पशु आहार पर FSSAI का निर्देश दिल्ली हाईकोर्ट ने किया रद्द; कहा- 2006 के अधिनियम के तहत अथॉरिटी के पास नहीं है शक्ति

दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) के उस निर्देश को रद्द कर दिया है, जिसमें दूध और मांस देने वाले पशुओं के आहार में ‘मीट या बोन मील’ (मांस या हड्डियों का चूरा) के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया गया था। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि FSSAI का अधिकार क्षेत्र केवल मानवीय उपभोग के लिए बने भोजन तक सीमित है और इसका विस्तार पशु आहार के नियमन तक नहीं होता है।

चीफ जस्टिस डी. के. उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की बेंच ने यह फैसला ‘गोदरेज एग्रोवेट लिमिटेड’ द्वारा दायर एक याचिका पर सुनाया। याचिकाकर्ता ने FSSAI के उस नियम को चुनौती दी थी जिसमें पोल्ट्री, सूअर और मछली को छोड़कर, अन्य दूध और मांस उत्पादक पशुओं को आंतरिक अंगों, ब्लड मील, या गोजातीय और सूअर के ऊतकों से बना आहार देने पर रोक लगाई गई थी।

इस कानूनी विवाद का मुख्य बिंदु यह था कि क्या खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006, FSSAI को यह शक्ति देता है कि वह पशुओं के चारे को नियंत्रित करे। हाईकोर्ट ने गौर किया कि इस अधिनियम के प्रावधान विशेष रूप से “मानवीय उपभोग के लिए भोजन” के नियमन के लिए बनाए गए हैं।

बेंच ने कहा कि खाद्य प्राधिकरण द्वारा पशु आहार को विनियमित करने का कोई भी प्रयास “उसकी शक्तियों के दायरे से बाहर” है। कोर्ट ने नोट किया कि चूंकि पशु आहार 2006 के अधिनियम के तहत मानव भोजन की परिभाषा में नहीं आता है, इसलिए FSSAI के पास इस तरह के प्रतिबंध लगाने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।

पशु आहार पर प्रतिबंधों के अलावा, हाईकोर्ट ने FSSAI के उन आदेशों पर भी विचार किया जो 2019, 2020 और 2021 में जारी किए गए थे। इन आदेशों में निर्देश दिया गया था कि व्यावसायिक पशु आहार को भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के मानकों का पालन करना अनिवार्य होगा।

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हाईकोर्ट ने इन निर्देशों को कानूनी रूप से अनुचित पाया। बेंच ने टिप्पणी की कि व्यावसायिक चारे के लिए BIS मानकों का पालन अनिवार्य करना “कानून के दायरे से परे” था, क्योंकि ऐसा अनुपालन प्रकृति में स्वैच्छिक है जब तक कि केंद्र सरकार इसे अनिवार्य न कर दे। कोर्ट ने बताया कि अधिकारी केंद्र सरकार का ऐसा कोई भी आदेश पेश नहीं कर सके जिसके तहत व्यावसायिक पशु आहार के लिए BIS मानक अनिवार्य किए गए हों।

विवादित नियमों और उसके बाद के निर्देशों को रद्द करते हुए, हाईकोर्ट ने माना कि FSSAI ने 2006 के अधिनियम के तहत अपनी कानूनी शक्तियों का उल्लंघन (Ultra Vires) किया है।

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बेंच ने निष्कर्ष निकालते हुए कहा, “हमारी राय में विवादित नियम के साथ-साथ 10.12.2019, 27.01.2020 और 01.01.2021 के निर्देश अवैध हैं और 2006 के अधिनियम के दायरे से बाहर होने के कारण टिकने योग्य नहीं हैं।”

इस फैसले के साथ ही, हाईकोर्ट ने ‘खाद्य सुरक्षा और मानक (खाद्य उत्पाद मानक और खाद्य योजक) विनियम, 2011’ के विनियम 2.5.2 के साथ संलग्न ‘नोट (c)’ और संबंधित निर्देशों को आधिकारिक रूप से रद्द कर दिया है।

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