दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को हिंदुत्व इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज की बंदी प्रत्यक्षीकरण (हेबियस कॉर्पस) याचिका पर तत्काल सुनवाई करने की सहमति दे दी है। भारद्वाज ने जंतर-मंतर पर एक छात्र कार्यकर्ता के पिता के साथ हुई कथित मारपीट के मामले में अपनी गिरफ्तारी को अदालत में चुनौती दी है।
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ के समक्ष इस याचिका का उल्लेख किया गया, जिसके बाद अदालत ने इसे दिन में ही सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने की अनुमति दे दी। भारद्वाज की ओर से पेश हुए वकील उमेश शर्मा ने दलील दी कि उनके मुवक्किल पिछले तीन दिनों से हिरासत में हैं, इसलिए मामले पर फौरन सुनवाई की जानी चाहिए।
हिरासत और न्यायिक रिमांड का घटनाक्रम
इससे पहले रविवार को भारद्वाज को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ड्यूटी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया था, जहां से उन्हें एक दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
पुलिस ने भारद्वाज को 4 सितंबर को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से हिरासत में लिया था। यह कार्रवाई कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) द्वारा संसद मार्ग थाने के बाहर उनकी तत्काल गिरफ्तारी की मांग को लेकर किए गए प्रदर्शन के कुछ ही घंटों बाद हुई थी। गिरफ्तारी के अगले दिन, यानी 5 सितंबर को उन्हें एक सत्र न्यायाधीश के आवास पर पेश किया गया था, जहां अदालत ने पूछताछ के लिए दिल्ली पुलिस को एक दिन की हिरासत की अर्जी मंजूर की थी।
मुकदमे की पृष्ठभूमि और लगी धाराएं
यह पूरा मामला 23 जून को जंतर-मंतर पर सीजेपी के विरोध प्रदर्शन के दौरान एक नाबालिग छात्रा कार्यकर्ता के पिता, संजय कुमार पर हुए कथित हमले से जुड़ा है।
दिल्ली पुलिस ने इस मामले में दर्ज प्राथमिकी में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के प्रावधानों के साथ-साथ आपराधिक धमकी से जुड़ी धाराएं भी जोड़ी हैं। इसके अलावा भारद्वाज के खिलाफ पॉक्सो (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण) कानून के तहत भी मामला दर्ज किया गया है।
वीडियो में किए गए दावों के बाद तेज हुई कार्रवाई
पुलिस की ओर से यह कड़ी कार्रवाई सोशल मीडिया पर एक साक्षात्कार के सामने आने और उस पर उठे भारी आक्रोश के बाद हुई। इस इंटरव्यू में भारद्वाज कथित तौर पर संजय कुमार का सिर फोड़ने का दावा करते और राजनीतिक रसूख के कारण गिरफ्तारी से बचने की बात कहते नजर आए थे। उन्होंने साक्षात्कार में कहा था कि उन्होंने सिर फोड़ा था, जिस पर धारा 307 (हत्या का प्रयास) लगती है और पीड़ित को 60 टांके आए थे।
वहीं, पीड़ित की बेटी ने पहले यह आरोप लगाया था कि पिता पर हुए हमले के खिलाफ आवाज उठाने और पुलिस में शिकायत दर्ज कराने के बाद उसे दुष्कर्म की धमकियां दी गईं, अभद्र भाषा का सामना करना पड़ा और उसकी तस्वीरों से छेड़छाड़ कर प्रसारित किया गया।

