मात्र 560 रुपये के संदिग्ध लेनदेन के लिए पूरा बैंक खाता फ्रीज करना गलत, राजस्थान हाईकोर्ट ने एसबीआई को तुरंत राहत देने का निर्देश दिया

राजस्थान हाईकोर्ट ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) को एक महिला का बचत खाता तुरंत बहाल करने का निर्देश दिया है। इस खाते को जांचकर्ताओं ने केवल 560 रुपये के एक संदिग्ध लेनदेन के आरोप में पूरी तरह से ब्लॉक (फ्रीज) कर दिया था। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि इतनी छोटी सी रकम को सुरक्षित करने के लिए किसी का पूरा बैंक खाता बंद कर देना एक अत्यधिक और असंगत कदम है।

जयपुर की रहने वाली 35 वर्षीय जीनत बानो के पक्ष में फैसला सुनाते हुए जस्टिस आनंद शर्मा ने बैंक को निर्देश दिया कि वे उनके खाते पर लगा पूर्ण प्रतिबंध तुरंत हटाएं। कोर्ट ने कहा कि बैंक केवल विवादित 560 रुपये की राशि पर रोक लगा सकता है, जबकि बाकी रकम के लेनदेन के लिए खाताधारक को सामान्य रूप से संचालन की अनुमति दी जानी चाहिए।

जीनत बानो ने अपने बैंक खाते तक पहुंच बंद होने के बाद एसबीआई और राजस्थान साइबर क्राइम के डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल (डीआईजी) के खिलाफ हाईकोर्ट का रुख किया था। याचिका में उन्होंने कहा था कि उन्हें इस मामले में न तो कोई एफआईआर (FIR) सौंपी गई और न ही किसी कानूनी कार्रवाई की पूर्व सूचना दी गई। बैंक अधिकारियों से संपर्क करने पर भी जब कोई समाधान नहीं निकला, तो उन्हें अदालत की शरण लेनी पड़ी।

जांच और अधिकारों के बीच संतुलन

राज्य सरकार के प्रतिनिधियों ने अदालत में इस कार्रवाई का बचाव किया। उनका तर्क था कि साइबर और आर्थिक अपराधों में पैसे का ट्रांसफर बहुत तेजी से होता है, इसलिए जांच को प्रभावी बनाने के लिए तुरंत ऐसे एहतियाती कदम उठाना जरूरी होता है।

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हालांकि, हाईकोर्ट ने इस दलील को खारिज कर दिया। जस्टिस शर्मा ने कहा कि जांच एजेंसियों के पास बैंक खातों को फ्रीज करने का अधिकार जरूर है, लेकिन यह असीमित या निरंकुश नहीं है। जांच एजेंसियों को किसी भी खाते को फ्रीज करने से पहले यह ठोस सबूत दिखाना होगा कि उस खाते का संदिग्ध अपराध से सीधा संबंध है। कोर्ट ने जोर देकर कहा कि जांच की प्रक्रिया को किसी व्यक्ति के लिए दोष सिद्ध होने से पहले सजा का जरिया नहीं बनाया जा सकता।

रोजी-रोटी पर पड़ता है सीधा असर

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अदालत ने अपने 30 जून के आदेश में टिप्पणी की कि आज के समय में बैंक खाता केवल पैसे जमा रखने की जगह नहीं है, बल्कि यह किसी भी व्यक्ति के वित्तीय अस्तित्व की जीवनरेखा है। इसके जरिए ही लोग अपनी रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करते हैं, वेतन पाते हैं, व्यापार चलाते हैं और अनुबंधों का भुगतान करते हैं। जस्टिस शर्मा ने सचेत किया कि पूरे खाते को ब्लॉक करने से गंभीर नागरिक और वित्तीय नुकसान होते हैं, जिससे न केवल खाताधारक बल्कि उन पर निर्भर लोगों का जीवन भी प्रभावित होता है।

अदालत की शर्तें और निर्देश

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हाईकोर्ट ने जीनत बानो को निर्देश दिया है कि वह जारी जांच में सहयोग करेंगी और बिना पूर्व अनुमति के अपना खाता बंद नहीं करेंगी। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि इस फैसले का मुख्य साइबर अपराध की जांच की योग्यता (मेरिट्स) पर कोई असर नहीं पड़ेगा और जांच एजेंसी कानून के तहत अपनी कार्यवाही जारी रखने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है।

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