कर्नाटक हाईकोर्ट ने खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) द्वारा अश्वगंधा की पत्तियों और उनके अर्क (extracts) के इस्तेमाल पर लगाए गए प्रतिबंध पर अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत के इस फैसले से उन स्वास्थ्य सप्लीमेंट निर्माताओं को बड़ी राहत मिली है, जो पिछले कई दशकों से इस पौधे के विभिन्न हिस्सों का उपयोग कर रहे हैं।
मंगलवार को मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस एस आर कृष्ण कुमार की एकल पीठ ने 16 अप्रैल, 2026 को जारी FSSAI की उस एडवाइजरी पर स्टे लगा दिया, जिसमें सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए इसके उपयोग को प्रतिबंधित किया गया था। फिलहाल यह राहत याचिकाकर्ता कंपनियों—सामी-सबिंसा ग्रुप लिमिटेड (Sami-Sabinsa Group Ltd) और केरी इंक (Kerry Inc)—के लिए प्रभावी होगी।
विवाद की शुरुआत तब हुई जब केंद्रीय आयुष मंत्रालय ने अश्वगंधा की पत्तियों को लेकर स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं जताईं। मंत्रालय का दावा था कि इन पत्तियों में ‘विथफेरिन-ए’ (withaferin-A) जैसे तत्व उच्च मात्रा में होते हैं, जो लिवर को नुकसान पहुँचाने के साथ-साथ पेट की बीमारियों और नसों पर प्रतिकूल प्रभाव (neurotoxicity) डाल सकते हैं।
इसी आधार पर FSSAI ने एक एडवाइजरी जारी कर निर्माताओं, निर्यातकों और विक्रेताओं को निर्देश दिया था कि वे आयुष उत्पादों में अश्वगंधा की पत्तियों का इस्तेमाल तुरंत बंद कर दें।
अदालत में याचिकाकर्ताओं का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता के जी राघवन ने दलील दी कि सरकार का यह फैसला प्रक्रियात्मक रूप से गलत है। उन्होंने तर्क दिया कि:
- नियमों का उल्लंघन: अश्वगंधा की जड़ों और पत्तियों का उपयोग 2016 के खाद्य सुरक्षा और मानक (हेल्थ सप्लीमेंट्स) नियमों के तहत आता है। सरकार केवल एक ‘एडवाइजरी’ के जरिए इसे प्रतिबंधित नहीं कर सकती; इसके लिए मूल नियमों में संशोधन करना अनिवार्य है।
- अनुभव: कंपनियां पिछले 30 से अधिक वर्षों से सुरक्षित रूप से इन पत्तियों का उपयोग कर रही हैं।
- आर्थिक प्रभाव: अचानक लगाए गए इस प्रतिबंध से न्यूट्रास्यूटिकल उद्योग और संबंधित व्यवसायों को भारी वित्तीय नुकसान होगा।
अश्वगंधा को दुनिया भर में एक ‘एडेप्टोजेन’ (adaptogen) के रूप में जाना जाता है, जिसका उपयोग शारीरिक शक्ति और यौन स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए किया जाता है। जहां पारंपरिक रूप से इसकी जड़ों का उपयोग अधिक होता है, वहीं पत्तियों के उपयोग को लेकर अब नियामक और उद्योग जगत आमने-सामने हैं।
केंद्र सरकार और FSSAI के वकील ने अदालत से जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा है। कर्नाटक हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 8 जून को तय की है, जिसमें सरकार को अपनी सुरक्षा जांच की रिपोर्ट और कानूनी आधार पेश करने होंगे।

