‘घोटाले के भीतर घोटाला’: बॉम्बे हाईकोर्ट ने संपत्तियों के कम मूल्यांकन और धोखाधड़ी के आधार पर NSEL नीलामी रद्द की

बॉम्बे हाईकोर्ट ने प्राइमज़ोन डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड की संपत्तियों की नीलामी को रद्द कर दिया है, जिन्हें नेशनल स्पॉट एक्सचेंज लिमिटेड (NSEL) घोटाले के सिलसिले में कुर्क किया गया था। जस्टिस ए. एस. गडकरी और जस्टिस कमल खाता की खंडपीठ ने पाया कि महाराष्ट्र डिपॉजिटर्स के हितों का संरक्षण (वित्तीय प्रतिष्ठानों में) अधिनियम, 1999 (MPID एक्ट) के तहत की गई यह नीलामी प्रक्रिया “संदिग्ध परिस्थितियों” और “संपत्तियों के अत्यधिक कम मूल्यांकन” से भरी हुई थी। हाईकोर्ट ने वर्तमान सक्षम प्राधिकारी (Competent Authority) को हटाने का आदेश देते हुए राज्य सरकार को अधिकारियों और मूल्यांकनकर्ता (Valuer) की भूमिका की जांच करने का निर्देश दिया है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला हरियाणा के करनाल जिले के असंध स्थित सेक्टर 10 में प्राइमज़ोन डेवलपर्स की 35.768 एकड़ जमीन से जुड़ा है। इन संपत्तियों को उन आरोपों के बाद कुर्क किया गया था जिनमें कहा गया था कि 2012 में कंपनी का नियंत्रण लेने वाले संजीव अग्रवाल ने NSEL के क्लियरिंग मेंबर ‘पीडी एग्रो प्रोसेसर्स’ से ₹31 करोड़ की हेराफेरी की और उसे प्राइमज़ोन डेवलपर्स में निवेश किया।

NSEL घोटाले में 13,000 से अधिक निवेशकों को लगभग ₹5,600 करोड़ का नुकसान हुआ था। इसके बाद महाराष्ट्र सरकार ने MPID एक्ट की धारा 4 के तहत इन संपत्तियों को कुर्क किया और सक्षम प्राधिकारी ने निवेशकों का पैसा लौटाने के लिए इन्हें नीलाम करने की प्रक्रिया शुरू की।

पक्षों की दलीलें

प्राइमज़ोन डेवलपर्स (अपीलकर्ता) ने नीलामी को कई आधारों पर चुनौती दी, जिसमें उचित नोटिस की कमी, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के पास संपत्तियों का पहले से गिरवी होना और यह तथ्य शामिल था कि संपत्तियां संजीव अग्रवाल के आने से पहले निदेशकों की व्यक्तिगत आय से खरीदी गई थीं।

वहीं, सक्षम प्राधिकारी और महाराष्ट्र राज्य ने नीलामी का बचाव करते हुए कहा कि प्रक्रिया वैध थी और सफल बोलीदाता रुद्रवीर्या डेवलपर्स लिमिटेड को अगस्त 2020 में सेल सर्टिफिकेट जारी होने के बाद यह बिक्री अंतिम हो चुकी थी।

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यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि संपत्तियां उनके पास बैंक गारंटी के लिए गिरवी थीं और नीलामी में उनके सुरक्षित हितों की अनदेखी की गई। इसके अलावा, प्लॉट खरीदने वाले ग्राहकों ने तर्क दिया कि उन्होंने छोटी जमीनों के लिए ₹7 करोड़ से अधिक का भुगतान किया था, लेकिन नोटिसों के खराब प्रकाशन के कारण उन्हें नीलामी की जानकारी नहीं मिल सकी।

हाईकोर्ट का विश्लेषण

हाईकोर्ट ने मूल्यांकन रिपोर्टों और नीलामी प्रक्रिया की गहन जांच की। हाईकोर्ट ने क्विकर रियल्टी लिमिटेड (Quiker Realty Ltd.) द्वारा तैयार की गई दो मूल्यांकन रिपोर्टों में भारी अंतर पाया। मई 2018 में पहली रिपोर्ट में संपत्ति की कीमत ₹60 करोड़ आंकी गई थी, लेकिन जून 2020 की दूसरी रिपोर्ट में इसे “कृषि भूमि” बताकर मूल्य घटाकर केवल ₹10.41 करोड़ कर दिया गया।

