सिनेमाहॉल में दर्शक को चूहे ने काटा: कंज्यूमर कमीशन ने थिएटर पर लगाया 18,000 रुपये का जुर्माना

सुरक्षा और स्वच्छता बनाए रखना सिनेमाघरों की जिम्मेदारी: उपभोक्ता आयोग

केरल के कासरगोड में एक सिनेमाघर के भीतर फिल्म देख रहे दर्शक को चूहे द्वारा काटे जाने के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने थिएटर प्रबंधन को सेवा में गंभीर लापरवाही का दोषी ठहराते हुए पीड़ित दर्शक को 15,000 रुपये का मुआवजा और 3,000 रुपये कानूनी खर्च के रूप में भुगतान करने का निर्देश दिया है। यह राशि आदेश मिलने के 30 दिनों के भीतर जमा करानी होगी।

अध्यक्ष कृष्णन के और सदस्य बीना केजी की पीठ ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि सिनेमाघर में आने वाले दर्शकों को सुरक्षित और स्वच्छ माहौल देना प्रबंधन का प्राथमिक कर्तव्य है। आयोग ने कहा कि लोग मनोरंजन के लिए सिनेमाहॉल आते हैं, और ऐसे में हॉल के भीतर चूहे का काटना एक अत्यंत गंभीर मामला है, जो सेवा में सीधी कमी को दर्शाता है।

अस्पताल के पर्चे और टिकट से साबित हुआ मामला

पीड़ित दर्शक ने आयोग के समक्ष अपना सिनेमा टिकट, डॉक्टर का पर्चा और इलाज के बिल प्रस्तुत किए थे। इन साक्ष्यों का अध्ययन करने के बाद आयोग ने पाया कि दर्शक घटना के समय थिएटर में मौजूद था। चिकित्सा दस्तावेजों से यह भी स्पष्ट हुआ कि काटने के तुरंत बाद पीड़ित को अस्पताल जाना पड़ा, जहां डॉक्टरों ने उसे रेबीज का टीका और टिटनेस का इंजेक्शन लेने की सलाह दी थी। आयोग ने माना कि इस घटना के कारण दर्शक को शारीरिक कष्ट के साथ-साथ गंभीर मानसिक प्रताड़ना और वित्तीय नुकसान झेलना पड़ा।

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शो खत्म होने से ठीक पहले हुआ हादसा

शिकायतकर्ता के अनुसार, वह अपने एक दोस्त के साथ शाम 7:30 बजे का शो देखने कासरगोड स्थित सिनेमाहॉल गया था। फिल्म समाप्त होने से कुछ ही समय पहले उसे एक चूहे ने काट लिया। उसने तुरंत इस बारे में थिएटर के काउंटर पर मौजूद कर्मचारियों को सूचित किया, लेकिन कर्मचारियों ने उसकी शिकायत पर कोई ध्यान नहीं दिया।

इसके बाद पीड़ित ने अस्पताल जाकर इलाज कराया, जिसमें लगभग 1,500 रुपये का खर्च आया। जब उसने थिएटर मैनेजर से इलाज का खर्च मांगा, तो मैनेजर ने केवल 1,000 रुपये दिए और बाकी रकम देने से साफ इनकार कर दिया। बार-बार गुहार लगाने के बाद भी जब प्रबंधन ने कोई सुनवाई नहीं की, तो पीड़ित ने कंज्यूमर कमीशन का रुख करते हुए 20,000 रुपये के मुआवजे की मांग की थी।

थिएटर प्रबंधन के तर्कों को आयोग ने किया खारिज

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दूसरी ओर, थिएटर प्रबंधन ने अपने बचाव में सभी आरोपों को सिरे से नकार दिया था। प्रबंधन का दावा था कि पीड़ित उस दिन सिनेमाहॉल आया ही नहीं था और न ही काउंटर पर ऐसी किसी घटना की जानकारी दी गई थी। थिएटर पक्ष ने यह तर्क भी दिया कि उनका सिनेमाघर पिछले नौ सालों से संचालित हो रहा है और वहां साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखा जाता है, तथा इससे पहले कभी ऐसी कोई शिकायत दर्ज नहीं हुई।

हालांकि, आयोग ने थिएटर के इन सभी तर्कों को अमान्य कर दिया। लिखित साक्ष्यों, मेडिकल रिपोर्ट और एंट्री टिकट के आधार पर आयोग ने माना कि थिएटर की ओर से सेवा में लापरवाही हुई है, जिसके लिए पीड़ित मुआवजा पाने का पूरा हकदार है।

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