पंजाब के उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने कनाडाई उड़ान पर यात्री को बिना किसी वैध कारण के बोर्डिंग देने से मना करने पर एक एयरलाइन को सेवा में लापरवाही का दोषी ठहराया है। आयोग ने एयरलाइन को टिकट का पूरा पैसा वापस लौटाने के साथ-साथ पीड़ित यात्री को 30,000 रुपये का अतिरिक्त वित्तीय हर्जाना देने का निर्देश दिया है।
अध्यक्ष डॉ. हरवीन भारद्वाज, सदस्य ज्योत्स्ना और जसवंत सिंह ढिल्लों की पीठ ने माना कि एयरलाइन ने यात्री को विमान में चढ़ने से रोककर और बाद में उसका रिफंड खारिज करके सेवा में गंभीर चूक की है। मामले का निपटारा करते हुए आयोग ने कंपनी को 1,23,381 रुपये का पूरा हवाई किराया लौटाने, मानसिक प्रताड़ना और असुविधा के एवज में 20,000 रुपये का मुआवजा देने और 10,000 रुपये कानूनी खर्च के रूप में भुगतान करने का हुक्म सुनाया।
दिल्ली हवाई अड्डे पर क्या हुआ था
यह विवाद नई दिल्ली से वारसॉ होते हुए टोरंटो की यात्रा से जुड़ा है। यात्री ने एक बुकिंग एजेंसी के माध्यम से 1,23,381 रुपये में कन्फर्म टिकट खरीदा था। शिकायतकर्ता के अनुसार, वह उड़ान के निर्धारित समय से लगभग पांच घंटे पहले दिल्ली हवाई अड्डे पर पहुंच गया था। उस समय उसके पास वैध पासपोर्ट, कनाडा का मल्टीपल-एंट्री वीजा और सभी जरूरी यात्रा दस्तावेज मौजूद थे।
सुरक्षा जांच और दस्तावेजों के अनिवार्य सत्यापन के बाद जब वह बोर्डिंग पास लेने एयरलाइन के काउंटर पर गया, तो वहां तैनात कर्मचारियों ने उसे करीब एक घंटे तक इंतजार कराया। इसके बाद उसे विमान में सवार होने से मना कर दिया गया। हवाई अड्डे पर असहाय छोड़े जाने के बाद यात्री ने रिफंड के लिए ट्रैवल एजेंट से संपर्क किया, लेकिन एजेंट ने बताया कि रिफंड का अधिकार केवल एयरलाइन के पास है। टोरंटो पहुंचने के लिए यात्री को दूसरी महंगी टिकट खरीदने पर मजबूर होना पड़ा, जिसके बाद उसने कानूनी रास्ता अपनाया।
एयरलाइन के दावे को ईमेल ने बनाया झूठा
अपने बचाव में एयरलाइन ने सेवा में किसी भी कमी से इनकार किया और दावा किया कि यात्री तय समय सीमा में चेक-इन काउंटर पर रिपोर्ट करने में विफल रहा, इसलिए उसे ‘नो-शो’ दर्ज किया गया। कंपनी ने तर्क दिया कि नीति के अनुसार टिकट गैर-रिफंडेबल था और केवल 8,920 रुपये के वैधानिक कर ही वापस योग्य थे, जो बुकिंग एजेंसी के जरिए पहले ही लौटाए जा चुके थे।
हालांकि, आयोग ने एयरलाइन के इस रुख को खारिज कर दिया। आयोग ने ट्रैवल एजेंसी द्वारा एयरलाइन को भेजे गए एक समकालीन ईमेल पर भरोसा जताया। इस ईमेल में स्पष्ट लिखा था कि हवाई अड्डा काउंटर स्टाफ ने यात्री से उसकी यात्रा के उद्देश्य के बारे में पूछताछ करने के बाद उसे रोक दिया है। साथ ही एजेंसी ने एयरलाइन से पूछा था कि क्या यात्री को रिफंड दिया जाए, तारीख बदलने की अनुमति मिले या ‘नो-शो’ माना जाए।
साक्ष्यों के संतुलन और संभावनाओं के आधार पर आयोग ने कहा कि इस पत्राचार ने एयरलाइन के अप्रमाणित दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और यात्री के पक्ष को अधिक विश्वसनीय साबित किया है।
ट्रैवल एजेंसी को मिली राहत
एयरलाइन को जिम्मेदार ठहराते हुए आयोग ने ट्रैवल एजेंसी के खिलाफ दर्ज शिकायत को खारिज कर दिया। पीठ ने कहा कि एजेंसी ने केवल एक बुकिंग मध्यस्थ के रूप में कार्य किया था और उसकी ओर से सेवा में कोई चूक स्थापित नहीं हुई है।

