इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने ₹1.5 करोड़ के कथित GST रिश्वत मामले में आरोपित भारतीय राजस्व सेवा (IRS) अधिकारी प्रभा भंडारी की जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड पर उपलब्ध साक्ष्य इस चरण पर जमानत देने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। यह आदेश 10 मार्च को न्यायमूर्ति राजीव सिंह की पीठ ने पारित किया।
अभियोजन के अनुसार, प्रभा भंडारी, जो झांसी में केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (CGST) की डिप्टी कमिश्नर के पद पर तैनात थीं, ने अन्य अधिकारियों के साथ मिलकर GST चोरी के एक मामले को निपटाने के बदले व्यवसायियों से ₹1.5 करोड़ की रिश्वत मांगी थी। इस मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने जाल बिछाकर कार्रवाई की, जिसमें एक सह-आरोपी अधिकारी के पास से ₹70 लाख बरामद किए गए।
जमानत याचिका में भंडारी की ओर से दलील दी गई कि उनके पास से कोई सीधी बरामदगी नहीं हुई है और मामला मुख्य रूप से सह-आरोपी अजय शर्मा, जो CGST सुपरिंटेंडेंट हैं, के बयान पर आधारित है। यह भी कहा गया कि वह गर्भवती हैं, उनके पास एक वर्ष का बच्चा है और जांच पूरी हो चुकी है तथा आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है।
वहीं, CBI ने जमानत का विरोध करते हुए एक रिकॉर्डेड व्हाट्सएप कॉल का हवाला दिया, जिसमें कथित तौर पर रिश्वत की रकम को लेकर बातचीत और उसे सोने में बदलने की चर्चा सामने आई। एजेंसी ने यह भी कहा कि मामले में परिस्थितिजन्य और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की एक पूरी श्रृंखला मौजूद है और आरोपी ने जांच में सहयोग नहीं किया।
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि उपलब्ध साक्ष्य जमानत देने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। हालांकि, यह ध्यान में रखते हुए कि आरोपी एक महिला है, कोर्ट ने निचली अदालत को निर्देश दिया कि मुकदमे की सुनवाई तेजी से पूरी की जाए और अनावश्यक स्थगन से बचा जाए।

