कर्नाटक हाईकोर्ट ने दिवंगत कन्नड़ अभिनेता पुनीत राजकुमार को लेकर इंस्टाग्राम पर कथित रूप से आपत्तिजनक पोस्ट करने वाले 22 वर्षीय छात्र के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी है। कोर्ट ने छात्र के भविष्य पर मुकदमे के संभावित असर को देखते हुए नरमी बरती, हालांकि उसे भविष्य में ऐसी गतिविधियों से दूर रहने की चेतावनी भी दी।
जस्टिस सूरज गोविंदराज ने याचिकाकर्ता के वकील को भी निर्देश दिया कि वह छात्र को इस संबंध में उचित सलाह दें।
हालांकि, हाईकोर्ट ने यह भी माना कि छात्र ने जिन शब्दों का इस्तेमाल किया था, वे जिस संदर्भ में लिखे गए थे, उसे देखते हुए सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67 के तहत अपराध के दायरे में आएंगे। कोर्ट ने इस बात पर भी गौर किया कि पुनीत राजकुमार युवाओं के शराब सेवन के खिलाफ थे और विवादित पोस्ट उनकी मृत्यु के तुरंत बाद की गई थी।
अक्टूबर 2021 में पुनीत राजकुमार की मृत्यु के बाद छात्र ने कथित तौर पर बीयर की बोतल के साथ एक अपमानजनक पोस्ट अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर डाली थी। पोस्ट वायरल होने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने बेंगलुरु सिटी पुलिस को टैग किया। इसके बाद युवक को गिरफ्तार कर लिया गया।
बेंगलुरु पुलिस ने 1 नवंबर 2021 को उसके खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत दंडनीय अपराधों में मामला दर्ज किया था।
सोशल मीडिया पोस्ट के समय और संदर्भ को भी देखना जरूरी: हाईकोर्ट
हाईकोर्ट ने कहा कि सोशल मीडिया पर लिखे गए किसी बयान को केवल उसके शब्दों के आधार पर नहीं देखा जा सकता। बयान किस समय और किन परिस्थितियों में दिया गया, इसका भी ध्यान रखना जरूरी है।
कोर्ट ने कहा कि यह दुखद था कि एक सम्मानित अभिनेता की मृत्यु के तुरंत बाद इस तरह की पोस्ट डाली गई। कोर्ट ने यह भी गौर किया कि पोस्ट से आम लोगों के बीच चिंता पैदा हुई और शांति एवं सद्भाव प्रभावित हुआ, जिसके बाद अपराध दर्ज किया गया।
सुनवाई के दौरान बेंच ने छात्र के आचरण पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या केवल सोशल मीडिया तक पहुंच होने का मतलब यह है कि किसी अभिनेता की मृत्यु के बाद इस तरह की पोस्ट डाली जा सकती है।
छात्र के भविष्य को देखते हुए कोर्ट ने दिखाई नरमी
आपराधिक कार्यवाही रद्द करते समय जस्टिस गोविंदराज ने छात्र की पृष्ठभूमि और मुकदमा जारी रहने से उसकी पढ़ाई तथा भविष्य पर पड़ने वाले प्रभाव को ध्यान में रखा।
कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता भारत का निवासी नहीं था और हाल ही में भारत आया था। वह एक अच्छे विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ इकोनॉमिक्स की पढ़ाई कर रहा है। हाईकोर्ट ने माना कि आपराधिक कार्यवाही जारी रहने से उसके भविष्य की संभावनाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है, इसलिए उसके प्रति नरमी बरतना उचित होगा।
छात्र फिलहाल हरियाणा के एक प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय में पढ़ाई कर रहा है।
छात्र की दलील: पोस्ट खराब रुचि की हो सकती है, लेकिन अश्लील नहीं
याचिकाकर्ता के वकील ने कार्यवाही रद्द करने की मांग करते हुए दलील दी थी कि सोशल मीडिया पोस्ट को अधिक से अधिक खराब रुचि वाला कहा जा सकता है, लेकिन उसमें ऐसी कोई अश्लील या यौन रूप से स्पष्ट सामग्री नहीं थी जिससे सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67 के तहत अपराध बनता हो।
बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि छात्र का जन्म और पालन-पोषण लंदन में हुआ है और उसे अपनी सोशल मीडिया पोस्ट के संभावित परिणामों की जानकारी नहीं थी। यह भी दलील दी गई कि वह एक निजी विश्वविद्यालय में पढ़ रहा है और लंबित आपराधिक मामला उसके भविष्य पर प्रतिकूल असर डाल रहा है।
हाईकोर्ट ने हालांकि पाया कि पोस्ट में इस्तेमाल किए गए शब्दों को उनके संदर्भ में देखने पर वे धारा 67 के तहत अपराध के दायरे में आते हैं। इसके बावजूद छात्र के भविष्य को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने नरमी दिखाते हुए उसके खिलाफ आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी।
पुनीत राजकुमार की मृत्यु के बाद बेंगलुरु पुलिस ने एहतियाती कदम के तौर पर शहर में कुछ दिनों के लिए शराब की बिक्री पर भी रोक लगा दी थी, ताकि किसी अप्रिय घटना को रोका जा सके।

