खूंखार अपराधी को पकड़ने वाले पुलिस कांस्टेबल को आउट-ऑफ-टर्न प्रमोशन का आदेश, हाईकोर्ट ने 1,600 रुपये के इनाम को बताया निंदनीय

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 2010 के एक उच्च जोखिम वाले अभियान के दौरान इनामी अपराधी को गिरफ्तार करने में अहम भूमिका निभाने वाले पुलिस कांस्टेबल को आउट-ऑफ-टर्न प्रमोशन (समय-पूर्व पदोन्नति) देने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही अदालत ने राज्य सरकार द्वारा कांस्टेबल को महज 1,600 रुपये का नकद पुरस्कार देने के फैसले को बेहद खेदजनक और बहादुर पुलिसकर्मियों का मनोबल गिराने वाला करार दिया।

जस्टिस मिलिंद रमेश फड़के ने 21 अगस्त को जारी अपने आदेश में स्पष्ट किया कि वर्ष 1993 में पुलिस बल में शामिल हुए इस कांस्टेबल को रेगुलेशन 70-ए के तहत पदोन्नति दी जाए। अदालत ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को उसके साथी कर्मचारियों को पदोन्नत किए जाने की तिथि से सभी परिणामी लाभ दिए जाएं। वर्षों से जारी कानूनी प्रक्रिया को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने मामले को दोबारा प्रशासनिक अधिकारियों के पास पुनर्विचार के लिए भेजने के बजाय सीधे प्रमोशन देने का फैसला सुनाया।

अभियान और पदोन्नति से जुड़ा विवाद

यह मामला रतलाम के माणक चौक थाने में 2010 में दर्ज एक आपराधिक मामले से जुड़ा है। 25,000 रुपये के इनामी और लंबे समय से फरार चल रहे अपराधी गुलफाम ने एक व्यवसायी से 10 लाख रुपये की रंगदारी मांगी थी। इस खूंखार अपराधी को पकड़ने के लिए पुलिस टीम उत्तर प्रदेश के रामपुर गई थी, जहां उत्तर प्रदेश पुलिस और स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) के सहयोग से उसे गिरफ्तार किया गया।

अभियान की सफलता के बाद रतलाम के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक (एसपी) ने याचिकाकर्ता कांस्टेबल और दो हेड कांस्टेबलों के उत्कृष्ट प्रदर्शन और बहादुरी को देखते हुए आउट-ऑफ-टर्न प्रमोशन की सिफारिश की थी। कांस्टेबल ने अभियान में अपनी सक्रिय भागीदारी साबित करने के लिए पुलिस डायरी की प्रविष्टियां, इनाम सूची, समाचार पत्रों की रिपोर्ट और होटल के बिल अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए थे।

READ ALSO  अनुकंपा नियुक्ति के लिए केवल इसलिए कि आवेदक की शादी हो गई है, उसे आर्थिक रूप से स्थिर नहीं माना जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इसके बावजूद, राज्य प्रशासन ने कांस्टेबल की सेवाओं का मूल्यांकन करने के बाद उसे पदोन्नति के लिए अनुपयुक्त माना और प्रमोशन के बजाय केवल 1,600 रुपये का नकद पुरस्कार दे दिया। दूसरी तरफ, एक अन्य पुलिस अधिकारी को आउट-ऑफ-टर्न पदोन्नति दे दी गई, जबकि उसका नाम न तो आधिकारिक पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज था और न ही मूल सिफारिश सूची में। इस अनदेखी के खिलाफ कांस्टेबल ने पहले डीआईजी को ज्ञापन सौंपा और बाद में हाईकोर्ट का रुख किया।

अदालत में दिए गए तर्क

हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता के. सी. रायकवार ने कहा कि उनके मुवक्किल ने अभियान के दौरान अदम्य साहस का परिचय दिया था, लेकिन राज्य सरकार ने वरिष्ठ अधिकारी की स्पष्ट सिफारिश को अनुचित रूप से नजरअंदाज कर दिया। वहीं, राज्य सरकार का पक्ष रखते हुए सरकारी वकील तरुण पगारे ने तर्क दिया कि कांस्टेबल के योगदान पर विचार किया गया था और उसे नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया जा चुका है, इसलिए वह पदोन्नति के योग्य नहीं पाया गया।

हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणियां और निर्देश

READ ALSO  नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता रद्द करने का प्रावधान कहाँ है? सपा नेता की याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पूँछा

राज्य सरकार की दलीलों को खारिज करते हुए जस्टिस फड़के ने कहा कि यद्यपि रेगुलेशन 70-ए के तहत आउट-ऑफ-टर्न प्रमोशन देना प्रशासन का विवेकाधिकार है और इसे मौलिक अधिकार के रूप में दावा नहीं किया जा सकता, लेकिन इस तरह के अधिकारों का प्रयोग निष्पक्ष, तर्कसंगत और बिना किसी भेदभाव के किया जाना चाहिए।

पीठ ने रेखांकित किया कि पुलिस अधीक्षक की सिफारिश अत्यंत महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि वही अधिकारी जमीनी स्तर पर अभियान और कर्मियों के प्रदर्शन का सीधा मूल्यांकन करता है। खतरनाक स्थिति में जान जोखिम में डालने वाले जवानों के साहसिक कार्य को महज 1,600 रुपये के टोकन इनाम तक सीमित करना बल के मनोबल पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है।

READ ALSO  किसी अपील को स्वीकार करने के लिए अपीलीय अदालत को उसके लंबित रहने के दौरान प्रतिकूल परिणामों को रोकने के लिए अंतरिम राहत देने का आदेश दिया गया है: इलाहाबाद हाईकोर्ट

अदालत ने माना कि जब उसी अभियान में शामिल अन्य समकक्ष कर्मचारियों को पदोन्नत कर दिया गया, तो याचिकाकर्ता को इससे वंचित रखना मनमाना और यांत्रिक कदम था। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने कांस्टेबल को पूरे परिणामी लाभों के साथ आउट-ऑफ-टर्न पदोन्नति देने का अंतिम निर्देश दिया।

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles