अदालती आदेशों की अनदेखी पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त: यूपी के गृह सचिव को कारण बताओ नोटिस, मुख्य सचिव से भी मांगा जवाब

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने संपत्ति हड़पने के एक मामले में पुलिस जांच की बेहद धीमी प्रगति और अदालती आदेशों की अनदेखी पर बेहद कड़ा रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा है कि न्यायिक निर्देशों की अवहेलना करने के लिए उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की सिफारिश क्यों न की जाए।

जस्टिस अब्दुल मोइन और जस्टिस प्रमोद कुमार श्रीवास्तव की पीठ ने इस मामले में अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद और राज्य के मुख्य सचिव दोनों को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने चेतावनी दी कि यदि दोनों अधिकारियों ने समय पर हलफनामा दाखिल नहीं किया, तो उन्हें आगामी 15 जुलाई को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट के समक्ष पेश होना होगा। हाईकोर्ट का यह आदेश 20 मई को पारित किया गया था, जिसे रविवार (7 जून) को अदालत की वेबसाइट पर अपलोड किया गया।

यह पूरा मामला गायत्री देवी द्वारा दायर एक आपराधिक रिट याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया। याचिकाकर्ता ने लखनऊ के पीजीआई थाने में 9 जनवरी 2025 को दर्ज कराई गई एक एफआईआर की निष्पक्ष और प्रभावी जांच की मांग की है। दर्ज मामले में अमानत में खयानत, धोखाधड़ी और बेईमानी से संपत्ति हड़पने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

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जांच की बेहद धीमी गति पर नाराजगी

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पुलिस जांच की लचर रफ्तार पर गंभीर असंतोष व्यक्त किया। अदालत ने रेखांकित किया कि पिछले अदालती निर्देशों और जांच अधिकारियों के बार-बार दिए गए आश्वासनों के बावजूद, एक साल से अधिक समय बीत जाने पर भी जांच में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है। पीठ ने इस बात पर भी चिंता जताई कि मामले के चार नामजद आरोपियों में से अब तक किसी की भी गिरफ्तारी नहीं हो सकी है, जबकि कोर्ट ने 13 अप्रैल और 29 अप्रैल के अपने पिछले आदेशों में भी इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया था।

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अदालती आदेशों के प्रति लापरवाही पर तीखी टिप्पणी

हाईकोर्ट ने अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद द्वारा 20 मई को दाखिल किए गए व्यक्तिगत हलफनामे में कई विसंगतियां पाईं। पीठ ने कहा कि गृह सचिव का आचरण प्रथम दृष्टया यह दर्शाता है कि उन्हें अदालती आदेशों की कोई परवाह नहीं है। अदालत ने बेहद सख्त लहजे में टिप्पणी की कि जब हाईकोर्ट द्वारा सीधे मॉनिटर किए जा रहे किसी मामले को प्रशासन इस कदर लापरवाही से संभाल रहा है, तो राज्य में चल रहीं उन तमाम सामान्य पुलिस जांचों की स्थिति क्या होगी जिनकी कोई अदालती निगरानी नहीं हो रही है, इसका आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है।

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मुख्य सचिव और विशेष सचिव से जवाब तलब

हाईकोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि वह पूर्व के आदेशों में बताई गई कमियों को दूर करें और इस पूरे मामले पर सरकार का आधिकारिक रुख स्पष्ट करें।

इसके साथ ही, अदालत ने विशेष सचिव महेंद्र सिंह द्वारा दिए गए एक अनधिकृत निर्देश पर भी स्पष्टीकरण मांगा है। दरअसल, विशेष सचिव ने बिना किसी न्यायिक आदेश के ही डीसीपी (दक्षिण) अमित कुमार आनंद को अपनी सरकारी ड्यूटी छोड़कर अदालत की कार्यवाही में शामिल होने का निर्देश दे दिया था। कोर्ट ने पूछा है कि विशेष सचिव ने आखिरकार किसके आदेश पर पुलिस अधिकारी को ऐसा निर्देश जारी किया था।

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