद आर. सुगथन पर कई आपराधिक मामलों में संलिप्तता का आरोप लगाते हुए ‘केरल असामाजिक गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 2007’ (कापा) के तहत कार्रवाई की गई थी। इसके तहत उन्हें 8 जून से छह महीने के लिए विय्यूर सेंट्रल जेल में प्रिवेंटिव डिटेंशन में भेजा गया था। इस कार्रवाई को अवैध बताते हुए उनकी पत्नी ने हाईकोर्ट का रुख किया था, जहां अदालत ने हिरासत के आदेश को निरस्त कर उनकी रिहाई का मार्ग प्रशस्त किया।

