पक्षकारों की व्यक्तिगत पेशी वाले मामलों की लाइव स्ट्रीमिंग नहीं होगी, सुप्रीम कोर्ट ने बनाया नया प्रोटोकॉल

सुप्रीम कोर्ट की फुल कोर्ट ने उन मामलों के लिए नया प्रोटोकॉल मंजूर किया है, जिनमें याचिकाकर्ता स्वयं अदालत में उपस्थित होकर अपनी पैरवी करते हैं। नए निर्णय के तहत ऐसे मामलों की सुनवाई की न तो लाइव स्ट्रीमिंग की जाएगी और न ही उसकी रिकॉर्डिंग की अनुमति होगी।

बुधवार को हुई फुल कोर्ट की बैठक में यह फैसला लिया गया। नए प्रोटोकॉल के अनुसार, स्वयं पैरवी करने के इच्छुक याचिकाकर्ताओं को वर्चुअल माध्यम से पेश होने का विकल्प दिया जाएगा। यदि कोई याचिकाकर्ता व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होकर बहस करने पर जोर देता है, तो उस पर निर्धारित शर्तें लागू होंगी।

कोर्टरूम में हुए हंगामे के बाद लिया गया फैसला

यह निर्णय 10 जुलाई को हुई उस घटना के कुछ दिनों बाद आया है, जब न्यायमूर्ति के. वी. विश्वनाथन और न्यायमूर्ति आलोक आराधे की पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता प्रबल प्रताप ने अदालत में हंगामा किया था। उसने न्यायाधीशों पर चिल्लाते हुए कागजात फेंके और भारत के मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया, जिसके बाद सुरक्षा कर्मियों ने उसे अदालत कक्ष से बाहर कर दिया।

हालांकि, पीठ ने उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करने का निर्णय लिया। अपने आदेश में अदालत ने कहा था कि याचिकाकर्ता ने अपने मामले पर बहस करने के बजाय असंगत और असंसदीय टिप्पणियां कीं। अदालत ने उसकी स्थिति को देखते हुए उसके विरुद्ध कोई कार्रवाई न करने का फैसला किया।

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इस घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किए गए थे।

लंबित मामलों के निस्तारण के लिए भी फैसले

फुल कोर्ट ने यह भी निर्णय लिया कि सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश वर्तमान में आयोजित किए जा रहे ‘समाधान समारोह’ में भाग लेंगे। इसका समापन 21, 22 और 23 अगस्त को आयोजित विशेष लोक अदालत के साथ होगा।

लंबित मामलों का बोझ कम करने के उद्देश्य से अदालत ने लगभग 100 ऐसे समूहबद्ध मामलों को प्राथमिकता के आधार पर अंतिम सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्णय लिया है, जो सुनवाई के लिए तैयार हैं। सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, इन मामलों के निस्तारण से 9,177 मामलों का निपटारा होने की उम्मीद है। इन सभी मामलों को उपयुक्त पीठों के समक्ष सामान्य क्रम से हटकर सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा।

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इन मामलों के निस्तारण के बाद नोटिस जारी होने के बाद से लंबित सबसे पुराने मामलों की सुनवाई मंगलवार, बुधवार और गुरुवार को की जाएगी।

कॉज लिस्ट को सरल बनाने के लिए बनेगी समिति

फुल कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट की कॉज लिस्ट को सरल बनाने और मामलों की सुनवाई की प्रक्रिया में एकरूपता लाने का भी निर्णय लिया। इसके लिए न्यायाधीशों की एक समिति गठित की जाएगी, जो मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा कर अपनी सिफारिशें देगी।

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