बिदादी टाउनशिप विवाद: हाईकोर्ट ने किसानों के खिलाफ पुलिस जांच पर लगाई रोक, दर्ज एफआईआर पर उठाए सवाल

कर्नाटक हाईकोर्ट ने ग्रेटर बेंगलुरु इंटीग्रेटेड टाउनशिप परियोजना के लिए हो रहे जमीन सर्वे का विरोध करने वाले छह किसानों के खिलाफ जारी पुलिस जांच पर अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत ने उस एफआईआर के औचित्य पर गंभीर सवाल खड़े किए, जिसमें किसानों पर सर्वे अधिकारियों पर हमले का आरोप लगाया गया था। मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस एम नागप्रसन्न ने टिप्पणी की कि शिकायत किसी पीड़ित अधिकारी ने नहीं, बल्कि सर्वे टीम की गाड़ी चलाने वाले एक निजी ड्राइवर ने दर्ज कराई है, जिससे पूरे मामले की निष्पक्षता संदिग्ध नजर आती है।

निजी ड्राइवर की शिकायत पर दर्ज हुई थी एफआईआर

यह पूरा विवाद बेंगलुरु दक्षिण जिले के मंडलाहल्ली गांव से जुड़ा है, जहां 13 जुलाई को बिदादी टाउनशिप परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण का सर्वे करने पहुंची संयुक्त मापन समिति (जेएमसी) के अधिकारियों का स्थानीय ग्रामीणों ने कड़ा विरोध किया था। इसके बाद मोहम्मद समीर नामक एक निजी कार चालक की शिकायत पर पुलिस ने छह किसानों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 109(1) (हत्या के प्रयास) और धारा 74 (महिला की लज्जा भंग करने के उद्देश्य से हमला) के तहत मामला दर्ज किया था। किसानों ने इस एफआईआर को रद्द करने की मांग को लेकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

झाड़ू लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन का दावा

अदालत में याचिकाकर्ताओं का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ वकील डी आर रविशंकर ने तर्क दिया कि किसान अपनी पैतृक भूमि की रक्षा के लिए हाथों में झाड़ू लेकर केवल शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने समाचार पत्रों में पहले ही यह आश्वासन दिया था कि किसानों की सहमति और कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना भूमि अधिग्रहण नहीं किया जाएगा। ऐसे में बिना सहमति सर्वे की प्रक्रिया पूरी तरह अवैध थी। बचाव पक्ष का कहना था कि अपनी जमीन बचाने की कोशिश कर रहे परेशान ग्रामीणों के बीच हुए मामूली धक्का-मुक्की के घटनाक्रम को पुलिस ने महिला अधिकारियों की लज्जा भंग करने और जानलेवा हमले जैसे गंभीर अपराधों में बदल दिया।

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मंडलाहल्ली गांव में हुआ था जोरदार विरोध

13 जुलाई को हुई घटना के दौरान ग्रामीणों ने सर्वे टीम को रोकने के लिए गांव के मुख्य मार्ग को बंद कर दिया था। हालांकि, सर्वे अधिकारी वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल कर मौके पर पहुंच गए। इसकी खबर फैलते ही गांव की महिलाएं झाड़ू लेकर सड़कों पर उतर आईं और अधिकारियों से भिड़ गईं। घटना के सामने आए वीडियो में प्रदर्शनकारी महिलाएं सर्वे अधिकारियों का सामना करती, एक अधिकारी को खदेड़ती और यह शिकायत करती दिख रही हैं कि भूमि अधिग्रहण के खिलाफ दर्ज उनकी औपचारिक आपत्तियों पर सरकार कोई ध्यान नहीं दे रही है।

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7,400 एकड़ जमीन अधिग्रहण का है प्रस्ताव

यह सर्वे राज्य सरकार की उस योजना का हिस्सा है जिसके तहत बिदादी के आसपास के नौ गांवों की लगभग 7,400 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया जाना है। मुख्यमंत्री डी के शिवकुमार की प्राथमिकताओं में शामिल इस ग्रेटर बेंगलुरु इंटीग्रेटेड टाउनशिप परियोजना की प्रारंभिक अधिसूचना इस साल मार्च में जारी की गई थी। इसके बाद से ही स्थानीय भूस्वामी और किसान इस परियोजना का लगातार विरोध कर रहे हैं।

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