उपभोक्ता का पैसा दबाने पर अमेज़न को फटकार, रिफंड के साथ हर्जाना भरने का अदालती आदेश

आंध्र प्रदेश के एक जिला उपभोक्ता आयोग ने अमेज़न रिटेल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को आदेश दिया है कि वह एक ग्राहक को खराब इयरबड्स के पूरे पैसे लौटाए और मानसिक परेशानी व अदालती खर्च के लिए हर्जाना भरे। आयोग ने साफ किया कि ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म किसी निर्माता कंपनी से मिले ग्राहक के रिफंड को अपने पास रोककर नहीं रख सकते और ग्राहकों को बार-बार चक्कर लगाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।

विजयनगरम जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने अमेज़न को पीड़ित ग्राहक को इयरबड्स की मूल कीमत के रूप में 5,199 रुपये वापस करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा, ग्राहक को मानसिक प्रताड़ना के लिए 5,000 रुपये का मुआवजा और मुकदमेबाजी के खर्च के रूप में 5,000 रुपये का भुगतान करने को कहा गया है। ई-कॉमर्स दिग्गज को इस आदेश का पालन करने के लिए 45 दिनों का समय दिया गया है।

वारंटी दावों के बीच फंसा रिफंड

यह पूरा मामला विजयनगरम के रहने वाले इज्जादा विवेकानंद की शिकायत से जुड़ा है। उन्होंने 18 जनवरी 2024 को अमेज़न से 5,199 रुपये में ‘इयरफन एयर प्रो 3 नॉइज़ कैंसिलेशन इयरबड्स’ खरीदे थे। इस उत्पाद पर निर्माता कंपनी इयरफन टेक्नोलॉजी (एचके) लिमिटेड, हांगकांग की ओर से 18 महीने की वारंटी दी गई थी।

इयरबड्स में ब्लूटूथ कनेक्टिविटी की समस्या आने पर जब ग्राहक ने संपर्क किया, तो कंपनी ने पहले वारंटी स्वीकार की। हालांकि, ऑनलाइन पोर्टल पर इसे ‘आउट ऑफ वारंटी’ दिखाया गया, लेकिन बाद में ईमेल के जरिए हुई बातचीत के बाद निर्माता कंपनी ने रिफंड मंजूर कर लिया। कंपनी ने रिप्लेसमेंट देने के बजाय 16 दिसंबर 2025 को पूरे 5,199 रुपये अमेज़न को ट्रांसफर कर दिए ताकि वे ग्राहक तक पहुंचाए जा सकें।

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अमेज़न की टालमटोल और पैसों में कटौती

निर्माता से पैसा मिलने के बावजूद अमेज़न ने उसे ग्राहक के खाते में जमा नहीं किया। कंपनी ने जनवरी 2026 में ग्राहक से बैंक खाते की जानकारी मांगी और जल्द ही भुगतान का भरोसा दिलाया। हालांकि, पैसे भेजने के बजाय कंपनी ने 29 जनवरी 2026 को एक ईमेल भेजकर कहा कि केवल 4,689.52 रुपये का रिफंड ही मंजूर हुआ है।

अमेज़न ने बिना कोई कारण बताए रिफंड की रकम में 500 रुपये से अधिक की कटौती कर दी, लेकिन यह घटी हुई राशि भी कभी नहीं भेजी गई। इसके बाद ग्राहक ने 18 फरवरी 2026 को कानूनी नोटिस भेजा, जिसे अमेज़न ने 23 फरवरी को प्राप्त तो किया पर कोई जवाब नहीं दिया। इसके विपरीत, मार्च में कंपनी ने रिफंड प्रक्रिया पूरी होने का झूठा दावा भी किया।

उपभोक्ता आयोग की सख्त टिप्पणी

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आयोग के अध्यक्ष आर वेंकट नागाभूषणम और सदस्य बी श्रीदेवी व अशोक कुमार शर्मा की पीठ ने मामले की सुनवाई की। नोटिस दिए जाने के बावजूद अमेज़न की ओर से कोई भी अदालत में पेश नहीं हुआ, जिसके चलते आयोग ने एकपक्षीय कार्यवाही की। आयोग ने दस्तावेजों की जांच के बाद पाया कि निर्माता कंपनी ने दिसंबर 2025 में ही अमेज़न को पूरा पैसा भेज दिया था। ऐसे में अमेज़न की यह कानूनी जिम्मेदारी थी कि वह तुरंत यह राशि ग्राहक को सौंपे।

आयोग ने अपने फैसले में कहा कि रिफंड रोकने, परस्पर विरोधी बयान देने और बिना किसी ठोस कारण के रिफंड की रकम को मनमाने ढंग से कम करना उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत ‘सेवा में कमी’ और ‘अनुचित व्यापार व्यवहार’ के दायरे में आता है। अदालत ने माना कि अमेज़न के इस अनुचित रवैये के कारण ग्राहक को भारी मानसिक तनाव और आर्थिक परेशानी झेलनी पड़ी।

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