कावेरी जल विवाद: तमिलनाडु की याचिका पर 13 अगस्त को सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट तमिलनाडु सरकार की उस याचिका पर 13 अगस्त को सुनवाई करने के लिए सहमत हो गया है, जिसमें पड़ोसी राज्य कर्नाटक को कावेरी नदी के पानी का उसका तय हिस्सा तुरंत जारी करने का निर्देश देने की मांग की गई है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्या कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की तीन सदस्यीय पीठ ने तमिलनाडु सरकार के वकीलों की दलीलों पर विचार करते हुए सुनवाई की तारीख तय की। राज्य के वकीलों ने अदालत को बताया कि बारिश में कमी के बावजूद कर्नाटक से पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है, जिससे राज्य में जल संकट गहरा गया है।

तमिलनाडु का कम पानी मिलने का दावा

मुख्यमंत्री जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलनाडु सरकार ने 3 अगस्त को शीर्ष अदालत में यह याचिका दायर की थी। राज्य सरकार का कहना है कि 29 जुलाई से 2 अगस्त के बीच बिलिगुंडलू गेजिंग स्टेशन पर पानी का बहाव केवल 158 से 550 क्यूसेक के बीच ही दर्ज किया गया, जो उसकी जरूरत से काफी कम है।

कावेरी जल नियमन समिति (CWRC) ने 28 जुलाई को कर्नाटक को 29 जुलाई से 15 दिनों के लिए रोजाना 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने का निर्देश दिया था। इस निर्देश को कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) ने भी बरकरार रखा था। हालांकि, तमिलनाडु का तर्क है कि CWMA द्वारा स्वीकृत 4.536 टीएमसी पानी अपर्याप्त है। राज्य के अनुसार, कर्नाटक के कृष्णराज सागर (KRS) और काबिनी जलग्रहण क्षेत्रों में हुई हालिया बारिश के बाद बिलिगुंडलू में तमिलनाडु को 26.954 टीएमसी पानी मिलना चाहिए था।

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जलाशयों में जल स्तर और विपक्ष का रुख

तमिलनाडु सरकार के अधिकारियों के मुताबिक, 3 अगस्त तक कर्नाटक के चार प्रमुख जलाशयों—केआरएस, काबिनी, हारंगी और हेमावती—में कुल मिलाकर 77.537 टीएमसी पानी का भंडारण मौजूद था। ऐसे में कर्नाटक आसानी से तमिलनाडु के हिस्से का पानी जारी कर सकता है।

राज्य सरकार के इस कदम के अलावा, तमिलनाडु की मुख्य विपक्षी पार्टी डीएमके ने भी सुप्रीम कोर्ट में एक अलग याचिका दायर की है। डीएमके ने अदालत से मांग की है कि वह 2018 के ऐतिहासिक फैसले और CWMA के निर्देशों का पालन कराने के लिए कर्नाटक को बाध्य करे।

डीएमके की याचिका में कहा गया है कि कर्नाटक को बिलिगुंडलू पर अगले 15 दिनों तक रोजाना 3,500 क्यूसेक पानी देने, 29 जुलाई से हुई आपूर्ति की कमी को पूरा करने और 26 जुलाई तक के बकाया 9.46 टीएमसी पानी के बदले 15 दिनों तक रोजाना 7,000 क्यूसेक पानी छोड़ने का आदेश दिया जाए। पार्टी ने यह भी मांग की है कि CWMA को रोजाना पानी के स्तर की निगरानी करने और अनुपालन रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया जाए।

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संस्थागत ढांचा और पृष्ठभूमि

उल्लेखनीय है कि तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल और पुडुचेरी के बीच कावेरी जल बंटवारे के लंबे विवाद पर 2018 में आए सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले के बाद केंद्र सरकार ने CWMA का गठन किया था। इस प्राधिकरण में चारों राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों के साथ-साथ केंद्र सरकार का एक नामित प्रतिनिधि भी शामिल होता है।

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