‘देश प्रगति कैसे करेगा?’: विकास परियोजनाओं को रोकने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को देश भर में बड़ी विकास परियोजनाओं को रोकने के उद्देश्य से दायर की जाने वाली कानूनी याचिकाओं पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। कोर्ट ने ऐसी मुकदमेबाजी के राष्ट्रीय विकास पर पड़ने वाले प्रभाव पर सवाल उठाते हुए पूछा कि अगर हर परियोजना को कार्यकर्ताओं के व्यवस्थित कानूनी विरोध का सामना करना पड़ेगा, तो भारत से प्रगति की उम्मीद कैसे की जा सकती है।

यह टिप्पणियां मुख्य न्यायाधीश सूर्या कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT), वेस्टर्न ज़ोन के एक आदेश के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई के दौरान कीं। यह मामला गुजरात में पीपावाव पोर्ट के विस्तार और आधुनिकीकरण को दी गई चुनौती से जुड़ा था, जिसे पहले ही पर्यावरण और तटीय विनियमन क्षेत्र (CRZ) की मंजूरी मिल चुकी थी।

सुनवाई के दौरान, बेंच ने कुछ पर्यावरण कार्यकर्ताओं द्वारा अपनाए गए रुख पर कड़ा प्रहार किया।

बेंच ने कहा, “इस देश में, जिस तरह की याचिकाएं दायर की जा रही हैं, वे केवल विकास को रोकने के लिए हैं। यही समस्या है। देश प्रगति कैसे करने वाला है।” कोर्ट ने याचिकाकर्ता को चुनौती देते हुए यह भी पूछा कि क्या वे “देश में एक भी ऐसी परियोजना दिखा सकते हैं जहां इन तथाकथित पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने कहा हो कि हम इस परियोजना का स्वागत करते हैं।”

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हालांकि वह पर्यावरण संरक्षण को लेकर हमेशा गंभीर रहा है और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली किसी भी गतिविधि का विरोधी है, लेकिन संरक्षण और आवश्यकता के बीच एक संतुलन होना अनिवार्य है।

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बेंच ने रेखांकित किया कि किसी प्रस्तावित परियोजना के पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर नागरिकों के मन में वास्तविक आशंकाएं होना स्वाभाविक है, लेकिन इसकी प्रतिक्रिया हमेशा ‘सब कुछ रोक देने’ की मांग के रूप में नहीं होनी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि पर्यावरणविद या कार्यकर्ता परियोजनाओं को पूरी तरह से रद्द करने के बजाय ‘सस्टेनेबल डेवलपमेंट’ (टिकाऊ विकास) सुनिश्चित करने के उद्देश्य से “प्रभावी सुझावों” के साथ अदालत का रुख करें, तो इसकी सराहना की जाएगी। बेंच ने कहा कि विकास एक आवश्यकता है और कानूनी प्रयासों का उद्देश्य कभी भी केवल गतिरोध पैदा करना नहीं होना चाहिए।

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इससे पहले, NGT ने पीपावाव पोर्ट के आधुनिकीकरण के लिए दी गई मंजूरियों को रद्द करने की मांग वाली अपील को खारिज कर दिया था। मामले की समीक्षा करते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि NGT ने इस संबंध में एक “विस्तृत आदेश” दिया था।

हालांकि, सभी प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपायों को सुनिश्चित करने के लिए, सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को NGT के समक्ष पुनरीक्षण आवेदन (Review Application) दायर करने की स्वतंत्रता दी है। इस समीक्षा का उद्देश्य विशेष रूप से यह पता लगाना है कि क्या याचिकाकर्ता द्वारा उठाए गए बिंदुओं पर पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) रिपोर्ट में विधिवत विचार किया गया था या नहीं। कोर्ट ने NGT को इस विशिष्ट पहलू पर विचार करने का निर्देश दिया है।

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