सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ताओं के एक समूह ने गुरुवार को शीर्ष अदालत परिसर में संविधान की प्रस्तावना का पाठ कर जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन के प्रति एकजुटता जताई। वकीलों ने यह कदम प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध में और ‘सेव डेमोक्रेसी, सेव कॉन्स्टिट्यूशन’ अभियान के तहत उठाया।
दोपहर के भोजन के अवकाश के दौरान हुए इस आयोजन का नेतृत्व वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह और एस मुरलीधर ने किया। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह भी उपस्थित थे।
छात्रों के अधिकारों के लिए एकजुट हुए वकील
कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बात करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने कहा कि वकील अपनी मांगों के लिए नहीं, बल्कि छात्रों के समर्थन और न्याय के पक्ष में खड़े होने आए हैं। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा छात्रों के अधिकारों से जुड़ा है और उनके लिए सुप्रीम कोर्ट के समक्ष न्याय की मांग करना वकीलों का दायित्व है।
जयसिंह ने आगे कहा कि सुप्रीम कोर्ट की मूल जिम्मेदारी न्याय देना है, इसीलिए वे न्याय के इस मंदिर में अपनी मांगों के साथ उपस्थित हुए हैं।
परीक्षा धांधली के खिलाफ जून से जारी है प्रदर्शन
यह विरोध प्रदर्शन 20 जून से जंतर-मंतर पर ‘सीजेपी’ आंदोलन के तहत जारी है, जिसकी शुरुआत परीक्षा प्रणाली में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक के मामलों के विरोध में हुई थी। यह आंदोलन भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की उस टिप्पणी के बाद शुरू हुआ था, जिसमें उन्होंने युवाओं को “कॉकरोच” कहा था।
हाल ही में कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और वामपंथी छात्र संगठन ‘आइसा’ (AISA) के सदस्यों द्वारा भूख हड़ताल शुरू करने के बाद जंतर-मंतर पर प्रदर्शन और तेज हो गया है।

