सिक्किम हाईकोर्ट ने एक 50 वर्षीय व्यक्ति के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने यह आदेश इस तथ्य को देखते हुए दिया कि पति-पत्नी ने आपसी विवाद सुलझा लिया है, पिछले दो वर्षों से फिर साथ रह रहे हैं और अपने पारिवारिक जीवन को आगे बढ़ाना चाहते हैं।
जस्टिस भास्कर राज प्रधान ने पति की उस याचिका को स्वीकार किया, जिसमें उसने वर्ष 2022 में पत्नी की शिकायत पर दर्ज एफआईआर और उससे जुड़ी आपराधिक कार्यवाही रद्द करने की मांग की थी। पत्नी ने शिकायत में क्रूरता और बार-बार गलत व्यवहार के आरोप लगाए थे।
कोर्ट ने पाया कि वर्ष 2005 में विवाह करने वाला यह दंपति पिछले दो वर्षों से दोबारा साथ रह रहा है। दोनों ने इस साल अप्रैल में एक समझौता भी किया, जिसमें अपनी 18 वर्षीय बेटी की भलाई को प्राथमिकता देते हुए शांतिपूर्ण ढंग से साथ रहने पर सहमति जताई।
पति ने जताया पछतावा, सम्मानजनक वैवाहिक जीवन का दिया भरोसा
सुनवाई के दौरान पति ने अपने व्यवहार पर पछतावा जताया और पत्नी से माफी मांगी। उसने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि वह आगे ऐसा व्यवहार करेगा जिससे दोनों के बीच शांतिपूर्ण और सम्मानजनक वैवाहिक जीवन बना रहे।
हाईकोर्ट ने दर्ज किया कि पति ने कहा कि वह अब बदल चुका है और पहले से बेहतर व्यक्ति बन गया है। पति-पत्नी ने कोर्ट को यह भी बताया कि उनकी 18 वर्षीय बेटी उनके साथ रहती है और उसकी खुशी उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण है।
दंपति के बीच सुलह का उल्लेख करते हुए कोर्ट ने एक पुरानी नेपाली कहावत का जिक्र किया। इसका भाव यह है कि पति-पत्नी का झगड़ा सूखी घास की आग जैसा होता है, जो तेजी से जलती है लेकिन ज्यादा देर तक नहीं टिकती।
2022 में दर्ज हुई थी एफआईआर
पत्नी ने वर्ष 2022 में शिकायत दर्ज कराते हुए पति पर क्रूरता और गलत व्यवहार के आरोप लगाए थे। शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज हुई और जांच के बाद आरोपपत्र भी दाखिल किया गया।
इसके बाद पति ने सिक्किम हाईकोर्ट का रुख कर एफआईआर और उससे जुड़ी आपराधिक कार्यवाही रद्द करने की मांग की।
पति ने कोर्ट के सामने अप्रैल में हुआ समझौता भी पेश किया। इसमें दोनों ने अपनी बेटी की भलाई को ध्यान में रखते हुए शांतिपूर्ण ढंग से साथ रहने और अच्छे संबंध बनाए रखने पर सहमति जताई थी। पति ने यह भी भरोसा दिया कि वह पत्नी के साथ दुर्व्यवहार नहीं करेगा और उसे किसी तरह परेशान नहीं करेगा।
पति की ओर से अधिवक्ता राहुल राठी और पत्नी की ओर से अधिवक्ता सफल शर्मा ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने अपने-अपने मुवक्किलों से व्यक्तिगत रूप से बात की है और आपराधिक कार्यवाही समाप्त करना परिवार के हित में होगा। इससे दंपति को अपने रिश्ते को आगे बढ़ाने का एक और मौका मिलेगा।
पति-पत्नी से बातचीत और उनके बीच हुए समझौते पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने माना कि आपराधिक कार्यवाही को जारी रखने की आवश्यकता नहीं है।
इसके बाद कोर्ट ने एफआईआर और पति के खिलाफ उससे जुड़ी आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया, ताकि दोनों शांतिपूर्ण और सम्मानजनक तरीके से अपना वैवाहिक जीवन आगे बढ़ा सकें।

