150 साल पुराने स्कूल और चर्च को हाईकोर्ट से अंतरिम राहत, 20 जुलाई तक यथास्थिति बनाए रखने का आदेश

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने रविवार को एक विशेष सुनवाई करते हुए सीतापुर के करीब 150 साल पुराने मेथोडिस्ट मिशन गर्ल्स जूनियर हाई स्कूल को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने विवादित परिसर में 20 जुलाई तक किसी भी तरह के ध्वस्तीकरण या बदलाव पर रोक लगाते हुए यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है।

जस्टिस आलोक माथुर और जस्टिस अमिताभ कुमार राय की पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया कि विवादित भूमि के भौतिक स्वरूप में कोई बदलाव न किया जाए। इसके साथ ही कोर्ट ने इस मामले को अगली सुनवाई की तारीख, यानी 20 जुलाई को शीर्ष 10 मुकदमों की सूची में शामिल करने का निर्देश भी दिया है।

गंभीर खतरे को देखते हुए रविवार को हुई विशेष सुनवाई

स्कूल प्रबंधन की ओर से अदालत से तत्काल हस्तक्षेप की गुहार लगाई गई थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि इस परिसर में स्कूल के साथ-साथ एक सक्रिय चर्च भी स्थित है और प्रशासन द्वारा इन दोनों को ही ढहाए जाने का तत्काल खतरा बना हुआ है। इसी तात्कालिकता को देखते हुए हाईकोर्ट ने छुट्टी के दिन आपातकालीन सुनवाई का निर्णय लिया।

सवा सौ हेक्टेयर से अधिक जमीन के मालिकाना हक का विवाद

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यह पूरा विवाद सीतापुर के खैराबाद परगना स्थित छावनी कदीम गांव की 3.562 हेक्टेयर जमीन से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, उनके पूर्वजों ने यह जमीन साल 1862 में खरीदी थी और तभी से इस परिसर में स्कूल तथा चर्च लगातार संचालित हो रहे हैं। याचिका में आरोप लगाया गया है कि सरकारी अभिलेखों में इस भूखंड को गलत तरीके से ‘नजूल’ यानी सरकारी भूमि के रूप में दर्ज कर दिया गया है।

सरकारी कार्रवाई स्कूल और चर्च के हिस्सों पर नहीं: राज्य सरकार

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दूसरी ओर, राज्य सरकार ने अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया कि सीतापुर के जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) द्वारा 24 जून 2026 को जारी किया गया आदेश स्कूल और चर्च वाले हिस्से को प्रभावित नहीं करता है। सरकारी प्रतिनिधि ने दलील दी कि प्रशासन की ध्वस्तीकरण की कार्रवाई केवल उन्हीं अन्य हिस्सों तक सीमित थी जहां अतिक्रमण किया गया था।

इसके साथ ही, सरकार ने कोर्ट को यह जानकारी भी दी कि 10 जुलाई 2026 को की गई ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के बाद, खाली कराई गई जमीन के एक हिस्से का कब्जा सीतापुर नगर पालिका परिषद को सौंपा जा चुका है।

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दोनों पक्षों को सुनने के बाद, हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि संपत्ति की वर्तमान स्थिति को पूरी तरह सुरक्षित रखा जाए और अगली सुनवाई तक इसमें कोई बदलाव न किया जाए।

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