नियमों के पालन हेतु किए गए वास्तविक प्रयासों के बावजूद सब्सिडी से इनकार नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यदि किसी संस्थान ने सरकारी योजना की शर्तों को पूरा करने के लिए लगातार और वास्तविक प्रयास (Bona Fide Efforts) किए हैं, तो उसे सब्सिडी के लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के फैसले को रद्द करते हुए, शीर्ष अदालत ने ‘एग्रीकल्चर प्रोड्यूस मार्केट कमेटी’ (APMC), डीसा को कोल्ड स्टोरेज सुविधा के लिए दी जाने वाली ‘कैपिटल इन्वेस्टमेंट सब्सिडी’ की पात्रता को बहाल कर दिया है। कोर्ट ने अधिकारियों द्वारा सब्सिडी वापस लेने और पहले से दी गई राशि की वसूली करने के फैसले को अनुचित बताया।

इस मामले का मुख्य प्रश्न “हॉर्टिकल्चर उत्पादों के कोल्ड स्टोरेज/भंडारण के निर्माण/विस्तार/आधुनिकीकरण के लिए पूंजी निवेश सब्सिडी” योजना से जुड़ा था। कोर्ट को यह तय करना था कि क्या APMC डीसा शेष 50% सब्सिडी पाने की हकदार है और क्या ‘नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट’ (NABARD) द्वारा पहले से दी गई 50% अग्रिम राशि को वसूलने का निर्णय वैध था।

जस्टिस संजय करोल और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने अपील को स्वीकार करते हुए सिंगल जज के आदेश को बहाल कर दिया। कोर्ट ने शेष सब्सिडी को तुरंत जारी करने और पहले से दी गई राशि को सुरक्षित रखने का निर्देश दिया।

मामले की पृष्ठभूमि

APMC डीसा ने गुजरात स्टेट को-ऑपरेटिव एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट बैंक लिमिटेड (GSCARDB) से ₹1 करोड़ का ऋण लेकर एक कोल्ड स्टोरेज सुविधा का निर्माण किया था। इसके लिए ‘नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड’ (NHB) द्वारा संचालित और नाबार्ड (NABARD) द्वारा क्रियान्वित सब्सिडी योजना के तहत आवेदन किया गया था।

शुरुआत में, ₹25 लाख की अग्रिम राशि संस्था के खाते में जमा की गई थी। 19 नवंबर, 2008 को एक संयुक्त निगरानी समिति ने दौरे के दौरान पाया कि कोल्ड स्टोरेज की क्षमता का उपयोग 20% से भी कम था, जिसके बाद शेष सब्सिडी रोक दी गई। मई 2011 में शॉर्ट सर्किट के कारण इस यूनिट में आग लग गई। इसके बाद नाबार्ड ने सब्सिडी वापस लेने और दी गई राशि की वसूली का आदेश दिया, जिसे NHB ने भी सही ठहराया।

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हाईकोर्ट के सिंगल जज ने APMC के पक्ष में फैसला सुनाया था, लेकिन डिवीजन बेंच ने बाद में अधिकारियों के फैसले को बहाल कर दिया था, जिसके खिलाफ यह अपील सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई।

पक्षों की दलीलें

नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड (NHB) ने अपनी लिखित दलीलों में दावा किया कि 2008 के निरीक्षण के बाद अपीलकर्ता अपनी ओर से किए गए प्रयासों को साबित करने में “पूरी तरह विफल” रहा। उनका तर्क था कि निरीक्षण के दौरान पाई गई कमियों को कभी सुधारा नहीं गया, जिससे संस्था सब्सिडी के लिए अपात्र हो गई।

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इसके विपरीत, अपीलकर्ता ने जून 2009 से अप्रैल 2011 के बीच किए गए व्यापक पत्राचार के रिकॉर्ड पेश किए। APMC और बैंक द्वारा भेजे गए इन पत्रों में बार-बार दोबारा निरीक्षण करने और अंतिम सब्सिडी जारी करने का अनुरोध किया गया था, जिसमें यह स्पष्ट किया गया था कि कोल्ड स्टोरेज के सभी चैंबर चालू स्थिति में थे।

कोर्ट का विश्लेषण

सुप्रीम कोर्ट ने पत्राचार के रिकॉर्ड और अधिकारियों की अपनी निरीक्षण रिपोर्ट की जांच की। जस्टिस करोल ने फैसले में इस बात पर जोर दिया कि मूल निरीक्षण रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से लिखा था:

“यूनिट का निर्माण पूरा हो चुका है और यह चालू (Commissioned) है, NHB/NABARD के दिशा-निर्देशों के अनुसार अंतिम सब्सिडी के लिए इस पर विचार किया जा सकता है।”

कोर्ट ने NHB के इस दावे पर आश्चर्य व्यक्त किया कि अपीलकर्ता ने कोई प्रयास नहीं किया। कोर्ट ने आग लगने की घटना से पहले किए गए 10 अलग-अलग औपचारिक पत्राचारों की सूची का हवाला देते हुए कहा:

“उपरोक्त रिकॉर्ड से यह स्पष्ट है कि अपीलकर्ता ने अपने बैंक के माध्यम से पैसा जारी कराने के लिए वास्तव में प्रयास किए थे… लेकिन उनका कोई परिणाम नहीं निकला। यदि अनुरोध के अनुसार निरीक्षण किया गया होता या राशि जारी कर दी गई होती, तो यह विवाद इतना लंबा नहीं खिंचता।”

पीठ ने यह भी नोट किया कि अधिकारियों ने सब्सिडी वापस लेने का कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया, विशेषकर तब जब प्रोजेक्ट का पूरा होना विवादित नहीं था और निर्माण के दौरान अपीलकर्ता की पात्रता पर कभी सवाल नहीं उठाया गया था।

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अदालत का फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने अपील स्वीकार करते हुए डिवीजन बेंच के फैसले को किनारे कर दिया और सिंगल जज के निर्देशों को बहाल किया। कोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि अपीलकर्ता द्वारा किया गया लगातार प्रयास एक ‘वास्तविक प्रयास’ था जिसे अधिकारियों ने अनदेखा कर दिया।

अदालत ने आदेश दिया:

  • यदि अपीलकर्ता सब्सिडी की पहले जारी की गई राशि वापस कर चुका है, तो अब पूरी राशि (100%) उसे जारी की जाए।
  • यदि पहले से जारी राशि अभी तक वापस नहीं की गई है, तो सब्सिडी की अंतिम किस्त तुरंत जारी की जाए।

केस विवरण

केस टाइटल: एग्रीकल्चर प्रोड्यूस मार्केट कमेटी, डीसा बनाम नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड एवं अन्य।
केस नंबर: सिविल अपील नंबर ____/2026 (SLP (सिविल) नंबर 13129/2025 से उत्पन्न)
बेंच: जस्टिस संजय करोल और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह
तारीख: 17 अप्रैल, 2026

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