पुलिस थानों में ‘तीसरी आंख’ की निगरानी: सुप्रीम कोर्ट ने सीसीटीवी इंस्टॉलेशन की प्रगति पर जताई संतुष्टि

देश के पुलिस थानों में पारदर्शिता और जवाबदेही तय करने की दिशा में भारत का उच्चतम न्यायालय एक अहम पड़ाव पर पहुंच गया है। बुधवार को एक महत्वपूर्ण सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के पुलिस स्टेशनों में सीसीटीवी कैमरे लगाने की प्रगति पर संतोष व्यक्त किया। अदालत ने कहा कि अधिकांश राज्य और केंद्र शासित प्रदेश (UTs) इस दिशा में “सही दिशा” में आगे बढ़ रहे हैं।

जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस विजय बिश्नोई की पीठ ने मामले की समीक्षा करते हुए स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार उन राज्यों के अनुरोधों पर विचार करेगी, जिन्होंने इस परियोजना के लिए आवंटित धन (फंड) के वितरण की मांग की है।

यह पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट द्वारा उन मीडिया रिपोर्टों पर लिए गए स्वतः संज्ञान (Suo Motu) से जुड़ा है, जिनमें पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरों के काम न करने का मुद्दा उठाया गया था। कोर्ट का मानना है कि पुलिस कस्टडी में मानवाधिकारों के उल्लंघन को रोकने के लिए सीसीटीवी एक अनिवार्य उपकरण है।

इस मामले में न्यायालय की सहायता कर रहे न्यायमित्र (अमिकस क्यूरी) और वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने अदालत को 6 मई को हुई एक उच्च स्तरीय बैठक की जानकारी दी। इस बैठक में केंद्र, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया था। दवे ने पीठ को बताया, “काम एक अच्छी दिशा में आगे बढ़ रहा है।” हालांकि, उन्होंने यह भी नोट किया कि कुछ स्थानीय और तकनीकी समस्याओं को सुलझाने के लिए जून या जुलाई में एक और बैठक की जाएगी। मामले की अगली सुनवाई अब 22 जुलाई के लिए तय की गई है।

सीसीटीवी परियोजना को जमीन पर उतारने के लिए केंद्र और राज्यों के बीच खर्च का बंटवारा एक निर्धारित मॉडल के तहत किया जा रहा है:

  • केंद्र शासित प्रदेश: पूरा 100% खर्च केंद्र सरकार द्वारा वहन किया जा रहा है।
  • पहाड़ी राज्य: यहाँ 90% फंड केंद्र दे रहा है, जबकि 10% राज्य को देना होगा।
  • अन्य राज्य: लागत का 60% हिस्सा केंद्र और 40% संबंधित राज्य सरकार द्वारा साझा किया जा रहा है।
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सुप्रीम कोर्ट के निर्देश केवल कैमरे लगाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनके लिए कड़े तकनीकी मानक भी तय किए गए हैं। 2018 के ऐतिहासिक आदेश और 2020 के विस्तार के बाद, अब इसमें सीबीआई (CBI), प्रवर्तन निदेशालय (ED) और एनआईए (NIA) जैसी केंद्रीय एजेंसियों के कार्यालय भी शामिल हैं।

कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार, पुलिस थानों के हर हिस्से में कवरेज अनिवार्य है, जिसमें शामिल हैं:

  • प्रवेश और निकास द्वार (Main Gates)।
  • लॉक-अप, कॉरिडोर, लॉबी और रिसेप्शन एरिया।
  • हवालात के ठीक बाहर का क्षेत्र।
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अदालत ने सख्त लहजे में कहा है कि ये सिस्टम ‘नाइट विजन’ (अंधेरे में देखने की क्षमता) और ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग से लैस होने चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि डेटा को कम से कम एक वर्ष तक सुरक्षित रखने की क्षमता होनी चाहिए, ताकि किसी भी शिकायत की स्थिति में सबूत उपलब्ध रहें।

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