रणवीर सिंह की फिल्म ‘धुरंधर’ पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, सेंसर बोर्ड और केंद्र सरकार को दिए समीक्षा के आदेश; राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है मामला

बॉलीवुड अभिनेता रणवीर सिंह की आगामी फिल्म ‘धुरंधर: द रिवेंज’ (Dhurandhar: The Revenge) कानूनी विवादों में घिर गई है। दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को केंद्र सरकार और केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) को इस फिल्म के खिलाफ दायर जनहित याचिका (PIL) पर गंभीरता से विचार करने और उचित कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। याचिका में आरोप लगाया गया है कि फिल्म में भारत की बेहद संवेदनशील सैन्य और खुफिया रणनीतियों को उजागर किया गया है, जिससे देश की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।

मुख्य न्यायाधीश डी. के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि एक सैन्य कर्मी द्वारा उठाए गए इन सुरक्षा सरोकारों को हल्के में नहीं लिया जा सकता। अदालत ने माना कि फिल्मों का समाज और देश की सुरक्षा पर गहरा असर पड़ता है।

सुनवाई के दौरान पीठ ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा, “सेंसर बोर्ड के पास कुछ ठोस दिशानिर्देश (गाइडलाइंस) होने चाहिए। हम चाहते हैं कि आप इस याचिका में उठाए गए मुद्दों पर विचार करें और एक सूचित निर्णय लें।”

‘सिर्फ मनोरंजन नहीं, देश की सुरक्षा का भी रखें ध्यान’ — हाईकोर्ट

कोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (I&B Ministry) और सेंसर बोर्ड को आदेश दिया कि वे इस याचिका को एक आधिकारिक प्रतिवेदन (Representation) के रूप में स्वीकार करें। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे फिल्म पर लगाए गए आरोपों की बारीकी से जांच करें, इस पर उचित फैसला लें और की गई किसी भी सुधारात्मक कार्रवाई के बारे में सीधे याचिकाकर्ता को सूचित करें।

अदालत ने स्पष्ट किया कि हालांकि फिल्में मनोरंजन के उद्देश्य से बनाई जाती हैं, लेकिन उनके वास्तविक और व्यावहारिक प्रभावों की अनदेखी नहीं की जा सकती।

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क्या हैं याचिकाकर्ता के गंभीर आरोप?

यह जनहित याचिका सशस्त्र सीमा बल (SSB) के एक सक्रिय जवान द्वारा दायर की गई है। याचिका में दावा किया गया है कि ‘धुरंधर: द रिवेंज’ सीधे तौर पर भारत के ‘ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट’ (Official Secrets Act) का उल्लंघन करती है।

याचिकाकर्ता ने फिल्म पर कई बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं:

  • सीक्रेट प्रोटोकॉल लीक करने का आरोप: फिल्म में भारतीय खुफिया एजेंटों के काम करने के बेहद गोपनीय तरीकों और उनके ‘डीप कवर’ पहचान (Secret Identities) को सार्वजनिक किया गया है।
  • शहीदों और सैन्य अधिकारियों की हूबहू नकल: फिल्म के पात्रों और उनकी भूमिकाओं को वास्तविक सैन्य अधिकारियों और देश के लिए शहीद हुए वीर जवानों की तर्ज पर बेहद स्पष्ट रूप से ढाला गया है।
  • वास्तविक ऑपरेशन्स का चित्रण: देश के कुछ बेहद सफल और गोपनीय सैन्य अभियानों को फिल्म में इस तरह दिखाया गया है जो देशहित में नहीं है।
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याचिका में एक चौंकाने वाला दावा यह भी किया गया है कि इस फिल्म के दृश्यों के कारण जमीनी स्तर पर काम कर रहे भारत के अंडरकवर एजेंटों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है और पड़ोसी देश पाकिस्तान के कराची में स्थानीय सुरक्षा एजेंसियां ‘जासूस अलर्ट’ (Spy Alert) पर आ गई हैं।

‘स्पाय मूवीज प्रोटोकॉल’ बनाने की उठी मांग

भविष्य में देश की खुफिया रणनीतियों को फिल्मों के जरिए उजागर होने से रोकने के लिए याचिकाकर्ता ने कोर्ट से एक विशेष ‘स्पाय मूवीज प्रोटोकॉल’ (Spy Movies Protocol) बनाने की मांग की है। इस प्रस्तावित प्रोटोकॉल के तहत फिल्म निर्माताओं पर देश के गुप्त एजेंटों की वास्तविक कार्यप्रणाली को पर्दे पर दिखाने पर प्रतिबंध लगाने की वकालत की गई है।

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इसके साथ ही, याचिका में ‘धुरंधर: द रिवेंज’ को सेंसर बोर्ड द्वारा दिए गए सर्टिफिकेट को तुरंत रद्द करने और थिएटरों के साथ-साथ सभी OTT प्लेटफॉर्म्स पर इसके प्रसारण पर तत्काल रोक लगाने की गुहार लगाई गई है। अब गेंद सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और सेंसर बोर्ड के पाले में है कि वे इन गंभीर सुरक्षा चिंताओं पर क्या रुख अपनाते हैं।

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