ऑर्किड के पौधे न भेजने पर कंज्यूमर कोर्ट का बड़ा फैसला, बुटीक को रिफंड और हर्जाना देने का आदेश

केरल के पालक्काड जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक प्लांट बुटीक को ग्राहक के पैसे वापस करने और हर्जाना देने का निर्देश दिया है। बुटीक ने पैसे लेने के बावजूद महिला ग्राहक को न तो बुक किए गए ऑर्किड के पौधे भेजे और न ही उनका भुगतान वापस किया।

आयोग के अध्यक्ष विनय मेनन वी, सदस्य विद्या ए और कृष्णनकुट्टी की पीठ ने फैसला सुनाया कि ‘उम्मियाज़ प्लांट्स बुटीक’ ने सेवा में गंभीर लापरवाही की है। आयोग ने बुटीक को आदेश दिया है कि वह शिकायतकर्ता को 2,105 रुपये की मूल राशि 18 जनवरी 2024 से 10 प्रतिशत सालाना ब्याज के साथ लौटाए। इसके साथ ही, महिला को हुई मानसिक प्रताड़ना के एवज में 3,000 रुपये का मुआवजा और कानूनी खर्च के रूप में 2,500 रुपये का भुगतान करने का भी निर्देश दिया गया है।

अदालत ने बुटीक को इस पूरी राशि का भुगतान करने के लिए 45 दिनों का समय दिया है। यदि तय समय सीमा के भीतर भुगतान नहीं किया जाता है, तो बुटीक को भुगतान की पूरी तारीख तक 500 रुपये प्रति माह का अतिरिक्त जुर्माना देना होगा।

यूट्यूब वीडियो देखकर बुक किए थे 80 पौधे

यह पूरा मामला 18 जनवरी 2024 को शुरू हुआ था, जब शिकायतकर्ता ने बुटीक के एक यूट्यूब वीडियो को देखने के बाद 25 रुपये प्रति पौधे की दर से 80 ऑर्किड पौधों का ऑर्डर दिया था। उन्होंने सात कार्य दिवसों के भीतर डिलीवरी के वादे पर कुल 2,105 रुपये का ऑनलाइन भुगतान किया, लेकिन पौधे कभी नहीं पहुंचे।

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एक हफ्ते बाद संपर्क करने पर बुटीक के प्रतिनिधियों ने हड़ताल का बहाना बनाकर जल्द से जल्द डिलीवरी देने का वादा किया। इसके बाद बुटीक ने स्टॉक खत्म होने की बात कहते हुए रिफंड के लिए ग्राहक से बैंक डिटेल्स (गूगल पे विवरण) मांगी, जो उन्होंने तुरंत दे दीं।

बार-बार वादे तोड़ना और रिफंड से मुकरना

हालांकि, बुटीक ने रिफंड करने के बजाय दोबारा संदेश भेजकर बताया कि नया स्टॉक जल्द आ रहा है और उन्हें 2 अप्रैल 2024 को पौधे भेज दिए जाएंगे। शिकायतकर्ता ने पौधों के लिए पहले ही गमले खरीद लिए थे, इसलिए वह रिफंड लेने के बजाय इंतजार करने को तैयार हो गईं। लेकिन 2 अप्रैल को भी डिलीवरी नहीं मिली। बार-बार संपर्क करने के बावजूद बुटीक ने न तो पौधे भेजे और न ही रिफंड किया। इसके बाद बुटीक ने उनके संदेशों का जवाब देना भी बंद कर दिया।

दाम बढ़ाकर बेचने और सूची से नाम हटाने का आरोप

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अक्टूबर में शिकायतकर्ता को पता चला कि बुटीक ने एक नए नंबर के साथ यूट्यूब पर वही ऑर्किड पौधे 50 रुपये प्रति पौधे की बढ़ी हुई दर पर बेचने शुरू कर दिए हैं। संपर्क करने पर 25 अक्टूबर को बुटीक उनकी पुरानी बुकिंग दर (25 रुपये) पर ही पौधे देने को तैयार हो गया।

नवंबर में बुटीक ने सोशल मीडिया पर उन ग्राहकों की एक सूची जारी की जिनके ऑर्डर लंबित थे। इस सूची में शिकायतकर्ता का नाम तो था, लेकिन उनके पौधों की संख्या 80 के बजाय केवल 40 दिखाई गई थी। दिसंबर में जारी की गई नई सूची से उनका नाम पूरी तरह गायब कर दिया गया और बुटीक ने उनकी कॉल और संदेशों का जवाब देना बंद कर दिया।

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सुनवाई के दौरान कोर्ट में पेश नहीं हुआ बुटीक

उपभोक्ता आयोग ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि बुटीक को नोटिस भेजा गया था, लेकिन वह न तो खुद पेश हुआ और न ही उसने अपनी ओर से कोई जवाब दाखिल किया। चूंकि बुटीक ने इन आरोपों को कोई चुनौती नहीं दी, इसलिए अदालत ने शिकायतकर्ता के सबूतों को सही माना और बुटीक को मानसिक परेशानी और वित्तीय नुकसान पहुंचाने के लिए उत्तरदायी ठहराया।

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