पवन खेड़ा पहुंचे सुप्रीम कोर्ट: गुवाहाटी हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत खारिज होने के बाद दायर की याचिका

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा ने गुवाहाटी हाईकोर्ट के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें उनकी अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया गया था। यह कानूनी विवाद असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी, रिनिकी भुइयां शर्मा द्वारा दर्ज कराए गए आपराधिक मामलों से जुड़ा है। यह मामले खेड़ा द्वारा उनके विदेशी पासपोर्ट और संपत्तियों को लेकर लगाए गए आरोपों के बाद दर्ज किए गए थे।

पूरा मामला पवन खेड़ा के उन बयानों से शुरू हुआ था, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि रिनिकी भुइयां शर्मा के पास एक से अधिक पासपोर्ट और विदेशों में अघोषित संपत्तियां हैं। इन आरोपों के बाद, गुवाहाटी क्राइम ब्रांच पुलिस स्टेशन में उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया।

इस मामले की कानूनी कार्यवाही अब तक कई अदालतों से होकर गुजरी है। शुरुआत में, तेलंगाना हाईकोर्ट ने पवन खेड़ा को सात दिनों की ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी थी, लेकिन असम पुलिस ने तुरंत इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी थी।

पिछले दौर की सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना हाईकोर्ट द्वारा दी गई ट्रांजिट जमानत पर रोक लगा दी थी। उस समय, शीर्ष अदालत ने खेड़ा को संबंधित क्षेत्राधिकार वाले गुवाहाटी हाईकोर्ट का रुख करने का निर्देश दिया था।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए खेड़ा ने गुवाहाटी हाईकोर्ट में याचिका दायर की। हालांकि, 24 अप्रैल को जस्टिस पार्थिव ज्योति सैकिया ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका को नामंजूर कर दिया। हाईकोर्ट से राहत न मिलने के बाद अब पवन खेड़ा ने एक बार फिर गिरफ्तारी से बचने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

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सुप्रीम कोर्ट की केस स्टेटस रिपोर्ट के अनुसार, गुवाहाटी हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ खेड़ा की याचिका दायर हो चुकी है, लेकिन फिलहाल इसे किसी पीठ (बेंच) को आवंटित नहीं किया गया है। याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट के फैसले को रद्द करने की मांग की है और तर्क दिया है कि असम अधिकारियों द्वारा की जा रही जांच के बीच उन्हें गिरफ्तारी से पूर्व जमानत की आवश्यकता है।

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