बोकारो कंकाल बरामदगी मामला: झारखंड हाईकोर्ट ने दिए तत्काल डीएनए टेस्ट के आदेश; वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही पर उठाए सवाल

झारखंड हाईकोर्ट ने बोकारो के एक सनसनीखेज मामले में हस्तक्षेप किया है, जहाँ आठ महीने से लापता एक 18 वर्षीय युवती का कंकाल बरामद होने का संदेह जताया जा रहा है। गुरुवार को न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति संजय प्रसाद की खंडपीठ ने पुलिस को निर्देश दिया कि बरामद अवशेषों के नमूने तुरंत कोलकाता स्थित सेंट्रल फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (CFSL) भेजे जाएं।

अदालत का यह हस्तक्षेप लापता युवती की माँ, रेखा देवी द्वारा दायर याचिका के बाद आया है। मामले में पुलिस की गंभीर लापरवाही को देखते हुए, हाईकोर्ट ने CFSL कोलकाता को आदेश दिया है कि वह रेखा देवी और उनके पति के नमूनों के साथ कंकाल के डीएनए मिलान की रिपोर्ट दो सप्ताह के भीतर प्रस्तुत करे।

स्नातक में नामांकन के लिए पिनद्राजोरा थाना क्षेत्र के चास कॉलेज गई यह युवती पिछले साल 24 जुलाई से लापता थी। उसकी माँ ने अपहरण की शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन आठ महीने तक पुलिस के हाथ खाली रहे। हाल ही में एक व्यक्ति की गिरफ्तारी के बाद मामले में नया मोड़ आया, जिसका कथित तौर पर पीड़िता के साथ प्रेम संबंध था।

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पुलिस के अनुसार, आरोपी ने शादी के दबाव के चलते युवती की हत्या कर दी थी। 12 अप्रैल को आरोपी की निशानदेही पर जांचकर्ताओं ने एक कंकाल, हड्डियों के 19 टुकड़े, बाल, पीड़िता के कपड़े और हत्या में इस्तेमाल किया गया हथियार बरामद किया था।

हाईकोर्ट ने कोलकाता में होने वाले डीएनए टेस्ट के अलावा यह भी आदेश दिया कि कंकाल का पोस्टमार्टम रांची के राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (RIMS) में कराया जाए। अदालत को सूचित किया गया कि डीएनए मिलान की प्रक्रिया को गति देने के लिए माता-पिता के नमूने पहले ही लिए जा चुके हैं।

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सुनवाई के दौरान पुलिस महानिदेशक (DGP) और बोकारो के पुलिस अधीक्षक (SP) सहित वरिष्ठ अधिकारी खंडपीठ के समक्ष उपस्थित हुए। हत्या की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने भी अदालत में संबंधित दस्तावेज पेश किए।

सुनवाई के दौरान पुलिस की कार्यप्रणाली पर तीखी बहस हुई। महाधिवक्ता राजीव रंजन ने अदालत को बताया कि लापरवाही बरतने के आरोप में बोकारो एसपी द्वारा पिनद्राजोरा थाने के 28 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है।

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हालांकि, हाईकोर्ट ने इस कार्रवाई के दायरे पर असंतोष जताया। अपनी मौखिक टिप्पणी में खंडपीठ ने कहा कि केवल निचले स्तर के कर्मियों का निलंबन पर्याप्त नहीं है। अदालत ने कहा कि जो डीएसपी, एसपी और डीआईजी स्तर के अधिकारी इस मामले के प्रभारी थे, उन्हें भी जांच में विफलता के लिए निलंबित किया जाना चाहिए था, क्योंकि उनकी लापरवाही के कारण मामला महीनों तक लंबित रहा।

अदालत ने डीजीपी, बोकारो एसपी और एसआईटी के सदस्यों को पखवाड़े भर बाद अगली सुनवाई पर उपस्थित होने का निर्देश दिया है, जब फॉरेंसिक लैब की रिपोर्ट प्राप्त हो जाएगी।

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