ReT योजना बंद होने से चयन पैनल में शामिल उम्मीदवारों के अधिकार खत्म नहीं होंगे: सुप्रीम कोर्ट ने J&K को नियुक्ति आदेश जारी करने का निर्देश दिया

सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर की Rehbar-e-Taleem (ReT) योजना से जुड़े एक बड़े मामले में कहा है कि वर्ष 2018 में योजना को बंद करने का आदेश उन उम्मीदवारों के अधिकारों को पीछे से प्रभावित नहीं कर सकता, जिनके नाम पहले ही चयन पैनल में शामिल हो चुके थे।

न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी और न्यायमूर्ति अतुल एस. चंदुरकर की पीठ ने जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट के फैसले में संशोधन करते हुए केंद्रशासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर को निर्देश दिया कि चयन पैनल में शामिल योग्य उम्मीदवारों को आठ सप्ताह के भीतर औपचारिक नियुक्ति/नियोजन आदेश जारी किए जाएं। यह नियुक्ति उपलब्ध रिक्तियों और चयन पैनल में उम्मीदवारों की स्थिति के अनुसार होगी।

हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह फैसला ReT योजना को फिर से शुरू करने के रूप में नहीं पढ़ा जाएगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि ये निर्देश मामले की विशेष परिस्थितियों में संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत जारी किए गए हैं और इन्हें मिसाल के रूप में नहीं माना जाएगा।

मामला क्या था?

ReT योजना जम्मू-कश्मीर के शिक्षा विभाग ने 28 अप्रैल 2000 को शुरू की थी। इसका उद्देश्य प्राथमिक और मिडिल स्कूलों में शिक्षकों की कमी को दूर करना था, खासकर दूरदराज और पिछड़े इलाकों में।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में दर्ज किया कि यह योजना स्थानीय लोगों को शिक्षक के रूप में जोड़कर स्कूल और समुदाय के बीच सीधा संबंध बनाने के लिए लाई गई थी। योजना का उद्देश्य नामांकन बढ़ाना, ड्रॉपआउट रोकना और उन क्षेत्रों में शिक्षा उपलब्ध कराना था, जहां शैक्षणिक सुविधाएं कम थीं।

16 नवंबर 2018 को सरकार ने आदेश जारी कर ReT योजना को औपचारिक रूप से बंद कर दिया। इसी आदेश के तहत उन सभी विज्ञापनों और चयन पैनलों को भी रद्द या वापस मान लिया गया, जिनमें नियुक्ति आदेश जारी नहीं हुए थे।

इसी आदेश को चुनौती देते हुए कई उम्मीदवारों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

हाईकोर्ट ने क्या कहा था?

जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट ने ReT योजना बंद करने के सरकारी आदेश की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा था, लेकिन कुछ श्रेणियों को इससे बाहर रखा था।

हाईकोर्ट ने कहा था कि जिन चयन पैनलों पर कार्रवाई हो चुकी थी और जिनमें नियुक्ति आदेश जारी हो चुके थे, वे प्रभावित नहीं होंगे। कोर्ट ने यह भी कहा था कि यदि किसी उम्मीदवार के पक्ष में न्यायालय ने नियुक्ति का अधिकार माना है या आगे ऐसा फैसला दिया जाता है, तो सरकारी आदेश उसे प्रभावित नहीं करेगा।

हाईकोर्ट ने उन मामलों को भी संरक्षण दिया था, जहां चयन पैनल स्वीकृत हो चुका था और उम्मीदवारों ने पैनल पर कार्रवाई से पहले अदालत का रुख कर लिया था।

केंद्रशासित प्रदेश ने हाईकोर्ट के इन्हीं अपवादों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। वहीं, कुछ उम्मीदवारों ने योजना बंद करने के आदेश को ही चुनौती दी।

