‘यहाँ महाभारत भी छोटी लगेगी’: सोना ग्रुप के पारिवारिक विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणी

देश के प्रतिष्ठित औद्योगिक घरानों में से एक ‘सोना ग्रुप’ (Sona Group) के भीतर छिड़ी उत्तराधिकार की जंग अब एक नया मोड़ ले चुकी है। स्वर्गीय उद्योगपति संजय कपूर की वसीयत और करोड़ों की संपत्ति को लेकर चल रहे इस विवाद की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यहाँ तक कह दिया कि इस झगड़े के सामने “महाभारत भी बहुत छोटी लगेगी।”

न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुयान की पीठ ने यह टिप्पणी तब की, जब संजय कपूर की 80 वर्षीय मां, रानी कपूर ने अदालत से अपनी बहू प्रिया कपूर के खिलाफ तत्काल रोक लगाने की गुहार लगाई।

इस कानूनी लड़ाई के केंद्र में ‘आरके फैमिली ट्रस्ट’ (RK Family Trust) है। रानी कपूर का आरोप है कि साल 2017 में गठित यह ट्रस्ट पूरी तरह से “फर्जी, जाली और धोखाधड़ी” वाले दस्तावेजों पर आधारित है। अपनी ताज़ा अर्जी में उन्होंने आशंका जताई है कि जब तक विवाद का समाधान नहीं हो जाता, तब तक उनकी बहू प्रिया कपूर और अन्य लोग ट्रस्ट की संपत्तियों और कंपनियों पर कब्जा करने या उन्हें बेचने की कोशिश कर सकते हैं।

रानी कपूर का दावा है कि वह अपने दिवंगत पति और सोना ग्रुप के संस्थापक सुरिंदर कपूर की पूरी संपत्ति की एकमात्र लाभार्थी थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके बेटे संजय कपूर (जिनका पिछले साल इंग्लैंड में एक पोलो मैच के दौरान निधन हो गया था) और अन्य सहयोगियों ने मिलकर एक “जटिल और अवैध लेन-देन का जाल” बुना, जिससे उन्हें उनकी विरासत से बेदखल कर दिया गया।

सुप्रीम कोर्ट इस मामले को लंबी कानूनी प्रक्रिया में उलझने से बचाने की कोशिश कर रहा है। इसी कड़ी में 7 मई को पूर्व मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ को मध्यस्थ (Mediator) नियुक्त किया गया था। अदालत ने परिवार के सदस्यों को सख्त हिदायत दी थी कि वे इस निजी मामले को सार्वजनिक न करें और सोशल मीडिया पर किसी भी तरह की बयानबाजी से बचें। पीठ ने स्पष्ट किया कि यदि मध्यस्थता सफल नहीं होती, तो यह मामला दशकों तक खिंच सकता है जो किसी के हित में नहीं होगा।

सोना ग्रुप के साम्राज्य पर कब्जे की यह जंग सिर्फ सास और बहू के बीच तक सीमित नहीं है। दिल्ली हाई कोर्ट में भी एक समानांतर कानूनी मोर्चा खुला हुआ है। अभिनेत्री करिश्मा कपूर (संजय कपूर की पूर्व पत्नी) के दोनों बच्चों ने भी अपने पिता की वसीयत की प्रामाणिकता को चुनौती दी है। बच्चों ने अपनी सौतेली मां प्रिया कपूर पर “लालच” में आकर संपत्ति पर नियंत्रण करने का आरोप लगाया है।

फिलहाल, सभी की निगाहें 14 मई को होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं। सुप्रीम कोर्ट इस दिन तय करेगा कि क्या मध्यस्थता की कार्यवाही पूरी होने तक ‘आरके फैमिली ट्रस्ट’ के प्रबंधन पर कोई अस्थायी प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए या नहीं। मामले की अगली विस्तृत समीक्षा 6 अगस्त को निर्धारित की गई है।

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