पसंद की शादी करने पर परिवार ने बनाया बंधक, उत्तराखंड हाईकोर्ट ने युवती को तुरंत रिहा करने का दिया आदेश

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने अपनी पसंद के व्यक्ति से शादी करने की इच्छा रखने वाली एक 23 वर्षीय युवती को उसके परिवार की अवैध हिरासत से तुरंत रिहा करने का निर्देश दिया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि एक बालिग महिला को उसकी मर्जी के विरुद्ध बंधक नहीं बनाया जा सकता और न ही उसे किसी ऐसे व्यक्ति से शादी करने के लिए मजबूर किया जा सकता है जिसे वह पसंद नहीं करती। जस्टिस रवींद्र मैथानी और जस्टिस सिद्धार्थ साह की बेंच ने युवती और उसके साथी की जान को खतरा देखते हुए पुलिस को दोनों को पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराने का भी निर्देश दिया है।

यह आदेश हाईकोर्ट ने युवती की ओर से दायर की गई याचिका पर सुनवाई करते हुए 15 जुलाई को जारी किया। बेंच ने अपने फैसले में कहा कि चूंकि महिला बालिग है, इसलिए उसे अपनी मर्जी से जीवन जीने का पूरा अधिकार है और अदालत के पास उसे स्वतंत्र करने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता की इस आशंका को गंभीरता से लिया कि उसके परिवार के सदस्य उसे या उसके साथी को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

मारपीट और जान से मारने की धमकी के आरोप

सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष उपस्थित हुई युवती ने बताया कि वह विज्ञान स्नातक (रसायन शास्त्र, वनस्पति विज्ञान और जंतु विज्ञान) है और उसने साल 2023 में अपनी पढ़ाई पूरी की है। उसका जन्म साल 2003 में हुआ था। उसके चार भाई-बहन हैं और उसके पिता वेल्डिंग का व्यवसाय करते हैं।

युवती ने अदालत को बताया कि वह अपने एक मित्र से शादी करना चाहती है जो पेशे से ड्राइवर है और उसके पास खुद की कार है। लेकिन उसके चाचा इस रिश्ते के खिलाफ थे और उस पर किसी दूसरे व्यक्ति से शादी करने का दबाव बना रहे थे। युवती का आरोप है कि विरोध करने पर उसके चाचा और चाची ने उसे पिछले दो महीनों से घर में कैद कर रखा था और उसके साथ बेरहमी से मारपीट की। चाचा ने कथित तौर पर धमकी दी थी कि अगर उसने अपनी मर्जी से शादी की, तो वे दोनों को मार डालेंगे; भले ही इसके लिए उन्हें जेल जाना पड़े और पैसे खर्च करने पड़ें।

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मेडिकल जांच के निर्देश और चोट के निशान

युवती द्वारा मारपीट के आरोपों की पुष्टि के लिए अदालत के निर्देश पर एक महिला पुलिस कांस्टेबल ने उसकी निजी जांच की। कांस्टेबल ने अदालत को बताया कि युवती के शरीर पर पुराने जख्मों के निशान मौजूद हैं। इस रिपोर्ट का संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने युवती की औपचारिक मेडिकल जांच कराने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने राज्य सरकार के वकील के माध्यम से इस मेडिकल रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर पेश करने को कहा है।

बचाव पक्ष की दलीलें

दूसरी ओर, युवती के चाचा का पक्ष रख रहे अधिवक्ता विवेक वर्मा ने अदालत में दलील दी कि परिवार ने पिछले 22-23 वर्षों से युवती का पालन-पोषण किया है और वे केवल उसकी भलाई के लिए कदम उठा रहे थे। हालांकि वकील ने स्वीकार किया कि युवती बालिग है और उसका जन्म 2003 में हुआ था, लेकिन उन्होंने मारपीट और प्रताड़ना के आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया।

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जब हाईकोर्ट ने बचाव पक्ष के वकील से पूछा कि एक बालिग युवती को उसकी मर्जी के खिलाफ कैसे रोका जा सकता है, तो अधिवक्ता विवेक वर्मा ने कहा कि परिवार अब युवती को उसकी मर्जी के अनुसार शादी करने की अनुमति देने के लिए तैयार है।

इस मामले में याचिकाकर्ता युवती का प्रतिनिधित्व अधिवक्ता गौरव सिंह ने किया, जबकि राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता जे.एस. विर्क अदालत में पेश हुए।

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