सुप्रीम कोर्ट में दलीलें

जम्मू-कश्मीर प्रशासन की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के.एम. नटराज ने कहा कि शिक्षा का अधिकार कानून, 2009 और राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद यानी NCTE के नियम लागू होने के बाद ReT योजना के तहत नियुक्तियां जारी नहीं रह सकतीं।

प्रशासन की ओर से तर्क दिया गया कि ReT योजना में निर्धारित योग्यता अब RTE Act और NCTE के नियमों के तहत जरूरी न्यूनतम योग्यता से कम है, इसलिए आगे नियुक्तियां कानूनी रूप से संभव नहीं हैं।

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दूसरी ओर, उम्मीदवारों की ओर से कहा गया कि उन्हीं चयन पैनलों से कई लोगों को नियुक्त किया जा चुका है, जो इस मुकदमे का हिस्सा हैं। ऐसे में केवल इस आधार पर बाकी उम्मीदवारों को नियुक्ति से वंचित नहीं किया जा सकता कि उनके संबंध में मुकदमा लंबित था।

राज्य ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वर्ष 2002 से 2018 के बीच कुल 39,585 ReT शिक्षक नियुक्त किए गए। वर्तमान मामलों से जुड़े 74 विज्ञापनों में 2,349 पद विज्ञापित किए गए थे और 1,679 उम्मीदवार चयन पैनलों में शामिल थे। इनमें से 1,538 उम्मीदवारों को नियुक्ति दी जा चुकी थी।

प्रशासन ने यह भी कहा कि जिन मामलों में आपत्ति या मुकदमा लंबित था, वहां 16 नवंबर 2018 के बंदी आदेश से पहले नियुक्ति आदेश जारी नहीं किए जा सके।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि जिन उम्मीदवारों को नियुक्ति आदेश नहीं मिले, उनके मामले में मुख्य कारण केवल यह था कि उनके संबंध में मुकदमा लंबित था।

कोर्ट ने कहा कि इस आधार पर उम्मीदवारों के बीच भेद करना संविधान के अनुच्छेद 14 की कसौटी पर टिकता नहीं है।

पीठ ने कहा:

“यह वर्गीकरण, प्रथम दृष्टया, भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 की कसौटी पर विफल होता है।”

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्य द्वारा किया गया कोई भी वर्गीकरण दो शर्तों पर खरा उतरना चाहिए। पहला, वह स्पष्ट और समझने योग्य अंतर पर आधारित हो। दूसरा, उसका उस उद्देश्य से तार्किक संबंध हो, जिसे हासिल करना सरकारी कार्रवाई का लक्ष्य है।

कोर्ट ने कहा कि प्रशासन के अनुसार ReT योजना बंद करने का उद्देश्य फर्जी मार्कशीट, जाली डिग्री और बनावटी दस्तावेजों की समस्या को रोकना था, जिससे शिक्षा के स्तर पर असर पड़ा था।

ऐसे उद्देश्य के सामने केवल मुकदमा लंबित होने के आधार पर उम्मीदवारों को अलग श्रेणी में रखना तार्किक नहीं माना जा सकता।

पीठ ने कहा:

“किसी उम्मीदवार से संबंधित मुकदमे का लंबित होना एक बाहरी परिस्थिति है और इसे किसी भी तरह ऐसे वर्गीकरण का आधार नहीं बनाया जा सकता।”

NCTE योग्यता और TET जरूरी

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ किया कि RTE Act लागू होने के बाद शिक्षकों की नियुक्ति में NCTE द्वारा निर्धारित न्यूनतम योग्यता का पालन जरूरी है।

कोर्ट ने अपने हालिया फैसले Anjuman Ishaat-E-Taleem Trust v. The State of Maharashtra & Ors. पर भरोसा किया, जिसमें कहा गया था कि कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए Teachers’ Eligibility Test यानी TET पास करना अनिवार्य योग्यता का हिस्सा है।

