उत्तराखंड हाईकोर्ट ने शुक्रवार को मुजफ्फरनगर निवासी नितिन कुमार को जमानत दे दी है। कुमार को 89 जहरीले सांपों और उनके जहर को कथित रूप से अवैध तरीके से रखने के आरोप में अक्टूबर 2025 से न्यायिक हिरासत में रखा गया था।
मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति आशीष नैथानी ने पाया कि यह मामला तस्करी का नहीं, बल्कि लाइसेंस नवीनीकरण की प्रक्रिया में हुई प्रशासनिक देरी का प्रतीत होता है। कोर्ट ने गौर किया कि आरोपी के पास पहले से ही इस गतिविधि के लिए एक वैध लाइसेंस मौजूद था।
नितिन कुमार के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम (वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट) की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। राज्य के अधिकारियों ने कुमार के पास से बड़ी संख्या में जहरीले सांप और जहर बरामद किया था, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था।
अभियोजन पक्ष का मुख्य आरोप था कि कुमार सांपों के जहर के अवैध व्यापार में शामिल थे। वहीं, बचाव पक्ष ने इसे नियमों के अनुपालन और प्रशासनिक देरी का मामला बताया।
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील ने तर्क दिया कि कुमार की गतिविधियां पहले से ही राज्य द्वारा स्वीकृत थीं। उन्होंने बताया कि कुमार के पास जीवन रक्षक दवाएं बनाने के लिए सांप के जहर का उपयोग करने का एक वैध लाइसेंस था, जिसकी अवधि 31 दिसंबर, 2023 तक थी।
बचाव पक्ष ने आगे कहा कि:
- लाइसेंस के नवीनीकरण के लिए आवेदन पहले ही जमा किया जा चुका था, जो गिरफ्तारी के समय लंबित था।
- कुमार ने वन्यजीव अधिकारियों से सांपों को जंगल में छोड़ने की अनुमति भी मांगी थी, लेकिन संबंधित अधिकारियों ने इस अनुरोध पर कोई निर्णय नहीं लिया।
दूसरी ओर, सरकारी वकील ने जमानत अर्जी का कड़ा विरोध किया। उन्होंने दलील दी कि लाइसेंस पहले ही समाप्त हो चुका था। सरकार ने यह भी आरोप लगाया कि कुमार के कब्जे में कई सांपों की मृत्यु हो गई थी और वह दवा बनाने के लाइसेंस की आड़ में जहर के अवैध व्यापार में लिप्त थे।
तथ्यों की समीक्षा करने के बाद, कोर्ट ने पाया कि “जब पहले से ही एक वैध लाइसेंस मौजूद था, तो बरामद सांपों की संख्या अवैध कब्जे को स्थापित नहीं करती है।”
न्यायमूर्ति नैथानी ने उल्लेख किया कि विवाद की मुख्य वजह “लाइसेंस नवीनीकरण प्रक्रिया में देरी और चूक” लगती है, न कि कोई पूर्णतः आपराधिक गतिविधि। अवैध व्यापार के गंभीर आरोपों पर कोर्ट ने टिप्पणी की:
“क्या यह गतिविधि अवैध व्यापार के दायरे में आती है, यह मुकदमे (ट्रायल) के दौरान तय किया जाने वाला विषय है।”
यह देखते हुए कि आरोपी पहले ही काफी समय जेल में बिता चुका है और कानूनी विवाद प्रशासनिक स्थिति पर केंद्रित है, कोर्ट ने कुमार को जमानत पर रिहा करने का निर्देश दिया।

