पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने करनाल के एक प्रोसेसिंग प्लांट से 7.68 लाख रुपये मूल्य के दूध चोरी के मामले में गिरफ्तार सुरक्षा गार्ड को जमानत दे दी है। मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस मनीषा बत्रा ने 12 अगस्त के अपने आदेश में स्पष्ट किया कि जमानत का प्राथमिक उद्देश्य मुकदमे की सुनवाई के दौरान आरोपी की उपस्थिति सुनिश्चित करना है, न कि उसे सजा देना या दंडात्मक हिरासत में रखना। अदालत ने कहा कि कानून का स्थापित सिद्धांत है कि बेल नियम है और जेल अपवाद। आरोपी 19 दिसंबर 2025 से हिरासत में था और अब पुलिस को जांच के लिए उसकी कोई आवश्यकता नहीं है, जबकि मुकदमे के समापन में लंबा समय लग सकता है।
17 दिसंबर की रात शामगढ़ प्लांट में हुई थी घटना
यह मामला करनाल के शामगढ़ स्थित मॉडर्न डेयरीज लिमिटेड का है, जहां 17 दिसंबर 2025 की रात एक टैंकर चालक पनीर वे लेकर आया था। कांटे पर दर्ज वजन के अनुसार भरे टैंकर का भार 32,360 किलोग्राम था, जो माल खाली होने के बाद 11,800 किलोग्राम रह गया। आरोप है कि इसके बाद चालक ने टैंकर को प्लांट के स्टोरेज टैंक से जोड़ा और लगभग 9,800 लीटर दूध अवैध रूप से भर लिया।
मुख्य द्वार के पास जब सुरक्षाकर्मियों ने वाहन को रोका, तो जांच में टैंकर के भीतर 9,110 किलोग्राम दूध बरामद हुआ, जिसकी कीमत 7.68 लाख रुपये आंकी गई। डेयरीज प्रबंधन ने आरोप लगाया कि चालक प्लांट के अधिकारियों और सह-आरोपियों की मिलीभगत से लगातार दूध चोरी कर कंपनी को भारी नुकसान पहुंचा रहा था। प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस ने 19 दिसंबर 2025 को सुरक्षा गार्ड को गिरफ्तार कर लिया। जांच के दौरान सह-आरोपी के बैंक खाते में 45 लाख रुपये के संदिग्ध वित्तीय लेनदेन का भी खुलासा हुआ।
बचाव पक्ष और राज्य सरकार की दलीलें
सुरक्षा गार्ड की ओर से पेश वकील पंकज बाली ने अदालत में दलील दी कि उनका मुवक्किल केवल परिसर की निगरानी के लिए अस्थायी रूप से तैनात था। प्लांट के भीतर लोडिंग या पंपिंग सिस्टम पर उसका कोई प्रशासनिक या तकनीकी नियंत्रण नहीं था और यह कार्य केवल प्रोसेसिंग ऑपरेटरों व हेल्पर्स द्वारा संचालित किया जाता था। इसके अलावा पूरा परिसर बहुस्तरीय सुरक्षा और सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में था। वकील ने तर्क दिया कि आरोपी का आपराधिक रिकॉर्ड पूरी तरह बेदाग रहा है, उसके पास से कोई चोरी की जायदाद बरामद नहीं हुई है और उसका नाम केवल सह-आरोपी के बयान के आधार पर शामिल किया गया था।
दूसरी ओर, राज्य सरकार का पक्ष रखते हुए सहायक अधिवक्ता जनरल नीरज पोसवाल ने जमानत याचिका का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कस्टडी सर्टिफिकेट पेश करते हुए कहा कि आरोपों की गंभीरता को देखते हुए उसे हिरासत में रखना आवश्यक है। राज्य पक्ष ने आशंका जताई कि जमानत मिलने पर आरोपी फरार हो सकता है या फिर से इसी तरह के अपराध को दोहरा सकता है। हालांकि, हाईकोर्ट ने राज्य की आपत्तियों को खारिज करते हुए कहा कि आरोपी को और अधिक समय तक हिरासत में रखने से कोई व्यावहारिक मकसद सिद्ध नहीं होगा।