उस फैसले का उल्लेख करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि TET केवल प्रक्रिया संबंधी औपचारिकता नहीं है, बल्कि न्यूनतम योग्यता का आवश्यक हिस्सा है।

कोर्ट ने यह भी दोहराया कि TET शिक्षा के अधिकार से जुड़े गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के संवैधानिक उद्देश्य से जुड़ा हुआ है।

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अनुच्छेद 142 के तहत राहत

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्य द्वारा पेश प्रस्ताव उन उम्मीदवारों को समायोजित करने का प्रयास करता है, जिन्हें रोक आदेशों या लंबित मुकदमों के कारण नियुक्ति नहीं मिल सकी थी, बशर्ते वे बाद में NCTE की न्यूनतम योग्यता पूरी करें।

पीठ ने इसे व्यावहारिक दृष्टिकोण बताते हुए कहा कि नियुक्ति से जुड़े मामलों में राज्य को निष्पक्षता से काम करना चाहिए।

कोर्ट ने कहा कि इस मामले में संतुलन बनाने और पूर्ण न्याय करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 142 का उपयोग उचित है, क्योंकि इन अपीलों का परिणाम न केवल उम्मीदवारों के भविष्य को प्रभावित करेगा, बल्कि संविधान के अनुच्छेद 21-A के तहत गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अधिकार से भी जुड़ा है।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि 16 नवंबर 2018 का ReT योजना बंदी आदेश चयन पैनल में शामिल उम्मीदवारों के अधिकारों को पूर्वव्यापी रूप से प्रभावित नहीं करेगा।

कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन को निर्देश दिया कि चयन पैनल में शामिल उम्मीदवारों को उनकी स्थिति और उपलब्ध रिक्तियों के अनुसार आठ सप्ताह के भीतर औपचारिक नियुक्ति/नियोजन आदेश जारी किए जाएं।

ऐसे उम्मीदवारों को नियुक्ति के बाद NCTE नियमों और अधिसूचनाओं के तहत निर्धारित न्यूनतम योग्यता प्राप्त करनी होगी और TET पास करना होगा। इसके लिए उन्हें नियुक्ति की तारीख से तीन वर्ष और तीन प्रयासों का समय दिया गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य को हर वर्ष TET आयोजित करने का भी निर्देश दिया।

कोर्ट ने कहा कि जो उम्मीदवार निर्धारित समय में न्यूनतम योग्यता हासिल कर लेंगे और TET पास कर लेंगे, उनकी सेवाएं उसके बाद दो वर्ष की सेवा पूरी करने पर नियमित की जाएंगी।

यह शर्त उन उम्मीदवारों पर भी लागू होगी, जो 23 अगस्त 2010 के बाद और ReT योजना बंद होने से पहले चयन पैनलों से नियुक्त किए गए थे, लेकिन जिनके पास NCTE की निर्धारित योग्यता या TET नहीं है।

वरिष्ठता कैसे तय होगी?

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि जब उम्मीदवार या पहले से नियुक्त शिक्षक आवश्यक योग्यता हासिल कर लेंगे और TET पास कर लेंगे, तब उनकी वरिष्ठता चयन पैनल में उनकी मूल स्थिति के आधार पर दोबारा तय की जाएगी।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वरिष्ठता नियुक्ति, ज्वाइनिंग या नियमितीकरण की तारीख से प्रभावित नहीं होगी।

पीठ ने कहा:

“आपसी वरिष्ठता भी उसी के अनुसार निर्धारित की जाएगी।”

हालांकि, कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि कोई उम्मीदवार या पहले से नियुक्त व्यक्ति निर्धारित अवधि में जरूरी योग्यता हासिल नहीं करता या TET पास नहीं करता, तो राज्य उसकी सेवा समाप्त करने के लिए स्वतंत्र होगा।

कोर्ट ने कहा:

“भारत के संविधान के अनुच्छेद 21-A का आदेश, अनुच्छेद 142 के तहत पूर्ण न्याय करते समय भी, वेदी पर नहीं छोड़ा जा सकता।”

