केरल हाईकोर्ट ने गाड़ियों में अनधिकृत बदलावों (मॉडिफिकेशन) और सड़क सुरक्षा के नियमों की अनदेखी पर मोटर वाहन विभाग (MVD) को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने राज्य के परिवहन विभाग और पुलिस को अनधिकृत मॉडिफिकेशन के खिलाफ पहले से जारी अदालती निर्देशों का पूरी सख्ती से पालन कराने का आदेश दिया है।
बाढ़ राहत में शामिल वाहन पर सुस्त कार्रवाई पर असंतोष
जस्टिस अनिल के. नरेंद्रन और जस्टिस मुरली कृष्णा एस. की खंडपीठ ने 21 अगस्त को सड़क सुरक्षा से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान परिवहन आयुक्त की रिपोर्ट की समीक्षा की। कोर्ट ने पाया कि इस महीने की शुरुआत में आरणमुला में बाढ़ राहत कार्य से लौट रही एक प्राइवेट एसयूवी पर छह अनधिकृत अतिरिक्त लाइटें लगी होने के बावजूद MVD की प्रवर्तन शाखा ने उस पर महज 5,000 रुपये का जुर्माना लगाया।
यह मामला तब सामने आया था जब अदूर में तैनात MVD के दो अधिकारियों को इस एसयूवी का प्रदूषण प्रमाणपत्र न होने और अवैध मॉडिफिकेशन का चालान काटने की वजह से निलंबित कर दिया गया था।
पुराना चालान पेंडिंग और सुरक्षा से खिलवाड़
हाईकोर्ट ने ध्यान दिलाया कि परिवहन आयुक्त की 20 अगस्त 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, इसी वाहन के खिलाफ 11 मार्च 2024 को जारी किया गया एक ई-चालान अब तक लंबित है। पुराना उल्लंघन पेंडिंग होने के बावजूद इस वाहन को गैर-कानूनी लाइटों और बदलावों के साथ दोबारा सड़कों पर चलने दिया गया, जिससे अन्य वाहन चालकों की सुरक्षा खतरे में पड़ी।
पैदल यात्रियों और दोपहिया चालकों के लिए बढ़ता जोखिम
सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने उन वाहनों का मुद्दा भी उठाया जिनके पहिए बॉडी या मडगार्ड से बाहर निकले होते हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि पुलिस और परिवहन अधिकारी ऐसे वाहनों को रोकने में नाकाम रहे हैं। इस तरह के वाहनों से पानी और कीचड़ उछलकर पैदल चलने वालों, साइकिल सवारों और दोपहिया वाहन चालकों पर गिरता है, जिससे दुर्घटना का अंदेशा बना रहता है।
7 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
राज्य सरकार के विशेष सरकारी वकील ने अदालत से परिवहन आयुक्त की ओर से विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय देने का अनुरोध किया। कोर्ट ने इस मांग को स्वीकार करते हुए प्रवर्तन एजेंसियों को गाड़ियों के मॉडिफिकेशन पर जारी निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने का आदेश दिया। मामले की अगली सुनवाई अब 7 सितंबर को होगी।

