देश में पैर पसारती नशीले पदार्थों की तस्करी पर अंकुश लगाने के लिए दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। याचिका में नारकोटिक्स मामलों में समयबद्ध जांच, अदालती सुनवाई में तेजी, फोरेंसिक रिपोर्ट के लिए समय-सीमा तय करने और ड्रग तस्करों की संपत्तियां जब्त करने के लिए देशभर में एक समान जांच व्यवस्था (एसओपी) बनाने के निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।
मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की तीन सदस्यीय पीठ ने देश में ड्रग्स की बढ़ती समस्या को बेहद गंभीर बताया। पीठ ने कहा कि इस जानलेवा नेटवर्क पर लगाम कसने के लिए विशेषज्ञ एजेंसियों के एकीकृत और समन्वित प्रयासों की सख्त जरूरत है।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय ने पीठ को बताया कि इससे मिलता-जुलता एक अन्य मामला शीर्ष अदालत के समक्ष पहले से लंबित है। उन्होंने कहा कि सिंगापुर सहित कई देशों ने ड्रग तस्करी से निपटने के लिए बेहद कड़े और प्रभावी कदम उठाए हैं।
जांच और फोरेंसिक रिपोर्ट के लिए समय-सीमा की मांग
अधिवक्ता अश्विनी कुमार दुबे के माध्यम से दाखिल इस याचिका में अदालत से मांग की गई है कि नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) एक्ट के तहत दर्ज मुकदमों में फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) को रिपोर्ट सौंपने के लिए एक निश्चित समय-सीमा अनिवार्य की जाए। इसके साथ ही, कम और मध्यम मात्रा में नशीले पदार्थों की जब्ती, तलाशी और सैंपलिंग की प्रक्रिया में गड़बड़ियों को रोकने के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करने का सुझाव दिया गया है।
याचिका में समयबद्ध जांच और त्वरित सुनवाई के लिए विशेष अदालतों के गठन की सिफारिश की गई है। साथ ही, तलाशी, जब्ती और सैंपलिंग की पूरी कार्रवाई की डिजिटल रिकॉर्डिंग और वीडियोग्राफी अनिवार्य करने का अनुरोध किया गया है।
वित्तीय नेटवर्क पर प्रहार और संपत्ति जब्ती
ड्रग सिंडिकेट्स के वित्तीय नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए याचिका में मांग की गई है कि तस्करों, उनके फाइनेंसरों और परिजनों की अवैध संपत्तियों का समयबद्ध आकलन कर उन्हें जब्त किया जाए। इसके लिए एनडीपीएस एक्ट के अलावा प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), बेनामी संपत्ति अधिनियम और ब्लैक मनी एक्ट के तहत कार्रवाई करने का सुझाव दिया गया है।
कानूनी सुधार और पुनर्वास केंद्र
याचिका में कई प्रणालीगत सुधारों का प्रस्ताव रखा गया है:
- नए साइकोट्रोपिक पदार्थों की पहचान और नियमन के लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन।
- ड्रग्स का सेवन करने वाले पीड़ितों व नशेड़ियों को मुख्य तस्करों और फाइनेंसरों से अलग रखते हुए सजा की एक श्रेणीबद्ध नीति (ग्रेडेड सेंटेंसिंग) का निर्धारण।
- एनडीपीएस मामलों में मिलने वाली जेल की सजाओं को एक के बाद एक (कॉन्सिक्यूटिव) चलाने का कानूनी निर्देश।
- लॉ कमीशन को इस पूरे कानूनी ढांचे के पुनर्गठन पर एक व्यापक रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश।
- देशभर में सरकारी मदद से संचालित पुनर्वास व वेलनेस केंद्रों की स्थापना।
मामलों में 53 फीसदी की बढ़ोतरी और बुनियादी कमियां
याचिका में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2025 के दौरान नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों में 53 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि इस दौरान कुल 1,240 टन मादक पदार्थ जब्त किए गए। पंजाब और अन्य राज्यों की स्थिति का हवाला देते हुए याचिका में कहा गया कि नशे की लत से परिवार तबाह हो रहे हैं और यह सार्वजनिक स्वास्थ्य तथा कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बन चुका है।
याचिका के अनुसार, एक समान जांच मानकों की कमी, फोरेंसिक जांच में देरी और एजेंसियों के बीच समन्वय के अभाव जैसी ढांचागत कमियों के कारण मुकदमों में देरी होती है और मुख्य आरोपी बरी हो जाते हैं।