ऐसे उम्मीदवारों को वरिष्ठता या नियमितीकरण का कोई दावा नहीं मिलेगा।

फैसला सभी संबंधित उम्मीदवारों पर लागू होगा

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उसके निर्देश उन उम्मीदवारों पर भी लागू होंगे, जिन्हें वर्तमान कार्यवाही से जुड़े 74 विज्ञापनों के आधार पर पहले ही नियुक्त किया जा चुका है, भले ही वे इस मामले में पक्षकार न हों।

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कोर्ट ने निर्देश दिया कि फैसले का व्यापक प्रचार किया जाए और सभी उम्मीदवारों व नियुक्त व्यक्तियों को इसकी जानकारी दी जाए, ताकि वे जरूरत पड़ने पर NCTE नियमों के अनुसार न्यूनतम योग्यता प्राप्त कर सकें।

कोर्ट ने यह भी कहा कि ये निर्देश उन उम्मीदवारों पर लागू होंगे, जो किसी भी अदालत में मुकदमा लड़ रहे हैं और जिनके मामले इस फैसले की तारीख से पहले दाखिल किए गए थे।

लेकिन जिन उम्मीदवारों ने अब तक किसी अदालत में मामला दाखिल नहीं किया है, वे इस फैसले के आधार पर कोई नया दावा या नया कारण नहीं बना सकेंगे।

ReT योजना फिर से शुरू नहीं होगी

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस फैसले को ReT योजना को पुनर्जीवित करने के रूप में नहीं पढ़ा जाएगा।

पीठ ने कहा:

“दोहराव की कीमत पर यह स्पष्ट किया जाता है कि इस निर्णय को किसी भी उद्देश्य के लिए ReT योजना को पुनर्जीवित करने के रूप में नहीं माना जाएगा और न ही इसे ऐसे उम्मीदवारों को कोई अधिकार देने या प्रदान करने के रूप में समझा जाएगा, जो तैयार चयन पैनल का हिस्सा नहीं थे या जिन्होंने समय पर अदालत का रुख नहीं किया।”

कोर्ट ने कहा कि ये निर्देश मामले के विशेष तथ्यों में अनुच्छेद 142 के तहत दिए गए हैं और इन्हें किसी भी तरह मिसाल नहीं माना जाएगा।

मानदेय पर भी टिप्पणी

सुनवाई के दौरान कोर्ट के संज्ञान में लाया गया कि योजना के तहत शिक्षकों को ₹3,000 मानदेय दिया जा रहा है, जो वर्तमान समय में बहुत कम है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा:

“यह आशा और विश्वास किया जाता है कि राज्य सरकार उक्त स्थिति को समझेगी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए अपने विवेक से मानदेय बढ़ाने पर निर्णय लेगी।”

कोर्ट ने राज्य सरकार से कहा कि वह राज्य की परिस्थितियों और मौजूदा स्थिति को ध्यान में रखते हुए ऐसे शिक्षकों के मानदेय में संशोधन पर उचित निर्णय ले।

निष्कर्ष

सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट के फैसले को अपने निर्देशों की सीमा तक संशोधित कर दिया। सभी लंबित आवेदनों, जिनमें हस्तक्षेप और पक्षकार बनाए जाने के आवेदन भी शामिल थे, का निपटारा कर दिया गया। कोर्ट ने लागत को लेकर कोई आदेश नहीं दिया।

केस डिटेल्स

  • केस शीर्षक: केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर और अन्य बनाम सबा वानी (और संबंधित मामले)
  • केस संख्या: सिविल अपील संख्या ___/2026 (SLP (सिविल) संख्या 12210/2023 से उत्पन्न)
  • पीठ: न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी और न्यायमूर्ति अतुल एस. चांदुरकर
  • दिनांक: 30 अप्रैल, 2026

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