हाईकोर्ट ने टिप्पणी की:

“हमारे लिए यह स्वीकार करना असंभव है कि जिस संपत्ति का मूल्य शुरू में ₹60 करोड़ आंका गया था, उसे लगभग 35 एकड़ क्षेत्र के लिए घटाकर ₹10 करोड़ कैसे किया जा सकता है।”

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हाईकोर्ट ने पाया कि सक्षम प्राधिकारी और मूल्यांकनकर्ता ने जानबूझकर संपत्ति का गलत विवरण दिया। यह भी देखा गया कि नीलामी के नोटिस उन समाचार पत्रों में प्रकाशित किए गए जिनका उस क्षेत्र में बहुत कम प्रसार था। हाईकोर्ट ने इसे “कोर्ट के साथ की गई धोखाधड़ी” करार दिया।

बोली प्रक्रिया के बारे में हाईकोर्ट ने पाया कि दो बोलीदाताओं का एक ही निदेशक था, जिससे यह संकेत मिलता है कि नीलामी प्रक्रिया रुद्रवीर्या डेवलपर्स लिमिटेड को लाभ पहुँचाने के लिए पहले से ही तय की गई थी।

धोखाधड़ी और ‘घोटाले के भीतर घोटाला’ पर निष्कर्ष

सक्षम प्राधिकारी और क्विकर रियल्टी के आचरण पर हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की:

“हमारे अनुसार, यह घोटाले के भीतर एक घोटाला है। इसमें सक्षम प्राधिकारी मुख्य रूप से जिम्मेदार हैं और क्विकर रियल्टी भी समान रूप से शामिल है। कम मूल्यांकन में सहायता करके और पूर्व-निर्धारित संस्थाओं को बिक्री की सुविधा देकर, उन्होंने निवेशकों को उनके पैसे की पूरी वसूली से वंचित कर दिया।”

हाईकोर्ट ने आगे कहा:

“सक्षम प्राधिकारी स्वयं घोटाले का हिस्सा बनकर राज्य और कोर्ट के साथ धोखाधड़ी नहीं कर सकता। ऐसा आचरण गंभीर निंदा का पात्र है।”

हाईकोर्ट का निर्णय

इन निष्कर्षों के आधार पर, हाईकोर्ट ने निम्नलिखित निर्देश दिए हैं:

  1. नीलामी रद्द: रुद्रवीर्या डेवलपर्स लिमिटेड के पक्ष में 31 अगस्त 2020 को जारी सेल सर्टिफिकेट रद्द किया जाता है।
  2. नया सक्षम प्राधिकारी: राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर एक नया सक्षम प्राधिकारी नियुक्त करने का निर्देश दिया जाता है।
  3. नया मूल्यांकन और ताज़ा नीलामी: नया प्राधिकारी एक अलग मूल्यांकनकर्ता नियुक्त करेगा और स्थानीय समाचार पत्रों एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में व्यापक प्रचार के साथ फिर से नीलामी आयोजित करेगा।
  4. मूल्यांकनकर्ता को अयोग्य घोषित करना: हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह क्विकर रियल्टी का अनुमोदन रद्द करे और उसे कम से कम पांच साल के लिए सरकारी मूल्यांकन करने से अयोग्य घोषित करे।
  5. जांच: राज्य सरकार को पिछले सक्षम प्राधिकारी के सदस्यों और मूल्यांकनकर्ता के खिलाफ जांच करने और छह महीने के भीतर अनुपालन हलफनामा दायर करने का आदेश दिया गया है।
  6. रिफंड: रुद्रवीर्या डेवलपर्स लिमिटेड से प्राप्त राशि को चार सप्ताह के भीतर वापस किया जाए।
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हाईकोर्ट ने अंत में दोहराया कि उसका कर्तव्य NSEL घोटाले के 13,000 पीड़ितों के हितों की रक्षा करना है, और सक्षम प्राधिकारी ने “नीलामी आयोजित करने के वास्तविक उद्देश्य को ही विफल कर दिया था।”

मामले का विवरण:

  • मामले का शीर्षक: प्राइमज़ोन डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड बनाम महाराष्ट्र राज्य और अन्य (संबंधित मामलों के साथ)
  • केस नंबर: क्रिमिनल अपील नंबर 337 ऑफ 2026
  • पीठ: जस्टिस ए. एस. गडकरी और जस्टिस कमल खाता
  • दिनांक: 8 मई, 2026

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