गोवा में मोरमुगाओ पोर्ट अथॉरिटी की जमीन पर स्थापित छत्रपति शिवाजी महाराज की मूर्ति को हटाने का रास्ता साफ हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के उस फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है, जिसमें इस प्रतिमा को गैरकानूनी घोषित कर हटाने का आदेश दिया गया था। शीर्ष अदालत के रुख को भांपते हुए याचिकाकर्ताओं ने अपनी चुनौती याचिका वापस ले ली है।
जस्टिस एम. एम. सुंदरेश और जस्टिस शील नागू की दो सदस्यीय पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता राजेंद्र लक्ष्मण परब और अन्य ने अपनी विशेष अनुमति याचिका (SLP) वापस लेने का फैसला किया, जिसे कोर्ट ने मंजूर कर लिया।
विवाद की पृष्ठभूमि
यह पूरा मामला बॉम्बे हाईकोर्ट के 7 अप्रैल के उस फैसले से जुड़ा है, जिसमें कोर्ट ने मराठा साम्राज्य के शासक छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा को हटाने का निर्देश दिया था। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया था कि इस मूर्ति का निर्माण पूरी तरह गैरकानूनी ढंग से और स्थानीय कानूनों का उल्लंघन करके किया गया है। यह विवादित मूर्ति गोवा में मोरमुगाओ पोर्ट अथॉरिटी की जमीन पर बनी हुई है।
आगे का कानूनी विकल्प
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकील को केस वापस लेने की अनुमति दे दी और इस याचिका को खारिज कर दिया। हालांकि, अदालत ने याचिकाकर्ताओं को यह राहत जरूर दी है कि वे चाहें तो मूल आदेश में बदलाव या संशोधन के लिए दोबारा बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं और वहां एक नई याचिका दायर कर सकते हैं।

