राहुल गांधी ब्रिटिश नागरिकता मामला | इलाहाबाद हाईकोर्ट ने FIR दर्ज करने के निर्देश पर लगाई रोक; 20 अप्रैल को होगी नई सुनवाई

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ ब्रिटिश नागरिकता रखने के आरोपों में FIR दर्ज करने की मांग वाली याचिका पर अपना फैसला टाल दिया है।

जस्टिस सुभाष विद्यार्थी ने 17 अप्रैल, 2026 को कर्नाटक निवासी एस. विग्नेश शिशिर द्वारा व्यक्तिगत रूप से दायर ‘एप्लिकेशन U/S 528 BNSS संख्या 673/2026’ पर सुनवाई की थी। सभी पक्षों को सुनने के बाद, हाईकोर्ट ने खुली अदालत में फैसला सुना दिया था। हालांकि, इससे पहले कि फैसला टाइप होकर हस्ताक्षरित होता, हाईकोर्ट के संज्ञान में इलाहाबाद हाईकोर्ट की ही एक पूर्ण पीठ (Full Bench) का ‘जगन्नाथ वर्मा बनाम उत्तर प्रदेश राज्य’ (2014) वाला निर्णय आया।

पूर्ण पीठ ने उस मामले में यह स्पष्ट किया था कि यदि मजिस्ट्रेट धारा 156(3) CrPC के तहत FIR दर्ज करने और पुलिस जांच के आवेदन को खारिज करता है, तो वह केवल एक अंतरिम आदेश नहीं है, बल्कि उसके खिलाफ धारा 397 के तहत आपराधिक निगरानी (Criminal Revision) याचिका दायर की जा सकती है। पूर्ण पीठ ने यह भी कहा था कि ऐसी कार्यवाही में, उस व्यक्ति का पक्ष सुना जाना आवश्यक है जिस पर अपराध करने का संदेह है।

इस कानूनी स्थिति को देखते हुए, हाईकोर्ट ने उल्लेख किया कि प्रस्तावित आरोपी राहुल गांधी (जो इस मामले में विपक्षी पक्ष संख्या 1 हैं) को नोटिस जारी किए बिना धारा 528 BNSS के तहत आवेदन पर निर्णय नहीं लिया जाना चाहिए।

सुनवाई के दौरान, हाईकोर्ट ने विशेष रूप से याचिकाकर्ता, सरकारी अधिवक्ता, अतिरिक्त सरकारी अधिवक्ता और केंद्र सरकार के वकील सहित सभी पक्षों से पूछा था कि क्या प्रस्तावित आरोपी को नोटिस जारी करना आवश्यक है। उस समय सभी पक्षों ने दलील दी थी कि धारा 173(4) सहपठित धारा 175(3) BNSS के तहत आवेदन पर निर्णय लेते समय या उसे खारिज किए जाने के खिलाफ धारा 528 BNSS के तहत चुनौती देते समय ऐसे किसी नोटिस की आवश्यकता नहीं है।

हाईकोर्ट ने अब कहा है कि पक्षों को इस कानूनी पहलू पर अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाना चाहिए और मामले को 20 अप्रैल, 2026 को अगली सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है। फिलहाल गांधी को कोई औपचारिक नोटिस जारी नहीं किया गया है।

क्या है मामला?

विग्नेश शिशिर ने शिकायत दर्ज कराई थी कि राहुल गांधी ने ब्रिटेन स्थित कंपनी ‘बैकॉप्स लिमिटेड’ के निदेशक के रूप में कार्य करते हुए कंपनी के रिकॉर्ड में अपनी नागरिकता ब्रिटिश घोषित की थी। उन्होंने भारतीय न्याय संहिता (BNS), आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम, पासपोर्ट अधिनियम और विदेशी अधिनियम के प्रावधानों के तहत आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग की थी। पुलिस द्वारा मामला दर्ज करने से इनकार करने के बाद, शिशिर ने ट्रायल कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जहां उनका आवेदन खारिज हो गया। इसके बाद उन्होंने धारा 528 BNSS के तहत हाईकोर्ट का रुख किया।

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Case Details
Case Title: S. Vignesh Shishir v. Sri Rahul Gandhi & 3 Others
Case No.: Application U/S 528 BNSS No. 673 of 2026
Bench: Justice Subhash Vidyarthi
Date: April 17, 2026

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