क्लेम खारिज करना निवा बूपा को पड़ा भारी: उपभोक्ता आयोग ने दिया 2.65 लाख रुपये से अधिक चुकाने का आदेश

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने निवा बूपा हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी को एक महिला पॉलिसीधारक का मेडिकल क्लेम गलत तरीके से खारिज करने का दोषी ठहराया है। आयोग ने बीमा कंपनी को निर्देश दिया है कि वह महिला को उनके इलाज का पूरा क्लेम 2,30,124 रुपये 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ लौटाए। इसके साथ ही मानसिक उत्पीड़न के लिए 20,000 रुपये और कानूनी खर्च के रूप में 15,000 रुपये का भुगतान करने का भी निर्देश दिया है।

पोर्टेबिलिटी और क्लेम खारिज होने का मामला

यह विवाद ओवेरियन सिस्ट (अंडाशय में सिस्ट) के इलाज से जुड़े खर्च के भुगतान को लेकर शुरू हुआ। जुलाई 2024 में बीमारी का पता चलने के बाद महिला को 13 से 14 अगस्त 2024 तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा, जहां उनकी सर्जरी हुई। इस इलाज पर कुल 2,30,124 रुपये खर्च हुए, जिसमें 2,19,124 रुपये अस्पताल व सर्जरी के और 11,000 रुपये एमआरआई स्कैन के शामिल थे।

इलाज के बाद जब महिला ने क्लेम दाखिल किया, तो निवा बूपा ने 23 अगस्त 2024 को ईमेल के जरिए इसे खारिज कर दिया। कंपनी ने पॉलिसी के क्लॉज 6.1(a) का हवाला देते हुए सिस्ट को पुरानी बीमारी (प्री-एक्जिस्टिंग डिजीज) बताया और 36 महीने का वेटिंग पीरियड लागू कर दिया। बीमा कंपनी का कहना था कि यह बीमारी महिला द्वारा 2020 में कराई गई ‘ओपन हिस्टेरेक्टॉमी’ सर्जरी से जुड़ी हुई है। कंपनी ने तर्क दिया कि पोर्टेबिलिटी के बावजूद पिछली मेडिकल हिस्ट्री से जुड़ी बीमारियों पर विशेष वेटिंग पीरियड खत्म नहीं होता।

उपभोक्ता आयोग की जांच और आईआरडीएआई के नियम

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आयोग के अध्यक्ष हिमांशु मिश्रा और सदस्य आरती सूद व नारायण ठाकुर की पीठ ने बीमा कंपनी के तर्कों को पूरी तरह खारिज कर दिया। आयोग ने पाया कि महिला 30 जुलाई 2019 से लगातार बीमा कवर में थीं। शुरुआत में उनकी पॉलिसी स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस कंपनी के पास थी, जिसके तहत 2020 में उनका ऑपरेशन हुआ था। इसके बाद 8 अगस्त 2022 को उन्होंने बिना किसी रुकावट के अपनी पॉलिसी निवा बूपा में पोर्ट करा ली थी। इलाज के समय उनकी फैमिली फ्लोटर पॉलिसी 30 जुलाई 2024 से 29 जुलाई 2025 तक वैध थी।

25 जुलाई को आए अपने फैसले में आयोग ने स्पष्ट किया कि भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) के दिशानिर्देशों के तहत, पोर्ट की गई पॉलिसी स्वीकार करने वाली कंपनी को पुरानी पॉलिसी के दौरान पूरा हो चुका वेटिंग पीरियड क्रेडिट करना अनिवार्य है।

सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार

आयोग ने कहा कि अगस्त 2024 में इलाज के समय तक महिला के पास 5 साल से अधिक का लगातार बीमा कवर मौजूद था। ऐसे में 36 महीने के वेटिंग पीरियड की शर्त बहुत पहले ही समाप्त हो चुकी थी।

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पीठ ने माना कि पॉलिसी पोर्ट होने के बाद पुरानी मेडिकल हिस्ट्री के अस्पष्ट संबंधों का सहारा लेकर वेटिंग पीरियड को नए सिरे से लागू करना पूरी तरह से मनमाना, गैर-कानूनी और उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन है। आयोग ने बीमा कंपनी के इस कदम को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार करार दिया।

आयोग ने आदेश दिया कि इलाज की मूल राशि पर शिकायत दर्ज करने की तिथि से अंतिम भुगतान होने तक 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी जोड़ा जाएगा।

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