उत्तर-पूर्वी दिल्ली के भजनपुरा इलाके में साल 2020 में हुए एक सड़क हादसे में जान गंवाने वाले एक अखबार वितरक के परिवार को दिल्ली मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT) ने बड़ी राहत दी है। ट्रिब्यूनल ने बीमा कंपनी को आदेश दिया है कि वह पीड़ित परिवार को 30.45 लाख रुपये का मुआवजा दे। यह हादसा तब हुआ था जब गलत दिशा से आ रहे एक तेज रफ्तार ट्रैक्टर ने साइकिल सवार अखबार वितरक को टक्कर मार दी थी।
ट्रिब्यूनल के पीठासीन अधिकारी मनीष शर्मा ने मैग्मा एचडीआई जनरल इंश्योरेंस कंपनी को निर्देश दिया है कि वह मुआवजे की इस रकम का भुगतान नौ प्रतिशत सालाना ब्याज के साथ 30 दिनों के भीतर करे। अदालत ने 3 जुलाई को दिए अपने फैसले में ट्रैक्टर चालक को गंभीर लापरवाही और कोताही बरतने का दोषी माना है।
गलत दिशा से आ रहे ट्रैक्टर ने ली थी जान
यह दुर्घटना 19 मई 2020 को हुई थी। उस समय 42 वर्षीय उमेश चंद शुक्ला उत्तर-पूर्वी दिल्ली के भजनपुरा इलाके में वजीराबाद रोड पर अपनी साइकिल से अखबार बांट रहे थे। इसी दौरान गलत दिशा से बेहद तेज रफ्तार में आ रहे एक ट्रैक्टर ने उन्हें टक्कर मार दी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। बाद में अस्पताल में इलाज के दौरान उमेश ने दम तोड़ दिया।
न्यायाधिकरण ने एक चश्मदीद गवाह के बयान पर भरोसा करते हुए यह माना कि हादसा ट्रैक्टर चालक की लापरवाही और तेज ड्राइविंग के कारण हुआ था। इसके साथ ही, अदालत ने ट्रैक्टर के चालक और मालिक के खिलाफ प्रतिकूल निष्कर्ष निकाला क्योंकि वे मामले की अदालती कार्यवाही में शामिल नहीं हुए और न ही उन्होंने चश्मदीद गवाह की बातों को चुनौती दी।
बीमा कंपनी की दलील खारिज, लेकिन मिला वसूली का अधिकार
सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी मैग्मा एचडीआई ने मुआवजे की देनदारी से बचने के लिए तर्क दिया कि हादसा ट्रैक्टर के पीछे जुड़ी एक ट्रॉली की वजह से हुआ था, जिसका बीमा नहीं कराया गया था। हालांकि, न्यायाधिकरण ने इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि सभी सबूतों से साफ है कि उमेश को सीधे ट्रैक्टर ने ही टक्कर मारी थी।
इसके साथ ही, अदालत ने बीमा कंपनी को रिकवरी राइट्स यानी वसूली का अधिकार भी दिया। इसके तहत कंपनी पहले पीड़ित परिवार को मुआवजे का भुगतान करेगी और बाद में यह पूरी रकम ट्रैक्टर मालिक और चालक से वसूल सकेगी। अदालत ने यह फैसला इसलिए लिया क्योंकि हादसे के समय ट्रैक्टर चालक के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था।
न्यूनतम मजदूरी के आधार पर हुआ मुआवजे का फैसला
उमेश के परिवार ने अदालत में दावा किया था कि वह हर महीने 25,000 रुपये कमाते थे। हालांकि, वे इस आय से जुड़ा कोई पुख्ता दस्तावेजी सबूत पेश नहीं कर सके। इस वजह से न्यायाधिकरण ने कुशल मजदूरों के लिए तय न्यूनतम मजदूरी के सरकारी नियमों के आधार पर उमेश की मासिक आय 17,991 रुपये तय की।
इस आधार पर भविष्य की संभावनाओं, अंतिम संस्कार के खर्च, कंसोर्टियम (पारिवारिक साथ की हानि) और संपत्ति के नुकसान जैसी कानूनी श्रेणियों के तहत मिलने वाले पैसों को जोड़कर कुल 30.45 लाख रुपये का मुआवजा तय किया गया।

